अमेरिका से तालिबान को मिली बड़ी खुशखबरी, कामयाबी की तरफ पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा? खुश होंगे इमरान
तालिबान ने जैसे ही अफगानिस्तान पर कब्जा जमाया, ठीक उसके बाद से पाकिस्तान उसके लिए दुनिया भर में प्रोपेगेंडा चला रहा है और अफगानिस्तान की मदद के लिए ही इस्लामाबाद में इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक का आयोजन किया गया था।
वॉशिंगटन/मॉस्को, दिसंबर 21: देश की आर्थिक स्थिति से बेचैन तालिबान के लिए अमेरिका से बहुत अच्छी खबर आ रही है। अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा किए तालिबान को पांच महीने से ज्यादा का वक्त हो चुका है और तालिबान ने दुनिया के कहे के मुताबिक, अभी तक वैसी सरकार का गठन नहीं किया है, जिसकी मांग की गई है, बावजूद इसके तालिबान को बहुत बड़ी राहत मिल सकती है और संभावना इस बात की भी है, कि अफगानिस्तान को लेकर पिछले कई महीनों से पाकिस्तान जिस प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ा रहा है, वो भी कामयाब हो सकता है।

अमेरिका से तालिबान को अच्छी खबर
अमेरिका से मिल रही रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सांसदों ने बाइडेन प्रशासन को चिट्ठी लिखकर अफगानिस्तान रिजर्व बैंक के भंडार को खोलने के लिए कहा है। यानि, अमेरिकी सांसदों ने बाइडेन प्रशासन को चिट्ठी लिखकर कहा है कि, अफगानिस्तान की विकराल स्थिति को देखते हुए, जिस 9.4 अरब डॉलर रुपये को अमेरिकी सरकार ने फ्रीज कर रखा है, उसे जारी कर दिया जाए। तालिबान के पक्ष में अमेरिका से अब तक ऐसी मांग नहीं उठी थी, लिहाजा अंतर्राष्ट्रीय मंच से तालिबान को बहुत बड़ी राहत मिलती दिख रही है। रूसी समाचार एजेंसी स्पुतनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति बाइडन के साथ साथ अमेरिका के ट्रेजरी विभाग को भी चिट्ठी लिखी है और सबसे खास बात ये है कि, चिट्ठी लिखने वाले सांसद बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी के ही हैं।

तालिबान के पक्ष में आए बाइडेन के सांसद?
स्पुतनिक ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि, डेमोक्रेटिक यूएस हाउस के सदस्यों ने कहा कि अफगानिस्तान में बनी मानवीय संकटों को देखने के बाद और विशेषज्ञों से मिली रिपोर्ट के आधार पर वो अमेरिकी प्रशासन से आग्रह कर रहे हैं, कि अफगान परिवारों और उनके बच्चों को नुकसान से बचाने के लिए वो अफगानिस्तान रिजर्व बैंक का 9.4 अरब डॉलर रुपये जारी कर दें और उससे प्रतिबंध हटा लें।

कठोर आर्थिक प्रतिबंध के खिलाफ अपील
राष्ट्रपति बाइडेन की पार्टी के सांसदों ने सोमवार को लिखी चिट्ठी में कहा है कि, ''हम अमेरिकी सहयोगियों और मानवीय विशेषज्ञों के साथ खड़े हैं, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका से कठोर आर्थिक उपायों से बचने का आग्रह किया गया है, जो सीधे तौर पर अफगान परिवारों और अफगान बच्चों को नुकसान पहुंचाएगा।'' उन्होंने लिखा है कि, "इसका मतलब यह है कि, अफगानिस्तान के विदेशी भंडार और चल रहे प्रतिबंधों को फ्रीज करने के संबंध में वर्तमान अमेरिकी नीति को ईमानदारी से, लेकिन तत्काल संशोधित किया जाए।"

'भयावह हो जाएगा अफगान संकट'
अमेरिकी सांसदों ने कहा कि, अफगानिस्तान की गिरती अर्थव्यवस्था और मानवीय पतन से पूरे क्षेत्र में एक नया शरणार्थी संकट पैदा होने का खतरा है। सांसदों ने कहा कि, अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक भंडार को फ्रीज करने का संयुक्त राज्य का फैसला काफी ज्यादा महंगाई को बढ़ा रहा है और कॉमर्शियल बैंकों और महत्वपूर्ण निजी व्यवसायों को बंद होने की तरफ धकेल रहा है। अमेरिकी सांसदों ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि, ''अफगानिस्तान का 9 अरब डॉलर से ज्यादा रुपये रोकना देश के लिए काफी खतरनाक है, क्योंकि अमेरिका के इस कदम से अफगानिस्तान में साल 2022 में उससे ज्यादा मौतें हो सकती हैं, जितनी मौतें पिछले 20 सालों में युद्धग्रस्त देश में हुई हैं''।

ओआईसी की बैठक में बोले यूएन अधिकारी
वहीं, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक के दौरान यूनाइटेड नेशंस के इमरजेंसी रिलीफ कॉर्डिनेटर मार्टिन ग्रिफिथ्स ने सोमवार को कहा कि, ''अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह गिर रही है और उसे कोई संभालने वाला नहीं है''। आपको बता दें कि, 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर तालिबान द्वारा कब्जा किए जाने के बाद विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानि आईएमएफ ने अफगानिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता पर प्रतिबंध लगा दिया है, जो अफगानिस्तान के सार्वजनिक खर्च का 75 प्रतिशत हिस्सा था। वहीं, अमेरिका ने भी अफगानिस्तान रिजर्व बैंक का 9.4 अरब डॉलर फ्रीज कर रखा है, जो अफगानिस्तान के सेन्ट्रल बैंक की प्रॉपर्टी है, और तालिबान लगातार अपील कर रहा है, कि अमेरिका इन पैसों को जारी करे, ताकि वो देश की व्यवस्था को संभाल सके।

पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा होगा कामयाब?
तालिबान ने जैसे ही अफगानिस्तान पर कब्जा जमाया, ठीक उसके बाद से पाकिस्तान उसके लिए दुनिया भर में प्रोपेगेंडा चला रहा है और अफगानिस्तान की मदद के लिए ही इस्लामाबाद में इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी को भी पाकिस्तान ने आमंत्रित किया था। इस्लामिक सहयोग संगठन के मंच पर बोलते हुए तालिबान के विदेश मंत्री ने कहा कि, ''संयुक्त राज्य अमेरिका को फौरन अफगानिस्तान के अरबों डॉलर को जारी करना चाहिए, क्योंकि अभी देश को बुरी तरह से पैसों की जरूरत है''। वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान तो कई कदम आगे जाकर तालिबान सरकार की जमकर तारीफ करने लगे और तालिबान द्वारा किए जा रहे मानवाधिकार उल्लंघन को अफगानिस्तान की संस्कृति तक बता डाला।

तालिबान के 'विदेश मंत्री' बन गये इमरान खान!
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने रविवार को वैश्विक समुदाय के लिए एक स्पष्ट चेतावनी जारी करते हुए कहा कि, अफगानिस्तान संभावित रूप से "दुनिया में सबसे बड़ा मानव निर्मित संकट" बन सकता है अगर दुनिया की तरफ से अभी अफगानिस्तान को संभालने की कोशिश नहीं की गई। राजधानी इस्लामाबाद में पाकिस्तानी संसद भवन में पड़ोसी देश अफगानिस्तान के मौजूदा हालात पर चर्चा करने के लिए इस्लामिक सहयोग संगठन यानि ओआईसी के विदेश मंत्रियों की बैठक का आयोजन किया गया है, जिसमें बात करते हुए इमरान खान ने अफगानिस्तान के मुद्दे पर दुनिया को बड़ी चेतावनी दी है।

इमरान ने की तालिबान की जमकर तारीफ
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इस्लामिक देशों के सामने एक तरह से तालिबान की जमकर तारीफ की है और कहा कि, पिछले कई सालों से अफगानिस्तान ने जितना भुगता है, उतना नुकसान किसी और ने नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि, तालिबान के नियंत्रण से पहले भी अफगानिस्तान की आधी आबादी गरीबी रेखा के नीचे थी और देश के बजट का 75 फीसदी हिस्सा विदेशी मदद से आता था। इमरान खान ने अफगानिस्तान के लिए 'चंदा' मागते हुए कहा कि, अफगानिस्तान जैसी स्थिति में कोई भी देश ढह जाएगा। इसके साथ ही इमरान खान ने अफगानिस्तान का मुद्दा उठाने वाले दूसरे वक्ताओं की भी तारीफ की है और कहा कि, "अगर दुनिया कार्रवाई नहीं करती है, तो यह सबसे बड़ा मानव निर्मित संकट होगा जो हमारे सामने सामने आ रहा है।"

मुस्लिम देशों के सामने 'मुसलमान कार्ड'
इस्लामिक सहयोग संगठन के सामने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जमकर मजहबी एजेंडा चलाने की कोशिश की और कहा कि, अफगानों की मदद करना इस्लामिक देशों का 'धार्मिक कर्तव्य' है। खास तौर पर अमेरिका को निशाने पर लेते हुए इमरान खान ने कहा कि, संयुक्त राज्य अमेरिका को चार करोड़ अफगान नागरिकों से तालिबान सरकार को "अलग" करना चाहिए। उन्होंने कहा, "वे 20 वर्षों से तालिबान के साथ संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन परेशान अफगानिस्तान के लोग हैं, इसीलिए तत्काल कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है''। उन्होंने कहा कि तालिबान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए किए गए वादों को पूरा करना था, जिसमें एक समावेशी सरकार बनाना और महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करना शामिल था।












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