चीन को जवाब देने अमेरिका ने भी दागा हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल, बीच में ही फेल हो गया रॉकेट
चीन को जवाब देने लिए अमेरिका ने जल्दबाजी में हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल का परीक्षण करने की कोशिश की, लेकिन रॉकेट फेल होने की वजह से अमेरिका का मिशन अभी रूक गया है।
वॉशिंगटन, अक्टूबर 22: दुनिया के दो महाशक्तिशाली देशों के बीच चल रही वर्चस्व की जंग में कहीं ये दुनिया ही बर्बाद ना हो जाए और अमेरिका और चीन के बीच चल रही इस 'लड़ाई' में कहीं करोड़ों लोगों मारे ना जाएं। ये आशंका हम इसलिए जता रहे हैं, क्योंकि इसी साल जुलाई और अगस्त महीने में चीन ने हाइपरसोनिक मिसाइल बम का परीक्षण अंतरिक्ष में किया है और जैसे ही इसकी खबर अमेरिका को लगी है, अमेरिका स्तब्ध है और जल्द से जल्द हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण कर दुनिया को बताना चाह रहा है कि असली बादशाह वही है, लेकिन इस जल्दबाजी में अमेरिका ने फिजिक्स के नियमों को भी तोड़ना शुरू कर दिया है और उसी वजह से अमेरिका का रॉकेट फेल हो गया है।(सभी तस्वीर प्रतीकात्मक)

अमेरिका का परीक्षण फेल
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रॉकेट फेल होने की वजह से अमेरिका हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल का परीक्षण टल गया है। हालांकि, अमेरिका ने हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी का सफल परीक्षण वर्जीनिया से किया है। रॉकेट फेल होने की वजह से संयुक्त राज्य की सेना को अपनी नई हाइपरसोनिक हथियार प्रणाली के परीक्षण में देरी करनी पड़ी। एबीसी न्यूज के अनुसार, अलास्का के कोडिएक में एक परीक्षण के दौरान एक हाइपरसोनिक ग्लाइड बॉडी के साथ एक बूस्टर रॉकेट लॉन्च करने में विफल रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की नौसेना और थल सेना ने पनडुब्बी आधारित हाइपरसोनिक मिसाइलों को विकसित करने के लिए संयुक्त 'डार्क ईगल' चलाया था, जो नाकामयाब हो गया है।

प्रोटोटाइप का हुआ सफल परीक्षण
पेंटागन द्वारा बयान में कहा गया है कि, वर्जीनिया में एक हाइपरसोनिक हथियार घटक प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण तो किया गया लेकिन रॉकेट फेस होने की वजह से हाइपरसोनिक मिसाइल ग्लाइड मिसाइल का परीक्षण नहीं हो पाया। के बारे में एक बयान जारी करने के कुछ ही घंटों बाद यह आया। C-HGB हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल, जिसे नौसेना और सेना विकसित कर रही है, एक पारंपरिक रॉकेट द्वारा लॉन्च की जाती है और फिर 13 हजार मील प्रतिघंटे की रफ्तार से अपने लक्ष्य तक जाती है। यह उड़ान में पैंतरेबाज़ी कर सकता है जिससे इसे नीचे गिराना असंभव हो जाता है। अमेरिका के इस मिशन के फेल होने की खबर उस वक्त आई है, जब खुलासा हुआ है कि, चीन ने परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हाइपरसोनिक ऑर्बिटल मिसाइल का दूसरा परीक्षण भी किया है।

चीन ने दोबारा मिसाइल दागा
ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने दावा किया है कि, चीन ने दोबारा परीक्षण 13 अगस्त को किया था और जुलाई में लांग मार्च रॉकेट पर अंतरिक्ष में लॉन्च किए गए एक समान 'हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन' को शामिल किया गया था, जिसे पहली बार इस सप्ताह की शुरुआत में रिपोर्ट किया गया था। यह बताया गया है कि चीन की नई तकनीक ने अमेरिकी अधिकारियों को स्तब्ध कर दिया है, विशेष रूप से सिस्टम 'भौतिकी के नियमों की अवहेलना' करता है और अमेरिकी शस्त्रागार में किसी भी चीज से बेहतर प्रतीत होता है। बीजिंग ने एक परीक्षण को स्वीकार करते हुए दावा किया है कि उसने एक 'शांतिपूर्ण' नागरिक स्पेसक्राफ्ट लॉन्च किया है। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि रॉकेट वास्तव में एक परमाणु हथियार से लैस हो सकता है जो मिसाइल डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त करने की क्षमता रखता है।

अमेरिका का हाइपरसोनिक प्रोग्राम
हाइपरसोनिक हथियार ऊपरी वायुमंडल में ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक या लगभग 3,853 मील प्रति घंटे की गति से यात्रा करते हैं। पेंटागन ने एक बयान में कहा, इन परीक्षणों ने 'एडवांस हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी कैपेबिलिटी एंड प्रोटोटाइप सिस्टम' का प्रदर्शन किया'। संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2000 के दशक की शुरुआत से अपने पारंपरिक त्वरित वैश्विक स्ट्राइक कार्यक्रम के एक भाग के रूप में हाइपरसोनिक हथियारों के विकास को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया है। लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियां संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए हाइपरसोनिक हथियार क्षमता विकसित करने के लिए काम कर रही हैं।

अमेरिका से उन्नत चीनी मिसाइल
विश्लेषकों ने कहा है कि, चीनी मिसाइल काफी ज्यादा विनाशकारी हैं और अमेरिका के पास अभी तक ऐसा डिफेंस सिस्टम नहीं है, जो चीन के हाइपरसोनिक मिसाइल को रोक सकें। वहीं, व्हाइट हाउस ने चीन के इस परीक्षण को खतरनाक करार दिया है तो अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चीन के इस परीक्षण को चिंताजनक करार दिया है। जबकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने किसी भी हाइपरसोनिक हथियार परीक्षण के अस्तित्व की पुष्टि या इनकार करने से इनकार कर दिया है।

चीन का हाइपरसोनिक प्रोग्राम
लंदन स्थित फाइनेंशियल टाइम्स ने गुरुवार को सनसनीखेज रिपोर्ट जारी करते हुए खुलासा किया है कि, बीजिंग ने 27 जुलाई को पहली बार हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया था, जो पृथ्वी के चारों ओर एक चक्कर लगाने के बाद अपने निशाना लगाया था, जो 2 मील पहले ही गिर गया। मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, चीन का न्यूक्लियर हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन पृथ्वी की निचली कक्षा में एक चक्कर लगाने के बाद अपने टार्गेट को हिट करने के लिए आगे बढ़ा, लेकिन मिसाइल निशाने को भेद नहीं पाया। इस मामले में फाइनेंशियल टाइम्स ने पांच जानकारों के हवाले से रिपोर्ट दी है, जिसमें कई बड़े खुलासे किए हैं। पिछले हफ्ते जब फाइनेंशियल टाइम्स ने पहली बार रिपोर्ट दी थी, तो चीन ने कहा था कि, उसने किसी मिसाइल का परीक्षण नहीं, बल्कि स्पेसक्राफ्ट का परीक्षण किया था।












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