पाकिस्तान के साथ एक बार फिर आतंकवाद का 'खेल' खेलेगा अमेरिका, बाइडेन प्रशासन का एक और डबल गेम?
अफगानिस्तान में अलकायदा और तालिबान के खिलाफ चली लड़ाई के दौरान अमेरिका ने अरबों डॉलर्स की मदद पाकिस्तान को दी थी और पाकिस्तानी सेना ने उसका जमकर फायदा उठाया था।

Pakistan News: आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के बहाने पाकिस्तान में अरबों डॉलर बहाने वाला अमेरिका, एक बार फिर से साउथ एशिया में आतंकवाद का 'खेल' खेलने वाला है, जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान ने हमेशा से भारत के खिलाफ करने के लिए किया है। अमेरिकी पैसों की बदौलत ही पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में अशांति के बीज बोए और अमेरिकी पैसों की बदौलत ही पाकिस्तान ने कश्मीर को अशांत रखा। वहीं, अब जब पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट में फंसा हुआ है, उस वक्त पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया है, कि अमेरिका की तरफ से संकेत मिले हैं, कि वो पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में फिर से मदद कर सकता है।

आतंकवादियों का 'अब्बा' पाकिस्तान!
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका ने मंगलवार को प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य समूहों द्वारा उत्पन्न आतंकवाद के नए खतरे से निपटने में पाकिस्तान की सहायता करने के लिए, 9/11 के बाद की कुछ आतंकवाद विरोधी पहलों को पुनर्जीवित करने के संकेत दिए हैं। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि अमेरिका की तरफ से ये संकेत दो दिवसीय काउंटर टेरेरिज्म डायलॉग के दौरान दिए गये हैं, जिसे पाकिस्तान होस्ट कर रहा था। आपको बता दें, कि पाकिस्तान, जो खुद दर्जनों आतंकी समूहों का जन्मदाता है, उसकी नाक में फिलहाल तहरीक-ए-तालिबान ने दम कर रखा है और पाकिस्तान में लगातार आतंकी हमले हो रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तान अभी भी मानने को तैयार नहीं है, कि उसके समाज में आतंक की जड़ें कितनी जम चुकी हैं और जब तक वो उस जड़ को नहीं काटेगा, तब तक वो आतंक से ऐसे ही मरता रहेगा।

आतंकवाद पर अमेरिकी संकेत क्या हैं?
अमेरिकी दूतावास ने जो बयान जारी किया है, उसमें कहा गया है, कि "इस डायलॉग ने पाकिस्तान और व्यापक क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी परिदृश्य पर चर्चा करने का मौका दिया है। जिसमें उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जहां संयुक्त राज्य अमेरिका और पाकिस्तान, क्षेत्रीय और वैश्विक खतरों का मुकाबला करने के लिए बेहतर सहयोग कर सकते हैं, उस सहयोग में सुधार कर सकते हैं। हिंसक उग्रवाद को रोकना और उसका मुकाबला करना और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करना लक्ष्य है"। बयान में आगे कहा गया है, कि "दोनों सरकारों ने इन विषयों पर बातचीत बढ़ाने और हिंसक चरमपंथ के सभी रूपों का बेहतर मुकाबला करने के पाकिस्तान के प्रयासों में सहायता के लिए आतंकवाद विरोधी कार्यक्रमों को फिर से शुरू करने या शुरू करने के तरीकों पर चर्चा जारी रखने का संकल्प लिया है।"

आतंकवाद पर नया 'खेल' खेलेगा अमेरिका?
अमेरिकी दूतावास ने जो बयान जारी किया है, उसमें सुझाव दिया गया है, कि अमेरिका अगस्त 2021 में पड़ोसी अफगानिस्तान से सैनिकों को वापस बुलाने के बावजूद, पाकिस्तान के साथ आतंकवाद विरोधी सहयोग बनाए रखना चाहता है। अमेरिकी दूतावास के इस बयान के बाद पाकिस्तान काफी खुश है, क्योंकि पाकिस्तान को लग रहा था, कि अफगानिस्तान से निकलने के बाद अमेरिका उसे पूरी तरह से छोड़ देगा और उसकी थाली में डॉलर की बूंदे गिरनी बंद हो जाएंगी, लेकिन अब पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अमेरिकी संकेत पाकिस्तान के लिए पॉजिटिव बात है। अमेरिकी बयान में कहा गया है, कि आतंकवाद विरोधी वार्ता संयुक्त राज्य अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कई क्षेत्रों में गहराते सहयोग को रेखांकित करती है। अमेरिका ने कई बहानों से, अलग अलग कार्यक्रमों के जरिए पाकिस्तान में डॉलर्स बरसाए हैं और एक बार फिर से अमेरिका, कार्यक्रमों का सहारा ले रहा है। अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद के लिए रणनीतिक ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन जैसे कार्यक्रमों का जिक्र किया है। यानि, आने वाले महीनों में अमेरिका, कई बहानों से पाकिस्तान को करोड़ों डॉलर की मदद दे सकता है।

अमेरिका का F16 फाइटर जेट पैकेज
आपको बता दें, कि पिछले साल अमेरिका ने पाकिस्तान को 45 करोड़ डॉलर का एफ-16 फाइटर जेट मरम्मत पैकेज दिया था और उसके लिए भी बहाना आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई थी। इस मदद के लिए भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गहरी नाराजगी जताई थी और उन्होंने अमेरिका में जाकर कहा था, कि 'किसे मूर्ख समझा जा रहा है?' जयशंकर ने अमेरिका-पाकिस्तान साझेदारी की खूबियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि, इसने किसी भी देश की "सेवा नहीं" की। गौरतलब है, कि 7 सितंबर की अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने प्रेस रिलीज जारी करते हुए पाकिस्तान को 45 करोड़ डॉलर का एफ-16 पैकेज देने की घोषणा की थी। अमेरिका ने पैकेज पाकिस्तान को ये कहकर दिया था, कि कि वो इन पैसों से एफ-16 विमानों के रखरखाव, उनकी मरम्मत और उन्हें अपग्रेड करने पर खर्च करे, ताकि एफ-16 विमान उड़ान भरने की स्थिति में रहे।












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