पन्नून की हत्या की साजिश में भारतीय नागरिक.. कॉमेडी-जासूसी फिल्मों की तरह है US की कहानी, क्यों फंसा रहा?

US govt charges Indian Khalistani separatist: बुधवार को एक ऑफिशियल प्रेस रिलीज में दावा किया गया, कि संयुक्त राज्य अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (डीओजे) ने एक भारतीय नागरिक पर अमेरिका स्थित खालिस्तानी नेता की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है।

डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के आरोप में 52 साल के एक भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को चार्ज किया गया है और आरोप लगाया गया है, कि "आज न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले में, 52 वर्षीय भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता उर्फ निक के खिलाफ न्यूयॉर्क में एक अमेरिकी नागरिक की हत्या की नाकाम साजिश में भागीदारी के संबंध में, सुपारी देकर हत्या के आरोप का एक सुपरसीडिंग अभियोग खोला गया।"

Khalistani separatist

यानि, अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट के आरोर में कहा गया है, कि निखिल गुप्ता नाम के शख्स ने अमेरिका में खालिस्तानी आतंकवादी की हत्या करने के लिए एक शख्स को सुपारी दी थी।

जाहिर तौर पर पहली नजर में देखने पर पता चलता है, कि अमेरिका का ये विस्फोटक आरोप, भारत की प्रतिष्ठा को धक्का लगा रहा है, लेकिन जब विस्तार से अमेरिकी आरोपों को पड़ताल करने की कोशिश करेंगे, तो ऐसा लगता है, कि ये किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट है, जो 70 के दशक में बनाई जाती थी।

सबसे पहले आइये समझते हैं, कि अमेरिका की कहानी क्या है?

DoJ की प्रेस रिलीज में जो कहानी लिखी गई है, उसके मुताबिक, "इस साल की शुरुआत में, एक भारतीय सरकारी कर्मचारी ने, भारत और अन्य जगहों पर गुप्ता सहित अन्य लोगों के साथ मिलकर, अमेरिकी धरती पर एक वकील और राजनीतिक कार्यकर्ता की हत्या की साजिश रची, जो भारतीय मूल का अमेरिकी नागरिक है। और न्यूयॉर्क शहर में रह रहा है।"

डीओजे के बयान में कहा गया है, कि "CC-1 एक भारतीय सरकारी एजेंसी का कर्मचारी है, जिसने खुद को 'सिक्योरिटी मैनेजमेंट' और 'इंटेलिजेंस' में जिम्मेदारियों के साथ 'सीनियर फिल्ड ऑफिसर' बताया है। इसने बताया है, कि वो पहले भारत के केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में सेवा कर चुका है, जो 'युद्ध तकनीक' और 'हथियार' चलाने की ट्रेनिंग हासिल कर चुका है।

यानि, अमेरिका ने उस भारतीय अधिकारी का नाम अभी सार्वजनिक नहीं किया है, और उसका नाम कोड वर्ड में CC-1 बताया है।

डीओजे के आरोप में आगे कहा गया है, कि "CC-1 ने भारत से हत्या की साजिश का डायरेक्शन किया है।" विज्ञप्ति में दावा किया गया है, कि उसने संयुक्त राज्य अमेरिका में हत्या की साजिश रचने के लिए कथित तौर पर निखिल गुप्ता को भर्ती किया था।

अब आपको धीरे धीरे लग रहा होगा, कि आप कोई भारतीय जासूसी फिल्म देख रहे होंगे, जैसे एक था टाइगर टाइफ। एक सेकंड के लिए भूल जाइये, कि ये अमेरिकन आरोप हैं, फिर तो आप निश्चित ही यही सोच रहे होंगे, कि आप मेरठ में लिखी कई किसी उपन्यास की कहानी पढ़ रहे होंगे।

यानि, अमेरिका का कहना है, कि एक भारतीय सरकारी कर्मचानी ने चेक रिपब्लिक में रहने वाले किसी निखिल गुप्ता को पन्नून की हत्या करने के लिए सुपारी दिया। फिर निखिल गुप्ता ने अमेरिका के न्यूयॉर्क में रहने वाले एक और शख्स को पन्नून की हत्या की सुपारी थी और संयोग से, निखिल गुप्ता ने जिस शख्स को सुपारी दी, वो अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए का एक एजेंट था।

अब तो आप पूरी तरह से यकीन कर चुके होंगे, कि "मैं आपको किसी उपन्यास की कहानी सुना रहा होऊंगा और मैं आगे आपसे ये कहूंगा, कि फिर वो अमेरिकन एजेंट पन्नून से मिलता है, उसे बताता है, कि भारत तुम्हारी हत्या करना चाहता है, तुम छिप जाओ।... कुछ कुछ ऐसी कहानी की आप उम्मीद कर रहे होंगे"।

तो आपको हम बता दें, कुछ कुछ ऐसा ही हुआ भी था। जब कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर को जून में मारा गया और सितंबर महीने में कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत को उस हत्याकांड से लिंक किया, उसके बाद रिपोर्ट यही आई थी, कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने पन्नून को उसकी हत्या को लेकर सतर्क किया था।

यानि, अमेरिकी अधिकारियों ने दो पैग लगाकर, किसी हॉलीवुड फिल्म को देखा होगा, और फिर भारत के खिलाफ ये कहानी तैयार की होगी। तो फिर सवाल ये उठता है, कि अमेरिका ने इस साजिश को नाकाम कैसे किया? तो कहानी के आगे का हिस्सा पढ़िए...

कहानी में साजिश को कैसे किया गया नाकाम?

अमेरिका की कहानी में आगे लिखा गया है, कि "टारगेट को हिट करने के लिए निखिल गुप्ता ने "CC-1 के निर्देश पर... एक व्यक्ति से संपर्क किया" जिसे वह "एक आपराधिक सहयोगी मानता था, लेकिन जो वास्तव में अमेरिकी खुफिया एजेंसी के साथ काम करने वाला एक गोपनीय स्रोत था।"

डीओजे ने कहा, कि "इस स्रोत ने गुप्ता को एक "कथित हिटमैन" से मिलवाया, जो वास्तव में एक "गुप्त अमेरिकी कानून प्रवर्तन अधिकारी" था, जिसके बाद इस काम को अंजाम देने के लिए "$100,000" का सौदा किया गया था।

कहानी में आगे लिखा गया है, कि "प्रारंभिक भुगतान किए जाने के बाद, "CC-1 ने गुप्ता को टारगेट के बारे में व्यक्तिगत जानकारी प्रदान की, जिसमें न्यूयॉर्क शहर में 'पीड़ित' के घर का पता, पीड़ित से जुड़े फोन नंबर और पीड़ित के दिन-प्रतिदिन के क्रिया-कलापों के बारे में विवरण शामिल थे।"

डीओजे की कहानी में आगे लिखा गया है, कि "इसके बाद निखिल गुप्ता ने गुप्त अधिकारी (अमेरिकी) को सूचना दी, जिसके बारे में उनका मानना था कि वह एक हिट व्यक्ति था।"

यानि, डीओजे की कहानी कहती है, कि पन्नून की हत्या की सुपारी एक अमेरिकी एजेंट को ही दे दी गई, जिसके बारे में निखिल गुप्ता को कोई जानकारी नहीं थी।

डीओजे में आगे लिखा गया है, कि "गुप्ता ने 'हिटमैन' को "जितनी जल्दी हो सके" हत्या को अंजाम देने के लिए कहा, लेकिन "उसे विशेष रूप से निर्देश भी दिया" कि वह "आगामी सप्ताहों के बीच होने वाली प्रत्याशित व्यस्तताओं के समय के आसपास" हत्या न करे, क्योंकि उस वक्त उच्च स्तरीय अमेरिकी और भारतीय सरकारी अधिकारियों की बैठक होने वाली थी।"

डीओजे की स्क्रिप्ट में आगे है, कि "जून में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में एक गुरुद्वारे के बाहर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद, गुप्ता ने कथित तौर पर हत्यारे से कहा, कि निज्जर भी "टारगेट था" और "हमारे पास बहुत सारे टारगेट हैं।" CC-1 ने निखिल गुप्ता को पीड़ित के बारे में एक समाचार आर्टिकिल भेजा और निखिल गुप्ता को संदेश भेजा, "अब यह मुख्य टारगेट है।"

कहानी में साजिश का निशाना कौन था?

डीओजे के आरोप में कहा गया है, "निखिल गुप्ता के नाम के अलावा डीओजे ने पूरे बयान में कथित लक्ष्य को 'पीड़ित' के रूप में संदर्भित करते हुए, किसी नाम का उल्लेख नहीं किया है।

यानि, प्रेस रिलीज में अमेरिका ने निखिल गुप्ता के नाम के अलावा, किसी और नाम के बारे में नहीं बताया है और ये भी नहीं बताया है, कि किसे मारा जाना था।

अमेरिकी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है, कि कथित लक्ष्य न्यूयॉर्क स्थित एक वकील था जो "भारत सरकार का मुखर आलोचक है और एक अमेरिका-आधारित संगठन का नेतृत्व करता है, जो पंजाब के अलगाव की वकालत करता है।"

प्रेस रिलीज में कहा गया है, कि विक्टिम ने सार्वजनिक रूप से "पंजाब को भारत से अलग होने और एक सिख संप्रभु राज्य स्थापित करने" का आह्वान किया है और "भारत सरकार ने विक्टिम और उसके अलगाववादी संगठन को भारत से प्रतिबंधित कर दिया है।"

इससे संकेत मिलते हैं, कि अमेरिका गुरपतवंत सिंह पन्नून के बारे में बात कर रहा है, जो सिख फॉर जस्टिस संगठन का वकील है, जिसे भारत सरकार ने आतंकवादी संगठन करार देकर बैन कर रखा है।

निखिल गुप्ता कौन है और अभी वो कहां है?

निखिल गुप्ता के बारे में फिलहाल ज्यादा कुछ जानकारी नहीं है सिवाय इस तथ्य के, कि वह अमेरिका में रहने वाला एक भारतीय नागरिक हैं।

DoJ के बयान के अनुसार, "चेक अधिकारियों ने संयुक्त राज्य अमेरिका और चेक गणराज्य के बीच द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के अनुसार 30 जून 2023 को गुप्ता को गिरफ्तार किया और हिरासत में लिया।"

उस पर भाड़े के बदले हत्या करने और भाड़े के बदले हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है, प्रत्येक मामले में अधिकतम 10 साल की जेल की वैधानिक सजा हो सकती है।

कुल मिलाकर अमेरिका की ये कहानी थी, ताकि भारत के दामन को दागदार किया जा सके।

अमेरिका की कहानी पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

जियो पॉलिटिक्स के जानकर जोरावर दौलत सिंह ने एक ट्वीट करते हुए अमेरिका की इस कहानी को कॉमेडी प्लाट करार दिया है। उन्होंने लिखा है, कि "यह अमेरिकी अभियोग एक हास्यास्पद कथानक की तरह लगता है, जहां एक कथित भारतीय खुफिया अधिकारी के बारे में कहा जाता है, कि उसने एक बिचौलिए को एक हत्यारे को नियुक्त करने में मदद की थी, जो सुविधाजनक रूप से एक अमेरिकी गुप्त कानून प्रवर्तन एजेंट था!"

उन्होंने आगे लिखा है, कि "ऐसा विचित्र परिदृश्य तभी घटित हो सकता था, जब अमेरिका ने भारत को बदनाम करने के लिए कुछ भारतीयों, इस बेचारे भारतीय अधिकारी "सीसी-1" को भी शामिल कर लिया होता। लिहाजा, भारत को सिस्टम के अंदर के सड़े हुए तत्वों को बाहर निकालने के लिए गंभीर जवाबी कार्रवाई में संलग्न होने की जरूरत है।

उन्होंने कहा है, कि "अमेरिका को सभी आतंकवादियों और अलगाववादियों को सौंप देना चाहिए, ताकि उन पर भारतीय कानूनों के तहत कानूनी मुकदमा चलाया जा सके। लेकिन, सवाल ये है, कि अमेरिका पाकिस्तान की तरह अपनी धरती पर उग्र भारत-विरोधी आतंकवादियों को क्यों पनाह देता है?

वहीं, इंटरनेशनल रिलेशन एक्सपर्ट क्रिस ब्लैकबर्न का कहना है, कि "मुझे नहीं लगता, कि भारतीय सिक्योरिटी इतनी मूर्ख होगी, कि एक 'अंतर्राष्ट्रीय नशीले पदार्थों' और 'हथियारों' के तस्कर को इस तरह के हाई-प्रोफाइल हिट का उप-ठेका दिया जाए..."

उन्होंने आगे लिखा है, कि अमेरिकी आरोपों के मुताबिक, "निखिल गुप्ता ने वास्तविक गंदा काम करने के लिए अमेरिकी सरकार के एक मुखबिर को शामिल करने की कोशिश की.."

उन्होंने लिखा है, कि "एफबीआई लोगों को फंसाने के लिए जानी जाती है। उन्होंने 9/11 के बाद युवा मुस्लिम पुरुषों को कट्टरपंथी बनाकर और उन्हें आतंकवादी कृत्यों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने के लिए गाइड देकर बड़ी संख्या में आतंकवादी गिरफ्तारियां कीं। यह भी एक संयोग है, कि निखिल को वो हिटमैन मिला, जो अमेरिकी मुखबिर था।"

आपको बता दें, कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने सैकड़ों ऐसे लोगों को फंसाया, जो बेकसूर थे। अमेरिका अपने हितों के लिए हर नीचता से गुजर चुका है और इसमें कोई शक नहीं, कि किसी निखिल गुप्ता को अमेरिका ने भारत की छवि को खराब करने के लिए फंसाने की कोशिश की है, क्योंकि अमेरिकी कहानी से तो कम से कम यही पता चलता है।

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