US Election: वोटिंग का इतना खौफ कि भाग रहे चुनाव अधिकारी, अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव कितना खतरनाक है? जानिए
US Election News in Hindi: वैनेसा मोंटगोमरी ने तय किया है, कि इस साल 5 नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में वो मतदान स्थल मैनेजर का भार नहीं संभालेंगी। उन्होंने अपने गृह राज्य जॉर्जिया से अलजजीरा की एक रिपोर्ट में कहा है, कि "बस, बहुत हो गया।"
61 साल की वैनेसा मोंटगोमरी के पास इलेक्शन करवाने का लंबा अनुभव है और वो उन्होंने मतदान केन्द्र मैनेजर के तौर पर लगातार सुनिश्चित किया है, कि वोटिंग आसानी से और बिना किसी विघ्न-बाधा के समाप्त हो जाए। लेकिन, कई चुनाव अधिकारियों और मतदान कर्मियों के लिए 2020 का राष्ट्रपति चुनाव एक महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आया।

वैनेसा मोंटगोमरी उन चुनाव अधिकारियों में शामिल हैं, जिनके ऊपर मतदान के दौरान धोखाधड़ी के झूठे आरोप लगाए गये और उन्हें हिंसक धमकियां दी गईं। ज्यादातर मतदान अधिकारियों को मिलने वाली धमकियां एक खास सोर्स से आ रही थीं और माना जा रहा है, कि ऐसा काम डोनाल्ड ट्रंप के कट्टर समर्थक कर रहे थे। क्योंकि, चुनाव हारने के बाद ट्रंप ने फर्जीवाड़े का आरोप लगाकर इलेक्शन नतीजों के खिलाफ मुहिम चलाई, जिससे 2020 का राष्ट्रपति चुनाव विवादित हो गया और मतदान को लेतकर जनता में शक पैदा हुआ। और मतदान से मोह भंग होना, या शक होना, किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए खतरनाक है।
चार साल और आगे बढ़ें तो पता चलता है, डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर से राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार हैं और उन्हें तगड़ी चुनौती कमला हैरिस से मिल रही है। जिसे देखते हुए वैनेसा मोंटगोमरी ने तय किया है, कि वो मतदान केन्द्र तक नहीं जाएंगी, क्योंकि उन्हें डर है, कि इस बार का राष्ट्रपति चुनाव पिछले चुनाव से भी ज्यादा तनावपूर्ण होगा, खासकर तब, जब डोनाल्ड ट्रंप पहले से ही चुनाव को लेकर शंका फैला रहे हैं।
वैनेसा मोंटगोमरी के साथ पिछले चुनाव में क्या हुआ था?
पिछले राष्ट्रपति चुनाव के अनुभव को याद करते हुए वैनेसा मोंटगोमरी ने कहा, कि "जॉर्जिया के महत्वपूर्ण सीनेट रन-ऑफ की रात थी, एक ऐसी रेस, जो यह तय करने वाली थी, कि कौन सी राजनीतिक पार्टी चैंबर को नियंत्रित करेगी।"
लेकिन मतदान बंद होने के बाद भी, मोंटगोमरी का काम खत्म नहीं हुआ था। उन्हें अभी भी काउंटी चुनाव कार्यालय में मतपत्र पहुंचाने के लिए यात्रा करनी थी। जब मोंटगोमरी अपनी बेटी के साथ मतदान स्थल से जा रही थीं, तो उन्होंने देखा, कि एक काली एसयूवी उनका पीछा कर रही थी। फिर एसयूवी ने उनकी कार को टक्टर मारी, जिससे उन्हें एक बार लगा, कि अब कार पलटकर खाई में गिरने वाली है।
घबराहट में, मोंटगोमरी और उनकी बेटी ने स्थानीय शेरिफ विभाग और अपने काउंटी के चुनाव पर्यवेक्षक को फोन किया। जिसके बाद वो तेजी सले शहर में पहुंचे। जब वे एक अच्छी तरह से रोशनी वाले क्षेत्र में पहुंचे, तभी एसयूवी ने उनका पीछा करना बंद किया। पुलिस ने आखिरकार मोंटगोमरी से मुलाकात की और उनके साथ चुनाव कार्यालय गई। उन्होंने औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज नहीं करने का फैसला किया, हालांकि बाद में इस घटना की रिपोर्ट रॉयटर्स समाचार एजेंसी ने की।
सेना के एक अनुभवी मोंटगोमरी ने कहा, कि "इससे पहले, मुझे कोई डर नहीं था। लेकिन वह सबसे डरावना था। वह सेना में होने से भी ज्यादा डरावना था।"
शुरू में, मोंटगोमरी ने अपना चुनाव का काम जारी रखने का फैसला किया। उनके सहकर्मी उन्हें परिवार की तरह महसूस कराते थे, और उन्हें मतदान करवाने में कर्तव्य की भावना महसूस होती थी- जिसे वह "एक अधिकार और विशेषाधिकार" मानती हैं। लेकिन, 2020 के बाद उन्होंने चुनाव नहीं करवाने का फैसला किा और मोंटगोमरी ने इसके पीछे 2020 का चुनाव बताया है।
उन्होंने कहा, कि "बहुत ज्यादा असभ्यता है और काफी ऊंगली उठाना है।" उन्होंने कहा, कि जैसे-जैसे 2024 का मतदान नजदीक आ रहा था, उन्हें बेचैनी बढ़ती जा रही थी।
उन्होंने कहा, "जितना बड़ा चुनाव होगा, उतनी ही बड़ी संभावना होगी, कि कोई आपको डराने की कोशिश करेगा और आपके मन में सवाल आएंगे, कि चुनाव करवाने के प्रोसेस से पीछे हट जाना चाहिए, क्योंकि ये आपके लिए खतरनाक हो सकता है।"

अमेरिका में चुनाव पर खतरनाक मौहाल
चुनाव कर्मियों के खिलाफ डराने-धमकाने और धमकियों ने, न सिर्फ मोंटगोमरी जैसे चुनावकर्मियों को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे देश में इसकी गूंज सुनाई दी है, जिससे चुनाव प्रशासन के काम की शैली में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।
2022 के मध्यावधि चुनावों में मोंटगोमरी फिर से चुनाव करवाने के लिए लौटीं हैं, लेकिन 2024 के राष्ट्रपति चुनाव ने नए सिरे से डर और आशंकाओं को जन्म दिया है। चुनाव अधिकारियों को इस साल के चुनाव में ज्यादा हिंसक घटनाओं के घटने की आशंका सता रही है।
विवादास्पद 2020 के चुनावों के बाद चुनाव अधिकारियों के खिलाफ धमकियों और हिंसा में वृद्धि ने गहरा प्रभाव डाला है, जिससे मिशिगन के रोचेस्टर हिल्स की पूर्व सिटी क्लर्क टीना बार्टन जैसे कई अनुभवी अधिकारियों को अपने करियर पथ को बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
बार्टन पर चुनाव धोखाधड़ी करने का गलत आरोप लगने के बाद उन्हें सीधे धमकियां मिली थीं, इसलिए उन्होंने अपना ध्यान अन्य चुनाव अधिकारियों को शिक्षित करने पर केंद्रित कर दिया। उनकी कहानी हाल के वर्षों में अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया के इर्द-गिर्द बढ़ते तनाव और संदेह को उजागर करती है, जो गलत सूचनाओं को दूर करने और लोकतांत्रिक प्रथाओं की रक्षा करने वालों के खिलाफ खतरों को कम करने में प्रभावशाली व्यक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देती है।
इन चुनौतियों के जवाब में, इस साल चुनाव कर्मियों की सुरक्षा और ट्रेनिंग को मजबूत करने पर ज्यादा ध्यान दिया गया है। लोकतंत्र की अग्रिम पंक्ति में खड़े लोगों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए मतदान स्थलों पर पैनिक बटन और बुलेटप्रूफ ग्लास लगाने जैसे उपाय लागू किए गए हैं। इसके अलावा, चुनाव अधिकारियों को इन कठिन समस्याओं से निपटने के लिए जरूरी ट्रेनिंग दी जा रही है।
शत्रुतापूर्ण माहौल और महत्वपूर्ण जोखिमों के बावजूद, कुछ चुनाव अधिकारी अपनी भूमिका के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में मजबूती से जुटे रहते हैं। उदाहरण के लिए, बार्टो काउंटी के जोसेफ किर्क, चुनाव कर्मियों के समर्पण का उदाहरण हैं, जो निष्पक्ष और सुरक्षित चुनाव कराने को प्राथमिकता देते रहते हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में यह लचीलापन लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बनाए रखने में चुनाव अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है।
ऐसे कई उदाहरण हैं। फिलाडेल्फिया, पेनसिल्वेनिया में एक पूर्व चुनाव आयुक्त अल श्मिट ने 2022 में कांग्रेस के सामने गवाही दी थी, कि ट्रंप द्वारा शहर के चुनावों में "भ्रष्टाचार का पहाड़" होने का झूठा दावा करने के बाद उन्हें और उनके परिवार को धमकाया गया था।
जॉर्जिया के राज्य सचिव ब्रैड रैफ़ेंसपरगर को भी राज्य में "ज्यादा वोट बटोरने" की ट्रंप की अपील का विरोध करने के बाद महीनों तक धमकियां मिलीं।
जॉर्जिया में भी, मांबेटी चुनाव कर्मी रूबी फ़्रीमैन और वांड्रिया "शे" मॉस छिप गईं, जब ट्रम्प के वकील रूडी गिउलिआनी ने एक 'षड्यंत्र सिद्धांत' का हवाला देते हुए दोनों महिलाओं पर सूटकेस में मतपत्र छिपाने के आरोप लगाए थे। बाद में उन्होंने गिउलिआनी के खिलाफ मानहानि के मुकदमे में मां-बेटी को 148 मिलियन डॉलर मिले।
ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस, चुनाव कर्मियों के खिलाफ धमकियों और डराने-धमकाने का प्रभाव अमेरिकी चुनाव प्रणाली में एक खतरनाक संकट की ओर इशारा करता है। चुनाव अधिकारियों के बीच बढ़ते बदलाव की संभावना भविष्य के चुनावों की सुरक्षा और अखंडता के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा पैदा करती है, जो चुनाव कर्मियों के लिए व्यापक सुधारों और मजबूत सुरक्षा की तत्काल आवश्यकता पर बल देती है।
मतदान कर्मियों को दिया गया पैनिक बटन
इस बर चुनाव के दिन तनाव बढ़ने की आशंका के चलते, देश भर के अधिकारियों और मतदान कर्मियों का कहना है, कि वे पहले से कहीं ज्यादा तैयारी कर रहे हैं। जॉर्जिया के कॉब काउंटी में, चुनाव कर्मियों को पैनिक बटन दबाने के लिए कहा गया है, जिससे स्थानीय शेरिफ के कार्यालय से सीधी लाइन जुड़ गई है। इस बीच, उत्तरी कैरोलिना के डरहम काउंटी में, चुनाव केंद्रों को अब बुलेटप्रूफ ग्लास लगाए गये हैं।
वहीं, कैलिफोर्निया के लॉस एंजिल्स में, किसी भी खतरनाक पदार्थ का पता लगाने के लिए मेल-इन मतपत्रों को सूंघने के लिए कुत्तों को तैनात किया जाएगा। कमिटी फॉर सेफ एंड सिक्योर इलेक्शन जैसे समूहों के नेतृत्व में प्रशिक्षण में भी उछाल आया है, जहां बार्टन अब एक वरिष्ठ चुनाव विशेषज्ञ हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, कई मतदान केन्द्रों को बम से उड़ाने की धमकियां भी दी जाती हैं।
2020 से पहले, हिंसा को इतना बड़ा खतरा नहीं माना जाता था। लेकिन अब मतदान कर्मियों को पूरा विश्वास है, कि हिंसक घटनाएं हो सकती हैं। जोसेफ किर्क, जो बार्टो काउंटी में चुनाव पर्यवेक्षक हैं, उन्होंने माना, कि उन्हें इस साल उन घटनाओं पर विचार करना पड़ा है, जो कभी दूर के डर की तरह लगती थीं। उन्होंने माना, कि मतदान करवाने में अब खतरे हैं और अब कुछ भी हो सकता है।
-
Khamenei Last Photo: मौत से चंद मिनट पहले क्या कर रहे थे खामनेई? मिसाइल अटैक से पहले की तस्वीर आई सामने -
38 साल की फेमस एक्ट्रेस को नहीं मिल रहा काम, बेच रहीं 'ऐसी' Photos-Videos, Ex-विधायक की बेटी का हुआ ऐसा हाल -
Uttar Pradesh Petrol-Diesel Price: Excise Duty कटौती से आज पेट्रोल-डीजल के दाम क्या? 60 शहरों की रेट-List -
KBC वाली तहसीलदार गिरफ्तार, कहां और कैसे किया 2.5 करोड़ का घोटाला? अब खाएंगी जेल की हवा -
Lockdown का PM मोदी ने क्या सच में ऐलान किया? संकट में भारत? फिर से घरों में कैद होना होगा?- Fact Check -
साथ की पढ़ाई, साथ बने SDM अब नहीं मिट पा रही 15 किलोमीटर की दूरी! शादी के बाद ऐसा क्या हुआ कि बिखर गया रिश्ता? -
Kal Ka Mausam: Delhi-Noida में कल तेज बारिश? 20 राज्यों में 48 घंटे आंधी-तूफान, कहां ओलावृष्टि का IMD अलर्ट? -
27 की उम्र में सांसद, अब बालेन सरकार में कानून मंत्री, कौन हैं सोबिता गौतम, क्यों हुईं वायरल? -
'मेरा पानी महंगा है, सबको नहीं मिलेगा', ये क्या बोल गईं Bhumi Pednekar? लोगों ने बनाया ऐसा मजाक -
Gajakesari Yoga on Ram Navami 2026: इन 4 राशियों की बदलेगी किस्मत, पैसा-सम्मान सब मिलेगा -
Uttar Pradesh Weather Alert: यूपी में 6 दिन का IMD अलर्ट! 36 जिलों में बारिश-आंधी, Lucknow में कैसा रहेगा मौसम -
IPS Success Love Story: एसपी कृष्ण ने अंशिका को पहनाई प्यार की 'रिंग', कब है शादी? कहां हुई थी पहली मुलाकात?












Click it and Unblock the Notifications