चीन ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन, बना रहा इंसानी दिमाग कंट्रोल करने वाला हथियार, जानिए कहां करेगा इस्तेमाल
नई दिल्ली, 31 दिसंबर: ठीक दो साल पहले चीन के वुहान में कोरोना वायरस फैला था। जिससे लाखों लोगों की जान अब तक जा चुकी है। बहुत से विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने इस वायरस को लैब में बनाया और ये एक तरह का जैविक युद्ध है। हालांकि चीन इन आरोपों से इनकार करता आ रहा है। साथ ही उसने कोरोना की उत्पत्ति की वजह जंगली जीवों को बताया। इस बीच अमेरिका ने चीन पर एक ऐसा हथियार विकसित करने का आरोप लगाया है, जिससे इंसानी दिमाग को कंट्रोल किया जा सकता है। ऐसे में उसे दुश्मन को मारने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि वो उन्हें नियंत्रित कर मानसिक रूप से विकलांग बना देगा। (सभी तस्वीरें सांकेतिक)

अमेरिका ने उठाया बड़ा कदम
अमेरिका खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन 'ब्रेन कंट्रोल वीपन' नाम के हथियार पर काम कर रहा है। इसकी मदद से वो किसी भी दुश्मन का दिमाग कंट्रोल कर सकता है। इसके बाद वो जो चाहे वो काम उससे करवाए। वहीं अगर दुश्मन ने चालाकी दिखाने की कोशिश की, तो चीन अपने हथियार से उसके दिमाग को पैरालाइज कर देगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका ने भी एक बड़ा कदम उठाया। जिसके तहत एकेडमी ऑफ मिलिट्री मेडिकल साइंसेज समेत 11 शोध संस्थानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस खास हथियार को विकसित करने के पीछे इन्हीं संस्थानों का हाथ बताया जा रहा।

सैन्य रिपोर्ट में हुआ खुलासा
ये फैसला अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने लिया है। जिसके पीछे 2019 की एक सैन्य रिपोर्ट का हवाला दिया गया। हालांकि विभाग ने विस्तार से मीडिया को नहीं बताया, बस इतना ही संकेत किया कि चीन इंसानों के दिमाग को कंट्रोल करना चाहता है। रिपोर्ट में लिखा गया कि चीन दुश्मन को मारना नहीं चाहता, बल्कि वो उनकी इच्छाशक्ति पर हमला करना चाहता है, ताकी उन्हें नियंत्रित किया जा सके।

नहीं मिल पाएंगे उपकरण
फर्म चीनी संस्थानों को कोई भी सामान नहीं भेजेंगी। मामले में एक अधिकारी ने एफटी से बात करते हुए कहा कि चीन जिस तकनीक को विकसित करने की कोशिश कर रहा है, उसमें 'जीन एडिटिंग, ह्यूमन परफॉर्मेंस एन्हांसमेंट और ब्रेन मशीन इंटरफेस शामिल हैं। ये एक गंभीर चिंता का विषय है।

उइगर मुसलमानों पर करेगा इस्तेमाल
वहीं अमेरिकी वाणिज्य सचिव जीना रायमोंडो ने कहा कि वो नहीं चाहते चीन कोई ऐसा हथियार विकसित करे, जिससे उनके नागरिकों को कंट्रोल किया जा सके। हालांकि आशंका जताई जा रही कि चीन इसका इस्तेमाल पहले उइगर मुसलमानों को नियंत्रित करेगा। लंबे वक्त से चीन उनका दमन करता आ रहा है। वहीं दूसरी ओर वाणिज्य विभाग ने चीन के साथ-साथ जॉर्जिया, मलेशिया और तुर्की की कुछ कंपनियों को भी ब्लैक लिस्ट में डाला है।












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