Ban on Chinese Airlines: चीनी फ्लाइट्स पर बैन लगाने की तैयारी में अमेरिका, भारतीय विमानों पर भी खतरा?
अमेरिकी एयरलाइन कंपनियों के विमानों को नो-गो जोन का पालन करने के लिए आवश्यक अधिक सर्किट वाले मार्गों पर उड़ान भरनी पड़ती है। वहीं, इन विमानों को ईंधन भरने के लिए भी कई जगह पर उतरना पड़ता है।

File Image: PTI
अमेरिकी परिवहन विभाग चीनी एयरलाइंस कंपनियों पर बैन लगाने की तैयारी में जुट गया है। इसके अलावा अमेरिकी परिवहन विभाग यात्रियों को अमेरिका ले जाने के लिए चीनी एयरलाइनों द्वारा रूसी हवाई क्षेत्र के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के तीन अधिकारियों ने इस बात की जानकारी न्यूयॉर्क टाइम्स को दी है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बीते सोमवार को इस संबंध में नेशनल सिक्योरिटी टीम और अन्य को आदेश भी दिया गया था।
US विमानों को नो-जोन का पालन जरूरी
एयरलाइंस फॉर अमेरिका उद्योग व्यापार समूह के अनुसार अमेरिकी सरकार का यह विचार यूएस एयरलाइंस द्वारा लॉबिंग का परिणाम है। आपको बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से अधिकांश पश्चिमी देशों के विमानों को रूसी हवाई क्षेत्र का उपयोग करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। चीन, भारत जैसे देशों की कंपनियां रूसी क्षेत्र से गुजर सकती हैं। उन पर किसी प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं लगा हुआ है। दूसरी ओर, अमेरिकी एयरलाइन कंपनियों के विमानों को नो-गो जोन का पालन करने के लिए आवश्यक अधिक सर्किट वाले मार्गों पर उड़ान भरनी पड़ती है।
हर साल 2 बिलियन डॉलर का नुकसान
एयरलाइंस फॉर अमेरिका के अनुसार, इससे अमेरिकी एयरलाइन उद्योग की कंपनियां को प्रतिद्वंदी कंपनियों की तुलना में नुकसान हो रहा है। व्यापार समूह के अनुसार यूएस एयरलाइन कंपनियों को विदेशी कंपनियों के मुकाबले हर साल 2 बिलियन डॉलर तक का नुकसान हो रहा है। इतना ही नहीं अमेरिकी एयरलाइन कंपनियों को उन यात्रियों के गुस्से का भी सामना करना पड़ता है क्योंकि उन्हें बाकी देशों के एयरलाइनस की तुलना में ज्यादा पैसे खर्च करना पड़ते हैं। ऐसे में अमेरिकी सीनेटर और एयरलाइन उद्योग ने बाइडेन प्रशासन से रूस के साथ व्यापार करने की इच्छुक एयरलाइनों पर प्रतिबंध लगाने या उन्हें अमेरिकी एयरलाइंस वाले रूट फोलो करने का अनुरोध किया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध से कंपनियों को नुकसान
एयरलाइंस फॉर अमेरिका के अनुसार चाइना ईस्टर्न, एमिरेट्स और एयर इंडिया जैसी कंपनियों को यूक्रेन युद्ध के बाद कोई नुकसान नहीं हुआ है और इन एयरलाइंस के राजस्व में खूब वृद्धि हुई है। ऐसा इसलिए क्योंकि वे रूस के क्षेत्र में जा सकती हैं और सबसे छोटा मार्ग अपना सकती हैं। वहीं, इन अमेरिकी विमानों को ईंधन भरने के लिए भी कई जगह पर उतरना पड़ता है और दर्जनों खाली सीटों के साथ लंबी दूरी की उड़ानें संचालित करनी पड़ती हैं।
पैसा और समय दोनों नुकसान
न्यूयॉर्क टाइम्स ने एयर इंडिया और अमेरिकन एयरलाइंस द्वारा संचालित न्यूयॉर्क जॉन एफ कैनेडी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और नई दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे के बीच दो उड़ानों की तुलना की। एयर इंडिया की उड़ान की लागत लगभग 1,500 डॉलर है और यह लगभग 13 घंटे और 40 मिनट तक चलती है। अमेरिकन एयरलाइंस की उड़ान की कीमत 1,740 डॉलर है और यह 14 घंटे 55 मिनट तक चलती है।












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