काबुल दूतावास से भारतीय वीजा और अफगानी पासपोर्ट चोरी, कहीं आतंकी ना आ जाएं देश, हाई अलर्ट जारी
रिपोर्ट के मुताबिक काबुल स्थिति हाई कमीशन पर हमला कुछ ऊर्दू बोलने वाले लोगों ने की और काफी संख्या में अफगान पासपोर्ट, भारतीय वीजा और मुहर चुरा लिए हैं, जिसके बाद अलर्ट जारी किया गया है।
काबुल/नई दिल्ली, अगस्त 25: काबुल में 15 अगस्त को तालिबान के कब्जे के बाद मची अराजक स्थिति के बीच अब खबर आई है कि कुछ लोगों ने भारतीय दूतावास पर हमला कर भारी संख्या में अफगानी पासपोर्ट और भारतीय वीजा की चोरी कर ली है और ऐसी आशंका है कि भारतीय वीजा का इस्तेमाल फर्जी पासपोर्ट बनाने में ना किया जाए, लिहाजा भारत सरकार ने इमिग्रेशन एजेंसियों के लिए हाई अलर्ट जारी कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय मिशन पर हमला करने के बाद भारत का आधिकारिक मुहर की भी चोरी की गई है और उसके जरिए काफी आसानी से फर्जी कागजात तैयार किए जा सकते हैं और उसके सहारे कोई भी संदिग्ध व्यक्ति या तालिबानी आतंकी आसानी से भारत पहुंच सकता है, लिहाजा भारत सरकार ने हाई अलर्ट जारी करते हुए बड़ा कदम उठाया है।

भारतीय वीजा-अफगान पासपोर्ट की चोरी
रिपोर्ट के मुताबिक काबुल स्थिति हाई कमीशन पर हमला कुछ ऊर्दू बोलने वाले लोगों ने की और काफी संख्या में अफगान पासपोर्ट, भारतीय वीजा और मुहर चुरा लिए, जिसके जरिए फर्जी कागजात काफी आसानी से तैयार किए जा सकते हैं। ये पूरी घटना 15 अगस्त के दिन हुई, जिस दिन काबुल पर तालिबान ने कब्जा किया था। भारत सरकार ने किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए अब ई-वीजा को अनिवार्य कर दिया है और बिना ई-वीजा के किसी भी शख्स को भारत में आने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इस घटनाक्रम से वाकिफ लोगों के मुताबिक, भारतीय वीजा के साथ अफगान पासपोर्ट की इस जब्ती को लेकर भारतीय आव्रजन एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है।

आतंकी कर सकते हैं गलत इस्तेमाल
भारतीय अधिकारियों को इस बात की गंभीर चिंता है, कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल भविष्य में आतंकवादियों के लिए फर्जी पासपोर्ट बनाने के लिए किया जा सकता है। हालांकि यह साफ नहीं है, कि काबुल में भारतीय वीजा आउटसोर्सिंग एजेंसी पर हुए इस हमले में कौन सा समूह शामिल हो सकता है, लेकिन संदेह की सुई पाकिस्तान की ओर इशारा करती है, क्योंकि घुसपैठिए उर्दू बोल रहे थे। काबुल के एक सूत्र ने कहा हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए कहा कि, "इस बात की काफी ज्यादा संभावना है, कि भारतीय वीजा वाले अफगान पासपोर्ट का इस्तेमाल, ट्रेवल दस्तावेज पर तस्वीर बदलकर आतंकवादियों के पासपोर्ट बनाने के लिए किया जा सकता है।" हालांकि, अभी तक रायसीना हिल और सुरक्षा एजेंसियां घटना को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।
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काबुल में बन रहे फर्जी दस्तावेज
काबुल पर लगातार नजर रखने वाली एजेसियों का कहना है कि, काबुल पर तालिबान के कब्जे के एक हफ्ते के बाद कई 'अज्ञात ग्रुप्स' अफगानिस्तान की राजधानी में एक्टिव हो गये हैं,जो लगातार ट्रैवल कंपनियों और उनके मालकों की तलाशी के लिए अभियान चला रहे हैं। इसके साथ ही ये ग्रुप्स अलग अलग ट्रैवल एजेंसियों के पास से दस्तावेज जब्त कर रहे हैं, जिनका इस्तेमाल फर्जी दस्तावेज बनाने के लिए किया जाएगा और आतंकियों के लिए किसी भी देश में एंट्री करना काफी आसान हो जाएगा।

सतर्क है भारतीय गृहमंत्रालय
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय गृह मंत्रालय पहले से ही इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए सतर्क था, लिहाजा विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा टीमों ने जब 16 अगस्त को अफगानिस्तान से लोगों को निकालने का काम शुरू किया, तो प्रत्येक यात्री का इतिहासा और यात्रा दस्तावेजों की जांच काफी सख्ती से की गई थी। काबुल में भारतीय मिशन अपनी तरफ से उन अफगानों के नाम खोजने के लिए अपने डेटा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन्हें भारत का वीजा दिया जा रहा है। वहीं, जिन एजेंसीज को वीजा ऑउटसोर्सिंग का काम दिया गया था, उनके डेटाबेस से भी जानकारियां हासिल की जा ही हैं। डेटा की तलाशी और नामों की पहचान होने के बाद ही किसी को भारत का वीजा दिया जा रहा है अवैध वीजा को फौरन रद्द किया जा रहा है।

79 हजार 500 लोग निकाले गये
भारत को फर्जी दस्तावेजों के जरिए संदिग्धों के भारत में आने की आशंका है तो यही आशंका डोनाल्ड ट्रंप को भी है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जो बाइडेन जिन हजारों लोगों को अमेरिका लेकर आए हैं, क्या उनकी पूरी तरह से जांच की गई है, या फिर तालिबानी आतंकियों को तो अमेरिका लेकर नहीं आया गया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि जी-7, ईयू, नाटो, यूएन तालिबान को लेकर हमारे रवैये को अपना समर्थन दे रहे हैं। हम तालिबान को उनके कृत्यों से वह कैसा है इसका निर्णय लेंगे। तालिबान किस तरह का आगे बर्ताव करता है उसपर हमारी नजर रहेगी। अमेरिका ने अभी तक अफगानिस्तान से 14 अगस्त के बाद से 70700 लोगों को बाहर निकाला है। वहीं, जुलाई के बाद से अमेरिका ने 75900 लोगों को अफगानिस्तान से बाहर निकाला है।












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