यूनिसेफ की एक हफ्ते में दूसरी बार चेतावनी, जल्द खाना पहुंचाओ नहीं तो मर जाएंगे 1 करोड़ अफगानी बच्चे

यूनिसेफ ने कहा है कि अफगानिस्तान में एक करोड़ बच्चों को मानवीय मदद की जरूरत है। यूनिसेफ की अफगान प्रतिनिधि ने कहा कि अफगान संकट के लिए बच्चे जिम्मेदार नहीं हैं, लेकिन सबसे बड़ी संकट में बच्चे ही हैं।

न्यूयॉर्क, अगस्त 31: तालिबान अब निर्विवाद रूप से अफगानिस्तान का मालिक बन चुका है, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि आखिर तालिबान अब देश को कैसे चलाएगा। अमेरिका पहले ही अफगानिस्तान के करीब 10 अरब डॉलर की संपत्ति को फ्रीज कर चुका है और इन सबके बीच यूनाइटेड नेशंस की एजेंसी और बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था यूनिसेफ ने पिछले 10 दिनों में लगातार दूसरी बार अलार्म जारी करते हुए कहा है कि अगर अफगानिस्तान को फौरन मानवीय सहायता उपलब्ध नहीं करवाई गई, तो एक करोड़ बच्चे मरने के कगार पर पहुंच सकते हैं।

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    यूनिसेफ की दोबारा चेतावनी

    यूनिसेफ की दोबारा चेतावनी

    यूनिसेफ ने कहा कि अफगानिस्तान में करीब एक करोड़ ऐसे बच्चे हो गये हैं, जिन्हें जल्द जे जल्द मानवीय मदद की जरूरत है, नहीं तो उनकी स्थिति काफी ज्यादा खराब हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ की अफगानिस्तान प्रतिनिधि हर्वे लुडोविक डी लिसो ने कहा है कि अफगानिस्तान में एक करोड़ बच्चे पचपन की तमाम सुविधाओं से तो वंचित हो ही चुके हैं, उनके पास जीने के लिए भी संसाधन नहीं हैं और अगर इन तक वैश्विक समुदाय जल्द से जल्द मदद नहीं पहुंचाता है, तो उनकी स्थिति दयनीय हो सकती है। यूनिसेफ की अफगानिस्तान प्रतिनिधि ने कहा कि 'अफगानिस्तान संकट के लिए जो सबसे कम जिम्मेदार हैं, वो इस संकट के लिए सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। जिनमें लगातार बच्चे मारे जा रहे हैं, घायल हो रहे हैं, उनके पास खाने के लिए संसाधन नहीं है और बुनियादी सुविधाएं उनतक नहीं पहुंच पा रही हैं।'

    हिंसा का शिकार होते बच्चे

    हिंसा का शिकार होते बच्चे

    यूनिसेफ की अफगानिस्तान प्रतिनिधि हर्वे लुडोविक डी लिसो ने कहा कि, 'आज भी हमने पाया है कि अफगानिस्तान में बच्चों को लेकर खिन्न करने वाली रिपोर्ट आई है, कई जगहों पर बच्चे लावारिश मिल रहे हैं, काफी बच्चे हिंसा का शिकार हो रहे हैं, बच्चों को अलग अलग संगठन अपने हथियारबंद गैंग में शामिल कर रहे हैं और सिर्फ इस साल अब तक 550 बच्चे हिंसा में मारे जा चुके हैं और 1400 बच्चे बुरी तरह से घायल हो चुके हैं।' यूनिसेफ की प्रतिनिधि ने कहा कि 'स्थिति ये है कि अलग अलग इलाकों में हिंसा और असुरक्षा की वजह से पानी सूख चुका है, दर्जनों इलाकों में पानी की सप्लाई बंद हो चुकी है और लोग पानी के लिए तड़प रहे हैं।' उन्होंने कहा कि 'अफगानिस्तान में कोरोना वैक्सीनेशन की प्रक्रिया बंद हो चुकी है, पोलियो वैक्सीनेशन बंद करवाया जा चुका है, काफी बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं, जो सूखकर उंगली जैसे दिखने लगे हैं, ऐसे बहुत बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है'।

    सोमवार को पहुंचा यूएन की मदद

    सोमवार को पहुंचा यूएन की मदद

    रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को यूनाइटेड नेशंस ने एक जहाज जीवनरक्षक दवाएं अफगानिस्तान में भेजा है। तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद पहली बार यूनाइटेड नेशंस ने जीवन रक्षक दवाओं को अफगानिस्तान भेजा है। वहीं, डब्ल्यूएचओ ने कहा कि जीवन रक्षक दवाओं को अफगानिस्तान में तो सुरक्षित तरीके से पहुंचा दिया गया है, लेकिन कामयाबी तब मिलेगी जब दवाओं को सुरक्षित तरीके से सभी मेडिकल सेंटर्स तक पहुंचा दिए जाएं और वो जरूरतमंदों तक पहुंच जाएं। रिपोर्ट के मुताबिक, मजार-ए-शरीफ में करीब 12.5 मिट्रिक टन जीवन रक्षक दवाएं यूनाइटेड नेशंस ने पहुंचाए हैं।

    बच्चों की स्थिति चिंताजनक

    बच्चों की स्थिति चिंताजनक

    यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 42 लाख बच्चे स्कूल से बाहर हो चुके हैं, जिनमें 22 लाख लड़कियां हैं। वहीं, यूनाइटेड नेशंस ने अपनी रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल जनवरी महीने से अफगानिस्तान में 2 हजार से ज्यादा बच्चों के साथ गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन हुए हैं और ये वो मामले हैं, जो रिकॉर्ड में आए है। वहीं यूनाइटेड नेशंस ने कहा है कि करीब 4 लाख 35 हजार बच्चों के विस्थापित होने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक फोर ने कहा, "यह अफगान बच्चों की भयावह स्थिति है और अफगानिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल की वजह से ऐसी स्थिति बनी हुई है''।

    स्थिति होगी और ज्यादा खराब

    स्थिति होगी और ज्यादा खराब

    यूनाइटेड नेशंस की एजेंसी यूनिसेफ ने कहा है कि आने वाले वक्त में अफगानिस्तान में बच्चों की स्थिति काफी ज्यादा दयनीय होने वाली है और बच्चों को काफी ज्यादा मानवीय सहायता की जरूरत पड़ेगी। क्योंकि, राजनीतिक परिवर्तन की वजह से बच्चों के सामने विनाशकारी परिणाम सामने आने वाले हैं, बच्चियों की स्थिति तो नर्क के समान होने वाली है और कोविड-19 महामारी का अलग विनाशकारी लहर चलेगा। फोर ने कहा कि ''पिछले 65 सालों से हम अफगानिस्तान में बच्चों और महिलाओं की जिंदगी बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हमें कामयाबी नहीं मिली है। हम आने वाले दिनों में भी जमीन पर मौजूद रहेंगे और बच्चों और महिलाओं के लिए हम काम करते रहेंगे।'' उन्होंने कहा कि ''हम देश के बच्चों के लिए गहराई से प्रतिबद्ध हैं और अभी और काम करना बाकी है।''

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