संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने दी महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि, दुनिया से की हिंसा से दूर रहने की अपील

गांधीजी को कभी नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला, लेकिन उन्हें 5 बार नामांकित किया गया। साल 1930 में 'टाइम पर्सन ऑफ द ईयर' की उपाधि से सम्मानित होने वाले महात्मा गांधी पहले और एकमात्र भारतीय रहे हैं।

न्यूयॉर्क, अक्टूबर 02: पूरी दुनिया आज महात्मा गांधी की 153वीं जयंती के मौके पर उन्हें और उनके जीवन सिद्धांतो को याद कर रहा है और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने रविवार को लोगों से महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांतों का पालन करते हुए किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहने का आह्वान किया है। पूरी दुनिया में महात्मा गांधी के जन्मदिन को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस वक्त जब दुनिया लगातार युद्धों में घिरी हुई है और परमाणु जंग होने तक की नौबत आ चुकी है, उस वक्त बापू के सिद्धांतों पर चलना और भी जरूरी हो जाता है।

बापू को यूएन प्रमुख ने किया याद

बापू को यूएन प्रमुख ने किया याद

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, "अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर हम महात्मा गांधी के जन्मदिन को उनके दिए गये शांति, अहिंसा और सम्मन के सिद्धांतो के साथ जश्न मना रहे हैं। हम इन मूल्यों को अपनाने और बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए संस्कृतियों और सीमाओं के पार काम करके आज की चुनौतियों को हरा सकते हैं।" मोहनदास करमचंद गांधी, जिन्हें गांधीजी के नाम से जाना जाता है, और भारत में जिन्हें प्यार से बापू कहा जाता है, वो भारत के एक महान नेता होने के साथ साथ वो अंतर्राष्ट्रीय शांति के सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर माने जाते हैं। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था। इस दिन को राष्ट्रपिता के मूल्यों, सिद्धांतों और दर्शन को याद कर उनका जन्मदिन हर साल बहुत खुशी के साथ मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस

अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस

जून 2007 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी और मोहनदास करमचंद गांधी भारत के सबसे महत्वपूर्ण स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अहिंसा आंदोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने कानून का अध्ययन किया था और पहली बार प्रैक्टिस करने के लिए दक्षिण अफ्रीका गये हुए थे। वहां उन्हें नस्लीय हिंसा का सामना करना पड़ा और उन्होंने नस्लीय भेदभाव के खिलाफ लड़ाई की शुरूआत दक्षिण अफ्रीका से ही शुरू की थी। भारत लौटने के बाद बापू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और जातिगत भेदभाव के लिए लड़ाई लड़ी। उन्होंने किसानों, मजदूरों और किसानों के लिए राष्ट्रव्यापी अभियानों का भी नेतृत्व किया। गांधी की मृत्यु के 21 साल बाद ग्रेट ब्रिटेन ने उन्हें सम्मानित करने के लिए एक डाक टिकट जारी किया था। गांधीजी को कभी नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला, लेकिन उन्हें 5 बार नामांकित किया गया। साल 1930 में 'टाइम पर्सन ऑफ द ईयर' की उपाधि से सम्मानित होने वाले महात्मा गांधी पहले और एकमात्र भारतीय रहे हैं। वहीं, दलाई लामा, नेल्सन मंडेला और जॉन लेनन जैसे कई विश्व नेता महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानते हैं।

पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

वहीं, महात्मा गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजघाट पहुंचे। राजघाट पहुंकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी को याद किया और उनकी समाधि पर पुष्प अर्पित किए। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी राजघाट पहुंचे ते और उन्होंने बापू को श्रद्धांजलि दी थी। वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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