यूक्रेन राष्ट्रपति भवन से आया अजीत डोवाल के पास फोन, युद्ध को लेकर मांगी भारत से बड़ी मदद
Ukraine India: यूक्रेनी राष्ट्रपति के कार्यालय के प्रमुख एंड्री यरमक ने भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवाल को फोन करके यूक्रेनी शांति सूत्र के लिए भारत का समर्थन मांगा है। यरमक ने कहा है, कि उन्होंने और डोवाल ने ग्लोबल पीस समिट की तैयारियों पर चर्चा की और भारतीय एनएसए अजीत डोवाल से ग्लोबल साउथ के देशों के साथ साथ ज्यादा से ज्यादा जितने देश संभव हो सकें, वो शांति शिखर सम्मेलन का समर्थन करें।
रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा, कि "हाल की घटनाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है, कि यूक्रेनी शांति सूत्र यूक्रेन और पूरी दुनिया, दोनों के लिए पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। हम शांति वार्ता पर कार्यान्वयन पर वैश्विक शिखर सम्मेलन तैयार करने के लिए सक्रिय रूप से भागीदारों के साथ काम कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि भारत इसमें हिस्सा लेगा।'

भारत से मदद की उम्मीद में यूक्रेन
यह चौथी बार है, जब यरमक ने इस साल एनएसए डोवाल से यूक्रेनी शांति योजना और यूक्रेन में युद्ध के बारे में बात की है। यरमक ने फरवरी में डोवाल को फोन कर यूक्रेनी शांति योजना के लिए भारत का समर्थन मांगा था। इस मामले पर जापान में G7 शिखर सम्मेलन के मौके पर भी चर्चा हुई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युद्ध की शुरुआत के बाद पहली बार यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात की थी।
इस दौरान, यरमक और डोवाल दोनों अपने अपने देशों के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। इससे पहले दोनों वार्ताकारों ने 25 जनवरी को बात की थी।
यरमक ने कहा, कि उन्होंने एनएसए डोवाल को फ्रंटलाइन पर मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी है और यूक्रेनी बुनियादी ढांचे और शहरों पर रूसी हमलों की बढ़ती संख्या पर के बारे में भी जानकारी दी है।
यरमक ने पिछले सप्ताह निप्रो नदी पर कखोव्का बांध को उड़ाए जाने का मुद्दा भी अजीत डोवाल के सामने उठाया और उनसे कथित कृत्य के लिए रूस की निंदा करने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों में शामिल होने का अनुरोध किया।
आपको बता दें, कि कखोव्का बांध टूटने के बाद यूक्रेन के एक बड़े हिस्से में बाढ़ आ गई है और लाखों लोगों को जान बचाने के लिए अपना घर छोड़ना पड़ा है। रूस और यूक्रेन ने बांध टूटने के पीछे एक दूसरे पर विस्फोट करने का आरोप लगाया है।
यरमक ने आरोप लगाया, कि कखोव्का पनबिजली संयंत्र को उड़ाकर रूस ने "जानबूझकर आतंकवादी कार्य और युद्ध अपराध" किया है। उन्होंने कहा, कि "यह इकोसाइड के सबसे बड़े आधुनिक अपराधों में से एक है। हमलावर एक अभूतपूर्व मानव निर्मित, पर्यावरण और मानवीय आपदा का कारण बना है, साथ ही साथ यूरोप में सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र, ज़ापोरिज़्ज़िया एनपीपी में परमाणु दुर्घटना का खतरा पैदा किया है।"
आपको बता दें, कि नोवा कखोवका बांध को साल 1956 में तैयार किया गया था, जिससे पनबिजली तैयार की जाती है। वहीं, यूक्रेन का कहना है, कि जब इस बांध को उड़ाया गया, उस वक्त इसमें 18 क्यूबिक किलोमीटर पानी भरा था, जो अब बाढ़ बनकर लोगों के लिए मुसीबत खड़ा कर रहा है।
नोवा कखोवका बांध, यूक्रेन की सबसे बड़ी निप्रो नदी पर बिजली उत्पादन के लिए बनाया गया था, जो खेरसॉन शहर से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
सबसे खतरनाक बात ये है, कि यूक्रेन के दक्षिण में Zaporizhzhia परमाणु ऊर्जा संयंत्र, जिस पर एक वर्ष से अधिक समय से रूसी सेना का कब्जा है, वो अपने न्यूक्लियर रिएक्टरों को ठंडा करने के लिए इसी बांध के पानी का इस्तेमाल करता है।












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