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युद्ध का असर: कंपनियों के देश छोड़ने से सिर्फ मॉस्को में 2 लाख लोगों की गई नौकरी, 4 मई को रूस डिफॉल्टर!

अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है, कि रूस डिफॉल्टर हो सकता है और मूडीज ने कहा है कि, रूस इस सदी के सबसे बड़े संकट में फंस गया है।

मॉस्को, अप्रैल 18: फरवरी महीने के 24 तारीख को पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने के आदेश दिए थे और यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए अब दो महीने पूरे होने वाले हैं, लेकिन रूस अभी तक ना ही राजधानी कीव पर ही कब्जा कर पाया है और नाही रूसी सैनिक पूर्वी यूक्रेन को ही अलग कर पाए हैं। मारियुपोल में भीषण तबाही मचाने के बाद भी ये शहर रूसी सैनिकों के कंट्रोल में नहीं आ पाया है, जबकि प्रतिबंधों ने अब असर दिखाना शुरू कर दिया है।

2 लाख लोगों की नौकरी जाएगी

2 लाख लोगों की नौकरी जाएगी

रूस के खिलाफ पश्चिमी देशों ने सख्ततम प्रतिबंध लगाए हुए हैं और विदेशी कंपनियां भी लगातार रूस से अपना कारोबार समेट रही हैं, जिसकी वजह से सिर्फ राजधानी मॉस्को में 2 लाख से ज्यादा लोगों की नौकरी जाने वाली है। मॉस्को के मेयर ने ही शहर में 2 लाख लोगों की नौकरी जाने की आशंका जताई है और मेयर की इस बाबत आशंका जताने के बाद डर ये है, कि रूस में बहुत बड़ा मानवीय संकट आ सकता है। रूस की राजधानी मॉस्को शहर के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि, ‘हमारे अनुमानों के मुताबिक, लगभग 200,000 लोगों को अपनी नौकरी गंवाने का खतरा है।‘

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    41 अरब डॉलर का कार्यक्रम

    41 अरब डॉलर का कार्यक्रम

    मॉस्को के मेयर सोबयानिन ने कहा कि, अधिकारियों ने पिछले हफ्ते रूसी राजधानी में रोजगार का समर्थन करने के लिए $ 41 मिलियन के कार्यक्रम को मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा कि, ‘सबसे पहले, कार्यक्रम का उद्देश्य विदेशी कंपनियों के कर्मचारियों के लिए है, जिन्होंने अस्थायी रूप से अपने संचालन को सस्पेंड कर दिया है या रूस छोड़ने का फैसला किया है और जिनकी वजह से लोग बेरोजगार होने वाले हैं।‘ आपको बता दें कि, 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद अभी तक सैकड़ों विदेशी कंपनियां रूस से बाहर चुकी हैं, जिसकी वजह से उन कंपनियों में काम करने वाले करीब 2 लाख लोग सिर्फ राजधानी मॉस्को में बेरोजगार हो गये हैं।

    क्या कर रही है रूसी सरकार?

    क्या कर रही है रूसी सरकार?

    राजधानी मॉस्को के मेयर सोबयानिन ने कहा कि, रूस सरकार ने 41 मिलियन डॉलर की जो योजना लेकर आई है, उससे करीब 58 हजार लोगों को मदद मिलेगी, जिन्होंने अपनी नौकरी खो दी है। उन्होंने कहा कि, करीब 12 हजार 500 लोगों को नये काम के लिए फिर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। सोबयानिन ने कहा कि, जिन लोगों ने अपनी नौकरी कंपनियों के देश छोड़ने की वजह से गंवा दी है, वो शहर के अलग अलग संगठनों, पार्कों और अन्य जगहों पर होने वाले सार्वजनिक कार्यों में शामिल हो सकते हैं। वहीं, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि, रूस के खिलाफ पश्चिमी देशों ने जो प्रतिबंध लगाए हैं, उसका सबसे खराब प्रभाव आना अभी बाती है। विश्लेषकों का अनुमान है कि, आने वाले दिनों में रूस खतरनाक गहरी मंदी में डूब जाएगा।

    डिफॉल्टर होने का खतरा मंडराया

    डिफॉल्टर होने का खतरा मंडराया

    अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है, कि रूस डिफॉल्टर हो सकता है। मूडीज ने आशंका जताते हुए कहा है कि, अगर रूस अपने डॉलर बॉन्ड्स को अपनी घरेलू करेंसी रूबल में चुकाता है, तो वो डिफॉल्ट होने की स्थिति में फंस सकता है। पश्चिमी देशों ने रूस के खिलाफ काफी सख्त प्रतिबंध लगाए हैं, जिसमें रूसी कारोबारियों के साथ रूस के तमाम बड़े बैंक्स शामिल हैं। मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, यूक्रेन पर आक्रमण करने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस को प्रतिबंधों में जकड़ दिया है और रूस को पश्चिमी देशों के वित्तीय प्रणाली से बाहर कर दिया है, लिहाजा इसके परिणाम रूस पर विनाशकारी हो सकते हैं।

    4 मई तक रूस के पास टाइम

    4 मई तक रूस के पास टाइम

    मूडीज ने अपने बयान में कहा है कि, अब रूस के पास 4 मई तक की आखिरी तारीख है और अगर रूस 4 मई तक अमेरिकी डॉलर में अपना भुगतान नहीं करता है, तो मूडीज की परिभाषा के अनुसार उसे डिफॉल्टर मान लिया जाएगा। मूडीज ने अपने बयान में कहा है कि, 'बांड अनुबंधों में डॉलर के अलावा किसी अन्य मुद्रा में पुनर्भुगतान का कोई प्रावधान नहीं है।' यानि, अगर रूस को डिफॉल्टर होने से बचना है, तो उसके पास सिर्फ 4 मई तक की तारीख है। मूडीज ने कहा कि, करार के मुताबिक, साल 2018 के बाद रूस को जरूर कुछ यूरोबॉन्ड्स के लिए अपनी लोकल करेंसी रूबल में कुछ शर्तों के साथ भुगतान करने की इजाजत है, लेकिन, 2018 से पहले के पहले के बॉन्ड में ये रूस को ये सुविधा हासिल नहीं है, जो 2022 और 2042 में मैच्योर होने वाले हैं।

    रूस पर सदी का सबसे बड़ा खतरा

    रूस पर सदी का सबसे बड़ा खतरा

    विशेषज्ञों का कहना है कि, रूस के ऊपर प्रतिबंधों की वजह से इस सदी का सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है और वो सदी का सबसे बड़ा डिफॉल्टर घोषित हो सकता है। इससे पहले साल 1918 में रूस के क्रांतिकारी नेता व्लादिमीर लेनिन ने जॉरिस्ट रेड को खारिज कर दिया था, जिसकी वजह से वैश्विक कर्ज बाजार भयानक तौर पर प्रभावित हुआ था और इसने रूसी अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया था, क्योंकि लगातार लड़ाईयों की वजह से रूस के ऊपर विशालकाय कर्ज जमा हो गया था।

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