यूक्रेन संकट पर भारत ने दिया दोस्त रूस का 'साथ' तो चीन ने कर दिया खेल, अलग-थलग हो पाएगा रूस?

संयुक्त राष्ट्र में जब यूक्रेन संकट पर चर्चा हो रही थी, तो अमेरिका को उम्मीद थी कि भारत रूस का विरोध करेगा, जो संयुक्त राष्ट्र में राष्ट्रपति पुतिन के लिए बहुत बड़ा झटका होगा।

कीव/मॉस्को/वॉशिंगटन/नई दिल्ली, फरवरी 22: पूर्वी यूक्रेन में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आदेश के बाद रूसी सेना दाखिल हो चुकी है और रूस ने पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क और लुहान्स्क क्षेत्र को स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया है, वहीं पूरी दुनिया विश्व युद्ध की आशंका से सहमी हुई है। लेकिन, सवाल ये है, कि दुनिया के शक्तिशाली देश क्या इस स्थिति मे हैं, कि वो रूस को रोक पाएं और शक्तिशाली देशों में कौन रूस के साथ है और कौन रूस के खिलाफ है, इसको लेकर भी खेमेबाजी चल रही है।

रूस पर प्रतिबंध लगाएगा यूरोपीय यूनियन

रूस पर प्रतिबंध लगाएगा यूरोपीय यूनियन

पूर्वी यूक्रेन में रूसी सैनिकों के घुसने और दो क्षेत्रों को स्वतंत्र घोषित करने के रूसी राष्ट्रपति के फैसले के बाद यूरोपीय यूनियन ने रूस पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है। यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री ने आज यूक्रेन के अलगाववादी क्षेत्रों की मान्यता और यूक्रेन क्षेत्र पर सैनिकों की तैनाती पर रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को अपनाने की घोषणा की है। यूरोपीय यूनियन के विदेश नीति के प्रमुख जोसेप बोरेल ने कहा कि, ''बेशक हमारी प्रतिक्रिया प्रतिबंधों के रूप में होगी, जिसकी सीमा मंत्री तय करेंगे... मुझे यकीन है कि यह एक सर्वसम्मति से लिया गया फैसला होगा"। यूरोपीयन यूनियन की तरफ से कहा गया है कि, रूस के खिलाफ किस तरह से प्रतिबंध लगाए जाएंगे, इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है।

अमेरिका ने की प्रतिबंधों की घोषणा

संयुक्त राज्य अमेरिका ने सोमवार को पूर्वी यूक्रेन में विद्रोही क्षेत्रों के खिलाफ वित्तीय प्रतिबंधों की घोषणा कर दी है, जिन्हें रूसी राष्ट्रपति ने एक भाषण के दौरान स्वतंत्र राज्यों के तौर पर मान्यता दी है। इसके साथ ही अमेरिका ने कहा है कि, अगर रूस अगला कदम उठाता है, तो फिर रूस के खिलाफ और भी प्रतिबंधों की घोषणा की जाएगी। व्हाइट हाइस की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा है कि, ''अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन के डोनेट्स्क और लुगांस्क क्षेत्रों में किसी भी अमेरिकी व्यक्ति या फिर कंपनी द्वारा निवेश पर, व्यापार पर और किसी भी तरह के वित्तपोषण पर प्रतिबंध लगाने की कार्यकारी आदेश पर दस्तखत करेंगे।'' अमेरिका ने कहा है कि, ''अमेरिका अब ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ भी प्रतिबंध लगाएगा, जो डोनेट्स्क और लुगांस्क क्षेत्र में व्यापारिक काम करेंगे।'' वहीं, अमेरिका ने साफ किया है कि, उसने जो प्रतिबंध लगाए हैं, वो पश्चिमी देशों के द्वारा लगाए गये प्रतिबंधों से अलग हैं।

दोस्त रूस के साथ ही है भारत

दोस्त रूस के साथ ही है भारत

संयुक्त राष्ट्र में जब यूक्रेन संकट पर चर्चा हो रही थी, तो अमेरिका को उम्मीद थी कि भारत रूस का विरोध करेगा, जो संयुक्त राष्ट्र में राष्ट्रपति पुतिन के लिए बहुत बड़ा झटका होगा, लेकिन भारत की तरफ से संयुक्त राष्ट्र में शांति स्थापना करने की बात जरूर की गई, लेकिन भारत ने रूसी कार्रवाई की आलोचना नहीं की और ना ही भारत की तरफ से रूस की निंदा की गई है। भारत ने दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और तनाव को लेकर चिंता जरूर जताई और दोनों ही देशों से शांति स्थापना करने का आह्वान किया है। यूक्रेन संकट के बीच भारत ने कहा कि, तनाव कम करना दुनिया की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन पश्चिमी देशों की तरह भारत ने रूस की किसी भी कार्रवाई का विरोध नहीं किया।

चीन ने कर दिया खेल

चीन ने कर दिया खेल

यूनाइटेड नेशंस में चीन के रूख पर सबकी नजर थी और संयुक्त राष्ट्र में चीन ने रूस का साथ देते हुए अमेरिका और पश्चिमी देशों को बड़ा झटका दिया है। इससे पहेल अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से यूक्रेन संकट पर बात की थी और उनसे यूक्रेन संकट पर मदद मांगी थी, लेकिन यूनाइटेड नेशंस की बैठक के दौरान चीन की तरफ से "सभी पक्षों" से संयम बरतने और यूक्रेन में "तनाव बढ़ाने" से बचने का आह्वान किया, लेकिन चीन ने रूस के उस फैसले की निंदा करने से इनकार कर दिया, जिसमें पुतिन ने पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क और लुहान्स्क को स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया है। यूक्रेन में संकट के तेज होने के साथ बीजिंग एक जटिल स्थिति की ओर बढ़ रहा है, राज्य की संप्रभुता की रक्षा करने की अपनी प्रचलित विदेश नीति के साथ मास्को के साथ संबंधों को गहरा करने का प्रयास कर रहा है।

रूस के खिलाफ ब्रिटेन

रूस के खिलाफ ब्रिटेन

चीन और भारत ने जहां रूस के खिलाफ बोलने से 'इनकार' कर दिया है, वहीं यूरोपीय देशों ने खुलकर रूस के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। ब्रिटेन शुरू से ही रूस के खिलाफ सबसे ज्यादा आक्रामक रहा है और ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि, दो अलगाववादी यूक्रेनी गणराज्यों को मान्यता देने का पुतिन का फैसला अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है और एक 'अपमानजनक' और 'अंधेरा फैलाने वाला संकेत' है कि चीजें गलत हो रही हैं। वहीं, यूनाइटेड किंगडम के विदेश सचिव लिज ट्रस ने रूसी राष्ट्रपति को दोषी ठहराने और उन्हें सजा देने की मांग तक कर डाली है। ब्रिटिश विदेश सचिव ने रूस के खिलाफ नये प्रतिबंधों को लगाए जाने की भी घोषणा कर दी है।

फ्रांस ने की प्रतिबंध लगाने की मांग

फ्रांस ने की प्रतिबंध लगाने की मांग

यूरोप के सबसे ज्यादा ताकतवर देशों में शुमार फ्रांस और जर्मनी ने पूर्वी यूक्रेन में रूसी सैनिकों के घुसने के बाद रूस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है और फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने यूरोपीय संघ से रूस पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूक्रेन के दो पूर्वी अलगाववादी क्षेत्रों को स्वतंत्र मानने के क्रेमलिन के कदम की सोमवार को निंदा की है और यूरोपीय संघ से मास्को के खिलाफ नए प्रतिबंधों पर सहमत होने का आग्रह किया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति भवन ने एक बयान में कहा कि, "राष्ट्रपति मैंक्रों इस फैसले की निंदा करते हैं... वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपात बैठक और यूरोपीय प्रतिबंधों को अपनाने की मांग कर रहे हैं।" फ्रांसीसी राष्ट्रपति की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि, ''रूस का फैसला स्पष्ट तौर पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का एकतरफा उल्लंघन है और यह यूक्रेन की संप्रभुता का भी उल्लंघन करता है''।

रूस से जर्मनी को काफी गुस्सा

रूस से जर्मनी को काफी गुस्सा

यूक्रेन में रूस के घुसपैठ को लेकर जर्मनी ने काफी सख्त प्रतिक्रिया दी है और जर्मनी ने कहा है कि, रूस ने अंतर्राष्ट्रीय वादों को तोड़ने का काम किया है। जर्मनी के विदेश मंत्री एनालेना बारबॉक ने कहा कि रूस पूर्वी यूक्रेन में विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्रों को स्वतंत्र के रूप में मान्यता देकर वैश्विक समुदाय के साथ किए गये अपने वादों को तोड़ चुका है और दुनिया के सामने रूस को जवाबदेह होना चाहिए। जर्मनी की तरफ से मिंस्क समझौता का जिक्र करते हुए रूस पर वैश्विक समुदाय से किए गये वादों को तोड़ने का आरोप लगाया है।

जापान कर रहा गंभीर कार्वाई पर विचार

जापान कर रहा गंभीर कार्वाई पर विचार

वहीं, यूक्रेन संकट को लेकर रूस के खिलाफ जापान भी खड़ा हो गया है और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने 'यूक्रेन की सुरक्षा और संप्रभुता के उल्लंघन' के लिए रूस की सख्त निंदा की है। जापानी प्रधानमंत्री ने कहा कि, जापान अंतर्राष्ट्रीय समुदायों के साथ मिलकर रूस के खिलाफ गंभीर कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है। इससे पहले जापान के विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी ने भी मंगलवार को कहा है कि, जी-7 समूल लोकतांत्रिक मूल्यों और विचारों का साझा करता है और दुनिया में कानून के शासन को लेकर जी-7 एकजुट है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का नेतृत्व करता है। हालांकि, क्या जापान रूस के खिलाफ प्रतिबंध भी लगाएगा, इसका जवाब जापानी विदेश मंत्री ने नहीं दिया।

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