चमत्कार! मां की कोख में ही डॉक्टरों ने किया 26 हफ्ते के दो बच्चों की सफल सर्जरी
नई दिल्ली। क्या आपने कभी सुना है कि किसी अजन्मे बच्चों की मां के गर्भ में ही सर्जरी की गई हो और उन बच्चों की ये सर्जरी पूरी तरह से सफल रही हो? ऐसा ही चौंकाने वाला मामला लंदन में सामने आया है, जहां डॉक्टरों ने चमत्कारिक तरीक से दो अजन्मे बच्चों की न केवल स्पाइनल सर्जरी की, बल्कि उनकी ये सर्जरी सफल भी रही। लंदन में अपनी तरह का ये पहला ऑपरेशन था। इस ऑपरेशन में लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज अस्पताल के 30 डॉक्टरों की टीम शामिल थी। डॉक्टरों के मुताबिक इस तरह की स्पाइनल सर्जरी आमतौर पर बच्चों के जन्म के बाद की जाती है, लेकिन ऐसा पहली बार है जब मां के गर्भ में ही बच्चों की सफल सर्जरी की गई।

26 हफ्ते के गर्भस्थ शिशु की सफल सर्जरी
बताया जा रहा है कि 26 हफ्ते के गर्भस्थ शिशु में स्पाइना बाइफिडा नाम की बीमारी का पता डॉक्टरों चल गया, जिसके बाद सर्जरी का फैसला लिया गया। ऐसे केस में बच्चों के जन्म के बाद सर्जरी की जाती है, लेकिन इस केस में डॉक्टरों ने मां के गर्भ में ही स्पाइना बाइफिडा से पीड़ित दोनों बच्चों की सर्जरी की। करीब 90 मिनट की सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने गर्भ को खोलने का प्रयास किया और फिर बच्चों की रीढ़ की हड्डी में नजर आ रहे अंतर को एक साथ जोड़ दिया।

स्पाइना बाइफिडा नाम की बीमारी से थे पीड़ित
आम तौर पर ये प्रक्रिया काफी जोखिम भरी होती है और प्रीमैच्योर लेबर का कारण बन सकती है, लेकिन शोधकर्ता इस संबंध में कम आक्रामक कीहोल प्रक्रिया की खोज कर रहे हैं। लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज अस्पताल के प्रोफेसर ऐनी डेविड ने बताया कि हमने बच्चों की मां को कुछ दवाएं दी हैं, जिससे उन्हें आराम मिले, लेकिन अभी भी जोखिम बना हुआ है। वहीं डॉक्टरों ने बताया कि मां और बच्चे अच्छे से रिकवर कर रहे हैं।

पहली बार मां के गर्भ में बच्चों की हुई सर्जरी
प्रोफेसर ऐनी डेविड ने बताया कि ये शानदार है। अब महिलाओं को ब्रिटेन से बाहर यात्रा करने की जरूरत नहीं है। वे अपने परिवार को अपने साथ रख सकते हैं। बेहद कम खर्च में यहीं उन्हें सभी सुविधाएं मिल सकती हैं। इससे पहले इस तरह के केस में इलाज के लिए मांओं को अमेरिका, बेल्जियम या फिर स्विट्जरलैंड जाना पड़ता था। हालांकि अब ऐसा नहीं होगा उन्हें यहीं इलाज मिल जाएगा।

क्या है स्पाइना बाइफिडा?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्पाइना बाइफिडा ऐसी स्थिति है जब गर्भावस्था के दौरान बच्चे की रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) ठीक से विकसित नहीं हो पाती। रीढ़ की हड्डी में एक दरार बन जाती है। इसका असर ये होता है कि जन्म के बाद पीड़ित बच्चे को चलने-फिरने और सीधे खड़े होने तक में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं इस बीमारी की वजह से बच्चा दिमागी रूप से भी कमजोर हो सकता है। अनुमान के मुताबिक हर साल करीब 200 बच्चे स्पाइना बाइफिडा के साथ जन्म लेते हैं। हालांकि इनमें ज्यादातर मामलों में बच्चे के जन्म के बाद सर्जरी होती है।
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