कुरान जलाए जाने के बाद बौखलाया तुर्की, स्वीडन के NATO में शामिल होने का नहीं करेगा समर्थन

स्वीडन और फिनलैंड में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद नाटो गठबंधन में शामिल होने का ऐलान किया था, लेकिन नाटो में शामिल होने के लिए उसके सभी 30 सदस्य देशों का समर्थन आवश्यक है।

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Turket Sweden NATO: स्वीडन में मुस्लिमों के पवित्र धार्मिक ग्रंथ कुरान जलाए जाने के खिलाफ मुस्लिम देशों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है और तुर्की कुछ ज्यादा ही आग उगल रहा है। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तईप अर्दोआन ने स्वीडन को चेतावनी दी है, कि उसके नाटो में शामिल होने का तुर्की समर्थन नहीं करेगा। तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा, कि स्टॉकहोम में अंकारा के दूतावास के बाहर कुरान जलाने के बाद नाटो में शामिल होने के लिए स्वीडन को उनके समर्थन की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

कुरान जलाए जाने से गुस्से में तुर्की

कुरान जलाए जाने से गुस्से में तुर्की

आपको बता दें, कि स्वीडन में कुछ दक्षिणपंथी नेताओं ने तुर्की दूतावास के बाहर पवित्र किताब को जलाकर तुर्की के खिलाफ प्रदर्शन किया था, जिसको लेकर पूरी दुनिया से कुरान जलाने वाले नेताओं की निंदा की गई। वहीं, तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा है, कि "जो लोग हमारे दूतावास (स्टॉकहोम में) के सामने इस तरह की ईशनिंदा की अनुमति देते हैं, वे अब अपनी नाटो सदस्यता के लिए हमारे समर्थन की उम्मीद नहीं कर सकते हैं।" आपको बता दें कि, स्टॉकहोम में हुई इस घटना को लेकर तुर्की के राष्ट्रपति की ये पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया है, जबकि स्टॉकहोम में किए गये प्रदर्शन की इजाजत स्वीडन की पुलिस ने दी थी।

नाटो में आना चाहता है स्वीडन

नाटो में आना चाहता है स्वीडन

आपको बता दें, कि स्वीडन और फिनलैंड ने नाटो की सदस्यता लेने के लिए आवेदन किया हुआ है और नाटो गठबंधन के 30 देशों में सिर्फ तुर्की और हंगरी ही दो देश हैं, जो नार्डिक देशों के नाटो में शामिल होने का विरोध कर रहे थे। हालांकि, पहले तुर्की ने कई देशों के मान मनौव्वल के बाद स्वीडन और फिनलैंड के नाटो में शामिल होने को लेकर लचीला रूख अपनाया था, लेकिन कुरान जलाने के बाद तुर्की ने अपने रूख को फिर से बदल लिया है। हालांकि, हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन ने वादा किया है, कि उनकी संसद अगले महीने स्वीडन और फिनलैंड के नाटो में शामिल होने का समर्थन करेंगे।

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    अर्दोआन क्यों हैं आग बबूला?

    अर्दोआन क्यों हैं आग बबूला?

    आपको बता दें, कि तुर्की में इसी साल मई महीने में लोकसभा के चुनाव होने हैं और तुर्की के राष्ट्रपति कट्टरवादी राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान तुर्की में ध्रुवीकरण की राजनीति की है और तुर्की धर्म निरपेक्ष राजनीति को काफी नुकसान पहुंचाया है। वहीं, स्वीडन में कुरान के अपमान को तुर्की के राष्ट्रपति एक बड़े मौके के तौर पर भुनाना चाहते हैं, इसीलिए उन्होंने इस मामले को अपने चुनाव से जोड़ दिया है। उन्होंने कहा है, कि "यदि आप तुर्की गणराज्य या मुसलमानों के धार्मिक विश्वासों के प्रति सम्मान नहीं दिखाते हैं, तो आपको हमसे नाटो (सदस्यता) के लिए कोई समर्थन नहीं मिलेगा।" उन्होंने कुरान को जलाने को 85 मिलियन तुर्की नागरिकों पर हमला बताया है।

    अर्दोआन की प्रतिक्रिया पर स्वीडन का बयान

    अर्दोआन की प्रतिक्रिया पर स्वीडन का बयान

    स्वीडन ने अर्दोआन की टिप्पणी पर अत्यधिक सावधानी के साथ प्रतिक्रिया व्यक्त की है। तुर्की के विदेश मंत्री टोबियास बिलस्ट्रॉम ने स्वीडन की टीटी न्यूज एजेंसी को बताया, कि "मैं आज रात बयान पर टिप्पणी नहीं कर सकता। सबसे पहले, मैं ठीक-ठीक समझना चाहता हूं कि क्या कहा गया है।" आपको बता दें, कि कुरान जलाने का काम डेनमार्क के दक्षिणपंथी राजनीतिक पार्टी के नेता रैसमस पलुदान ने किया था। पालुदन, जिनके पास स्वीडिश नागरिकता भी है, उन्होंने अतीत में कई प्रदर्शन किए हैं जहाँ उन्होंने कुरान को जलाया है। सऊदी अरब, जॉर्डन और कुवैत सहित कई अरब देशों ने इस घटना की निंदा की है। स्वीडिश नेताओं ने रैसमस पलुदान के काम की पूरी तरह से निंदा की है, लेकिन स्वीडन ने इसके साथ ही अपने देश की फ्री स्पीच का बचाव भी किया है। स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने शनिवार को ट्वीट करते हुए कहा, कि "मैं उन सभी मुसलमानों के लिए अपनी सहानुभूति व्यक्त करना चाहता हूं, जो स्टॉकहोम में जो कुछ हुआ, उससे आहत हैं।"

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