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काबुल पर हमला कर पाकिस्तान ने खुद कर ली अपनी फील्डिंग सेट, इन इलाकों को मलबे में बदल सकता है तालिबान

पाकिस्तान की सेना, जो खुद को हमेशा कुशल रणनीतिकार के तौर पर पेश करती है, इन दिनों कई मुश्किलों से घिरी हुई है। स्वघोषित फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के सामने न केवल भारत और अफगानिस्तान से दोहरी चुनौती है, बल्कि बलूचिस्तान और खैबर-पख्तूनख्वा जैसे आंतरिक मोर्चों पर भी विद्रोह की स्थिति है। यह 'चौतरफा चुनौती' पाकिस्तानी सेना को गहरे संकट में धकेल रही है, जिसे कई विश्लेषक उसकी पुरानी चालबाजियों का ही नतीजा मान रहे हैं।

दोहरे खेल की रणनीति उलटी पड़ी

पाकिस्तान को अब अपनी दशकों पुरानी 'दोहरे खेल' की रणनीति का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। 9 अक्टूबर की रात, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल और अन्य शहरों में हवाई हमले किए। ये हमले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किए गए थे। पाकिस्तान का दावा है कि TTP अफगानिस्तान की सुरक्षित पनाहगाहों से उसके खिलाफ हमले करता है। इन हमलों का मुख्य लक्ष्य TTP सरगना मुफ्ती नूर वली मेहसूद था। जो कि इस हमले में भी बच गया। जिसके बाद अब पाकिस्तान की फील्डिंग सेट मानी जा रही है।

Pakistan

तालिबान की पाकिस्तान में कितनी गहरी हैं जड़ें?

यूं तो ये बात किसी से छुपी नहीं है कि तालिबान की पाकिस्तान में तालिबान का दखल सालों पुराना है। यहां तक कि पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टों ने जब तालिबान के खिलाफ भाषण दिए तो तालिबान ने उन्हें तक नहीं बख्शा। पाकिस्तान के हर बड़े शहर में तालिबान के फिदायीन का बड़ा गुट एक्टिव बना रहता है। जो किसी भी इलाके में किसी भी वक्त धमाका करने में सक्षम है। एक पक्ष ये भी है कि तालिबानी लड़ाकों के पास बड़े और दूर रेंज के हथियार नहीं हैं, बावजूद इसके वे आए दिन पाकिस्तान की सैनिक चौकियों को तबाह करने में कामयाब रहते हैं।

जिस तरह का तालिबान का पैटर्न रहा है उसमें तालिबान 24-48 घंटे में रिएक्ट कर देता है। इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार भी तालिबान जल्द ही पाकिस्तान पर बड़ा हमला कर सकता है या करवा सकता है।

तालिबान के पाकिस्तान में बड़े हमले

- 2011 Charsadda बम विस्फोट - खैबर-पख्तूनख्वा में दोहरी आत्मघाती बम धमाके में लगभग 98 लोग मारे गए थे।
- 2012 Bacha Khan International Airport हमला - पेशावर में हवाई अड्डे और पाकिस्तान वायु सेना के बेस पर तत्तेरिक-ए-तालिबान ने हमला किया। लगभग 15 लोगों की मौत हुई।
- 2014 Jinnah International Airport हमला - कराची में TTP (और सुरक्षित कहा गया कि IMU सहित) ने हमला किया था। 36 लोग मारे गए थे।
- 2015 Camp Badaber हमला - खैबर-पख्तूनख्वा में PAF (पाकिस्तान एयर फोर्स) कैंप पर हमला हुआ, जिसमें सुरक्षा बलों को भारी नुकसान हुआ।
- 2024-2025 में लगातार हमले - TTP के हमले लगातार बढ़े हैं, जैसे कि सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमले, आत्मघातियों द्वारा हमले, बम विस्फोट आदि।

TTP का आतंक और मेहसूद की भूमिका

मुफ्ती नूर वली मेहसूद ने 2018 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए मौलाना फजलुल्लाह के बाद TTP को एकजुट किया था। 2025 में, TTP ने 900 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है। हाल ही में 7 अक्टूबर को ओरकजई जिले में TTP के हमले में 17 सैनिक मारे गए, जिनमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर भी शामिल थे। यह हमला काबुल पर पाकिस्तानी सेना के इतिहास के पहले प्रत्यक्ष हवाई हमलों से जुड़ा रहा।

तालिबान की दिल्ली यात्रा के दौरान हमला

दिलचस्प बात यह है कि इन्हीं हमलों के दिन तालिबान के विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्तकी की दिल्ली यात्रा शुरू हुई, जो भारत और तालिबान के बीच अब तक की सबसे उच्च-स्तरीय बातचीत थी। पाकिस्तान ने यह हमला तालिबान पर दबाव बनाने के उद्देश्य से किया था, लेकिन माना जा रहा है कि यह कदम उलटा पड़ सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, तालिबान अब पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर सकता है। 2024 में पाकिस्तान ने छोटे ड्रोन हमले किए थे, लेकिन 2025 के ये बड़े पैमाने के हमले अफगान-पाक रिश्तों को गंभीर रूप से बिगाड़ सकते हैं।

तालिबान से 'रणनीतिक सहयोगी' की उम्मीद टूटी

पाकिस्तानी सेना की यह धारणा कि तालिबान उसका रणनीतिक सहयोगी बना रहेगा, अब गलत साबित हो रही है। तालिबान, जो कभी पाकिस्तान की मदद से सत्ता में आया था, अब उसी के खिलाफ खड़ा है। इसने पाकिस्तान के लिए नई रणनीतिक सिरदर्द पैदा कर दी है।

दो सीमाओं पर सैन्य दबाव

पाकिस्तान को भारत और अफगानिस्तान, दोनों सीमाओं पर अपनी सेना तैनात करनी पड़ रही है। भारत के साथ उसकी पुरानी दुश्मनी जगजाहिर है। मई 2025 के 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारत ने जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को तबाह कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तान ने अमेरिका से AIM-120C5 AMRAAM मिसाइलों की मांग की, जिन्हें F-16 लड़ाकू विमानों पर लगाया जाएगा। हालांकि, यह कदम केवल पुरानी सैन्य क्षमताओं को बनाए रखने का प्रयास है, न कि नई ताकत हासिल करने का। फिर भी, भारत के लिए सतर्क रहना आवश्यक है।

तालिबान ने अब पाकिस्तान को घेरा

अफगानिस्तान में TTP की बढ़ती गतिविधियों ने पाकिस्तान को उलझा दिया है। पाकिस्तान ने वर्षों तक तालिबान को पनाह दी, लेकिन अब तालिबान TTP को शरण दे रहा है। खोस्त और पक्तिका प्रांतों से TTP लगातार पाकिस्तान पर हमले कर रहा है। 2021 में अमेरिका की वापसी के बाद पाकिस्तान ने 3 लाख अफगान शरणार्थियों को निष्कासित किया। 2024 में पाकिस्तानी ड्रोन हमलों में 46 अफगान नागरिक मारे गए। इससे दोनों देशों के संबंध पूरी तरह टूट गए हैं। पाकिस्तान ने जिस तालिबान को पाल-पोसकर मजबूत किया, वही अब उसके खिलाफ खड़ा है।

अंदरूनी मोर्चों पर भी उथल-पुथल

बाहरी मोर्चों के अलावा, पाकिस्तान के भीतर भी दो बड़े विद्रोह सुलग रहे हैं। बलूचिस्तान में बलूच विद्रोही अलगाव की मांग कर रहे हैं और चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) पर लगातार हमले कर रहे हैं। वहीं, खैबर-पख्तूनख्वा में TTP और अन्य कट्टरपंथी समूह सक्रिय हैं। 2025 TTP के लिए सबसे खूनी साल साबित हुआ है-2009 के बाद पहली बार 1000 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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