जर्मनी को पुतिन से पंगा लेना पड़ा महंगा, रूस ने सप्लाई चेन काटी तो चौपट होने लगे उद्योग, मचा हड़कंप

जर्मनी में भारी औद्योगिक संकट आने वाला है। देश का औद्योगिक ढांचा ढहने के कगार पर है। रूसी प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में कटौती के कारण जर्मन के उद्योग-धंधे चौपट होने की स्थिति में आ गए हैं।

बर्लिन, 04 जुलाईः जर्मनी में भारी औद्योगिक संकट आने वाला है। देश का औद्योगिक ढांचा ढहने के कगार पर है। रूसी प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में कटौती के कारण जर्मन के उद्योग-धंधे चौपट होने की स्थिति में आ गए हैं। देश के शीर्ष संघ अधिकारी ने चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ के साथ सोमवार से शुरू होने वाली संकट वार्ता से पहले ये चेतावनी दी है।

बड़े पैमाने पर जा सकती है नौकरी

बड़े पैमाने पर जा सकती है नौकरी

जर्मन फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स के प्रमुख यास्मीन फाहिमी ने बिल्ड एम अखबार के साथ एक साक्षात्कार में कहा, "गैस की बाधाओं के कारण, पूरे उद्योग स्थायी रूप से ध्वस्त होने के कगार पर हैं। एल्यूमीनियम, कांच, रासायनिक उद्योग को इससे तगड़ा नुकसान हो सकता है। अगर इस रूप में उद्योग चौपट हुए तो जर्मनी में पूरी अर्थव्यवस्था और नौकरियों के लिए बड़े पैमाने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।"

कर्मचारियों में बढ़ रहा असंतोष

कर्मचारियों में बढ़ रहा असंतोष

जर्मन फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स, जर्मनी की सबसे बड़ी ट्रेड यूनियन है। जर्मन फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स ने ये चेतावनी चांसलर शोल्ज से अपनी बातचीत शुरू होने के एक दिन पहले रविवार को दी। देश में बढ़ी महंगाई और ईंधन के अभाव के कारण कर्मचारियों में बढ़ रहे असंतोष को लेकर ये बातचीत शुरू हो रही है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा ऊर्जा संकट

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा ऊर्जा संकट

रूस द्वारा गैस आपूर्ति रोके जाने के बाद से जर्मनी में ऊर्जा संकट रिकॉर्ड स्तर पर है। इसे देखते हुए जर्मन फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स ने मांग की है कि घरों में इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा की कीमत पर सीमा लगाई जाए। जर्मनी में कार्बन डायऑक्साइड उत्सर्जन पर भी शुल्क लगता है। जर्मन फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स ने कहा है कि इसका भारी बोझ भी परिवारों और कंपनियों को उठाना पड़ रहा है। फाहिमी ने अंदेशा जताया है कि अगर हालत काबू में नहीं आए, तो जर्मनी में अशांति फैल सकती है।

बन सकती है उथल-पुथल की स्थिति

बन सकती है उथल-पुथल की स्थिति

इसके पूर्व आर्थिक मामलों के मंत्री रॉबर्ट हेबेक ने कहा था कि सरकार बढ़ रही महंगाई से पैदा होने वाली समस्याओं को हल करने के लिए काम कर रही है। लेकिन उन्होंने इसका कोई ब्योरा नहीं दिया। हेबेक ने चेतावनी दी थी कि रूस से आने वाली गैस में कटौती के कारण देश में उथल-पुथल की स्थिति बन सकती है। उन्होंने उस स्थिति की तुलना लीमैन ब्रदर्स के फेल होने से की। 2008 में इसी अमेरिकी बैंक के फेल होने के साथ वैश्विक आर्थिक मंदी की शुरुआत हुई थी।

रूस ने गैस स्पलाई चेन में की कटौती

रूस ने गैस स्पलाई चेन में की कटौती

गौरतलब है कि रूस नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन से होने वाली गैस की सप्लाई में 60 फीसदी की कटौती कर चुका है। रूस ने कहा है कि वह नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन से जुलाई के अंत तक पूरी तरह से सप्लाई रोक देगा। इस खबर से जर्मनी में अफरातफरी मच गयी है। रूस के इस एलान के बाद गैस और महंगी हो चुकी है।

चरमरा सकती है यूरोप की अर्थव्यवस्था

चरमरा सकती है यूरोप की अर्थव्यवस्था

जर्मनी यूरोपियन यूनियन के अंदर सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। अगर जर्मनी की अर्थव्यवस्था ढहती है तो इससे यूरोप ही नहीं पूरी दुनिया में आर्थिक तबाही मच जाएगी। बीते शुक्रवार को एसएंडपी ग्लोबल ने अपना परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स जारी किया था। जर्मन कंपनियों को मिलने वाले ऑर्डर का सूचकांक गिर कर 43.3 पर आ गया, जबकि मई में यह 47 अंक पर था। इस इंडेक्स में 50 से कम अंक का मतलब यह समझा जाता है कि संबंधित उद्योग की वृद्धि दर नकारात्मक हो गई है।

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