तालिबान से छात्राओं की जान बचाने की कोशिश, गर्लस्कूल की प्रिंसिपल ने उठाया बहादुरी वाला कदम

तालिबान के पिछले शासनकाल में महिलाओं की जिंदगी नर्क थी और इस बार भी कुछ ऐसा ही होने की उम्मीद है।

काबुल, अगस्त 22: अफगानिस्तान के अकेले लड़कियों के बोर्डिंग स्कूल की सह-संस्थापक ने अपने छात्रों के सभी दस्तावेजों में आग लगा दी है। लड़कियों के सभी रिकॉर्ड जलाने के पीछे की वजह उन छात्राओं की जान बचाना है। तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाज लड़कियों का स्कूल जाना बंद हो गया है और रिपोर्ट है कि तालिबान के आतंकी उन परिवारों को खोजने में लगे हैं, जिनके घर की बेटियां पढ़ने के लिए स्कूल जाती थीं।

बच्चियों के रिकॉर्ड जलाए

बच्चियों के रिकॉर्ड जलाए

अफगानिस्तान में स्थिति लड़कियों के लिए एकमात्र आवासीय स्कूल की सह-संस्थापक ने एक के बाद एक ट्वीट करते हुए तालिबान की असलियत को दुनिया के सामने जाहिर कर दिया। उन्होंने स्कूली छात्राओं के सभी रिकॉर्ड को जलाने का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जिसमें देखा जा सकता है कि वो बच्चियों के रिकॉर्ड को आग में चला रही हैं। स्कूल की सह-संस्थापक का नाम शबाना बासिज-रसिख है, जो स्कूल ऑप लीडरशिप अफगानिस्ता की प्रिंसिपल भी हैं, उन्होंने कहा है कि बच्चियों के रिकॉर्ड का नामोनिशान मिटाने के पीछे का उद्येश्य उनरी सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

प्रिसिंपल का डराने वाला दावा

एक व्यक्तिगत अनुभव को याद करते हुए स्कूल की प्रिंसिपल ने कहा कि, मार्च 2002 में तालिबान के पतन के बाद हजारों अफगान लड़कियों को प्लेसमेंट परीक्षा में भाग लेने के लिए नजदीकी पब्लिक स्कूल में जाने के लिए आमंत्रित किया गया था "क्योंकि तालिबान ने सभी महिला छात्रों के रिकॉर्ड को पूरी तरह से जला दिया था, ताकि लड़की छात्रों के अस्तित्व को ही मिटा दिया जाए, मैं उन लड़कियों में से एक थी।" उन्होंने आगे कहा कि, अफगान लड़कियों की शिक्षा में निवेश करने की उनकी इच्छा उसके बाद से ही जन्म लिया। उन्होंने उन लड़कियों को शिक्षा देने का संकल्प लिया, जो गरीब हैं और जिनके पास अफगानिस्तान से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि तालिबान के आतंक को दरकिनार कर वो बच्चियों को पढ़ाती रहीं।

महिलाओं की जिंदगी थी जहन्नुम

महिलाओं की जिंदगी थी जहन्नुम

गर्ल्स स्कूल की प्रिंसिपल ने कहा कि तालिबान के पिछले शासनकाल में महिलाओं की स्थिति नर्क से भी बदतर थी। उन्होंने कहा कि ''मेरे छात्र, मैं और हमारे बोर्डिंग स्कूल को चलाने में मदद करने वाले हमारे गांव के सभी लोग अभी तक सुरक्षित हैं और अब समय आ गया है जब मैं उनके अहसान के लिए उनका आभार जताऊं। अभी भी कई ऐसे लोग हैं, जो असुरक्षित हैं और मैं उनके लिए काफी परेशान हूं, क्योंकि वो तबाह हो गये हैं। महिला प्रिंसिपल ने कहा कि ''मैंने रिकॉर्ड जलाने की बात इसलिए सार्वजनिक की है क्योंकि ये उन सभी परिवार के लोगों को आश्वासन है, जिनके बेटियां हमारे यहां पढ़ती थीं कि आप आश्वस्त हो जाएं, आपके बच्चे का एक भी निशान इस हॉस्टल में नहीं बचा है। मैंने अपने छात्रों की भलाई के लिए यह सब किया है।

तालिबान का झूठा वादा

तालिबान का झूठा वादा

इस्लामिक आतंकवादी संगठन तालिबान ने 1990 के दशक के अपने क्रूर शासन से अलग तरह का शासन इस बार चलाने का वादा किया है। पिछली बार अफगानिस्तान की महिलाओं को उनके घरों तक सीमित कर दिया गया था और उनके पास मनोरंजन के एक भी साधन मौजूद नहीं थे। नियम तोड़ने पर बाजार में महिलाओं को कोड़े से पिटाई की जाती थी, पत्थरों से मारा जाता था और इस बार भी सभी सरकारी संस्थानों में महिलाओं के काम करने पर पाबंदी लगा दी गई है।

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