टिक टॉक: कैसे अमरीका और चीन के विवाद में फंस गया ये मोबाइल ऐप

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युवाओं के बीच टिकटॉक काफ़ी प्रचलित है. इसकी वजहें भी हैं. आप वीडियो बनाकर डाल दो, अगर लोगों को आपका वीडियो पसंद आ गया तो वो रातों-रात वायरल हो जाता है और वीडियो बनाने वाला सेलीब्रिटी.

लेकिन देशों के बीच चल रहे विवाद का ख़ामियाज़ा टिकटॉक और इस जैसी कई चीनी कंपनियों को उठाना पड़ रहा है.

भारत तो पहले ही अपने यहाँ टिकटॉक पर प्रतिबंध लगा चुका है लेकिन अब अमरीका और चीन के बीच के विवादों और उलझे रिश्तों का असर भी कंपनी पर पड़ता दिख रहा है.

अमरीका और ऑस्ट्रेलिया अपने-अपने यहाँ इस ऐप को बैन करने पर विचार कर रहे हैं.

टिक टॉक है क्या?

टिकटॉक एक फ़्री डाउनलोड ऐप है. इस पर लोग अपने शॉर्ट वीडियो पोस्ट करते हैं. इस ऐप पर लोग एक मिनट तक के वीडियो पोस्ट कर सकते हैं.

वीडियो अपलोड करने वाले शख़्स को इस ऐप पर एक बड़ा डेटाबेस और गानों समेत कई तरह के फ़िल्टर भी मिलते हैं.

कॉमेडी क्लिप, फ़िल्मों के डायलॉग भी यहाँ मौजूद होते हैं जिनपर लिप्सिंग करके लोग वीडियो बनाना पसंद करते हैं.

एक बार अगर किसी यूज़र के एक हज़ार से अधिक फ़ॉलोअर्स हो जाएं तो उन्हें लाइव ब्रॉडकास्ट करने की सुविधा भी मिल सकती है.

वे अपने फ़ैंस के लिए लाइव कर सकते हैं. इस ऐप पर फ़ॉलोअर्स की संख्या के आधार पर डिजीटल गिफ़्ट का भी विकल्प मौजूद है जिसे रुपयों से बदला जा सकता है.

इस ऐप पर जिन्हें आप फ़ॉलो करते हैं उन लोगों के वीडियो तो देख ही सकते हैं, साथ ही वो वीडियो भी डिस्प्ले होते हैं जिनसे जुड़ा कंटेंट आपने पहले देखा हो.

यूज़र्स एक-दूसरे को प्राइवेट मैसेज भी इस ऐप के ज़रिए भेज सकते हैं.

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कितना बड़ा है ये ऐप

साल 2019 से ही ये ऐप डाउनलोड चार्ट में हमेशा से ऊपर नज़र आया.

कोरोना वायरस महामारी ने भी इसके यूज़र्स की संख्या को बढ़ाया ही है. घरों में क़ैद लोगों के इंटरनेट के घंटे बढ़े और उसी के साथ टिकटॉक ऐप के डाउनलोड्स भी.

टिकटॉक और उसकी सिस्टर ऐप डॉयिन के क़रीब दो बिलियन डाउनलोड्स हैं और क़रीब 800 मिलियन एक्टिव यूज़र हैं. डॉयिन चीन में उपलब्ध ऐप है.

टिकटॉक को सबसे ज़्यादा डाउनलोड करने वाला देश भारत है.

इसके बाद चीन, तीसरे स्थान पर अमरीका, चौथे पर इंडोनेशिया और पाँचवे नंबर पर ब्राज़ील है. एक अनुमान के मुताबिक़ भारत में टिकटॉक ऐप के 12 करोड़ यूजर्स हैं.

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चीन के साथ क्या है टिकटॉक का संबंध?

दरअसल, टिकटॉक तीन अलग-अलग ऐप्स के साथ बाज़ार में आया. सबसे पहला ऐप एक अमरीकी ऐप था, नाम था 'म्यूज़िकली' जो साल 2014 में लॉन्च हुआ था.

इसके बाद साल 2016 में चीन की टेक महारथी कंपनी बाइटडांस ने ठीक वैसी ही सर्विस चीन में लॉन्च की. इसे नाम दिया गया- 'डॉयिन'.

बाइटडांस दुनिया भर में फैलना शुरू हुआ लेकिन एक अलग नाम से, यानी टिकटॉक.

साल 2018 में बाइटडांस ने म्यूज़िकली को ख़रीद लिया और उसे अपने टिकटॉक ऑपरेशन का हिस्सा बना लिया.

बाइटडांस ने धीरे-धीरे चीनी अधिकार से अपने ऐप को दूर करने की कोशिश की.

इसके बाद उन्होंने डिज़्नी के पूर्व एक्ज़क्यूटिव रहे केविन मेयर को टिकटॉक का चीफ़ एक्ज़ीक्यूटिव नियुक्त कर दिया.

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टिकटॉक के पास कितना डेटा उपलब्ध है?

टिकटॉक के पास डेटा का एक ख़ज़ाना है जिसमें...

  • कौन से वीडियो देखे जा रहे हैं और लोग किन पर टिप्पणी कर रहे हैं
  • लोकेशन का डेटा
  • फ़ोन मॉडल और कौनसा ऑपरेटिंग सिस्टम है
  • और जब लोग टाइप करते हैं तो वो किस तरह का रिदम पसंद करते हैं

डेटा के नाम पर ही टिकटॉक को कई बार विवादों का भी सामना करना पड़ा है.

बीते साल ही वीडियो शेयरिंग ऐप टिकटॉक पर अमरीकी यूज़र्स का डेटा चुराने और उसे चीन में ट्रांसफ़र करने के आरोप लगे थे.

कैलिफ़ोर्निया की अदालत में दायर एक मुक़दमें में आरोप लगाया गया था कि कंपनी बिना यूज़र्स की सहमति के उनका डेटा 'चुपके' से इकट्ठा कर रही है और उसे चीन भेजा जा रहा है.

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क्या वाकई चीन टिकटॉक की मदद से जासूसी कर रहा है?

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने आरोप लगाते हुए कहा था कि 'टिकटॉक का इस्तेमाल करने वालों को अपने डेटा को लेकर चिंता करने की ज़रूरत है क्योंकि उनसे जुड़ी जानकारी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी तक पहुँच रही है.'

हालांकि टिकटॉक शुरू से इस तरह के दावों का विरोध करता रहा है और उसका कहना है कि 'जो भी डेटा जमा होता है उसे चीन के बाहर स्टोर किया जाता है.'

इससे पहले वीडियो शेयरिंग ऐप टिकटॉक ने स्पष्ट किया था कि 'चीनी सरकार द्वारा उन्हें नियंत्रित नहीं किया जाता.'

टिकटॉक पर ये भी आरोप लगे थे कि 'यह ऐप चीनी सरकार द्वारा नियंत्रित है.'

यूरोप, मध्य-पूर्व और अफ़्रीका में टिकटॉक के लिए पब्लिक पॉलिसी बनाने के ज़िम्मेदार सर्वोच्च अधिकारी थियो बर्ट्राम ने कहा कि 'वो चीन द्वारा उनके डेटा को सौंपने की किसी भी गुज़ारिश को मना कर देंगे.'

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "यह राय कि हम किसी भी तरह से चीन सरकार की उंगलियों के नीचे काम करते हैं, पूरी तरह से ग़लत से ग़लत है."

यह सब देखते हुए टिकटॉक की पेरेंट कंपनी बाइटडांस, जो बीजिंग में स्थित है और केमैन द्वीप पर अधिवासित है, उसने यूके सरकार से लंदन में अपना मुख्यालय बनाने के बारे में बात की है.

टिकटॉक के वरिष्ठ अधिकारी थियो बर्ट्राम ने बीबीसी से बातचीत में ये तो नहीं बताया कि उन्होंने यूके में अपना अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय कहाँ बनाने का निर्णय लिया है, लेकिन उन्होंने कहा, "हम ब्रिटेन में अपने प्रॉडक्ट्स को और अधिक बढ़ाने के बारे में गंभीर और प्रतिबद्ध हैं."

उन्होंने कहा कि 'अगर टिकटॉक को चीन सरकार द्वारा डेटा लेने के लिए संपर्क किया गया होता, तो उनकी कंपनी निश्चित रूप से इसके लिए मना कर देती.'

हालांकि, यूके और चीन के बीच हाल में चीनी कंपनी ख़्वावे के 5जी उपकरण हटाये जाने के आदेश पर तनाव सामने आया है. इस वजह से ऐसी आशंकाएं भी हैं कि दोनों के बीच आर्थिक युद्ध की स्थिति बन सकती है.

यूके में चीन के राजदूत लियू शियामिंग ने रविवार को एक शो में कहा था, "हम अभी भी परिणामों का मूल्यांकन कर रहे हैं. यूके सरकार का यह बहुत बुरा निर्णय है."

टिकटॉक यूरोप में लगभग एक हज़ार लोगों को रोज़गार देता है जिनमें से अधिकांश कर्मचारी यूके और आयरलैंड में स्थित हैं.

क्या कोई और भी ख़तरा है

चिंता की दूसरी वजह है - सेंसरशिप. दुनिया में चीन एक ऐसा देश है जहाँ सेंसरशिप और इंटरनेट को लेकर सबसे अधिक प्रतिबंध हैं.

'द गार्जियन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, बीते साल टिकटॉक के कर्मचारियों और ऑटोमेटेड सिस्टम्स पर मॉडरेशन नियमों को लागू किया गया था जो राजनीतिक रूप से संवेदनशील सामग्री को सेंसर कर देता था.

तियानमेन स्क्वायर पर हुआ प्रदर्शन और तिब्बत की आज़ादी की माँग कुछ ऐसी ही सामग्री थी जिसपर प्रतिबंध की बात कही गई थी.

इसके अलावा 'द वॉशिंगटन पोस्ट' पर छपी एक ख़बर के मुताबिक़, टिकटॉक के छह पूर्व कर्मचारियों ने बताया था कि 'चीन में मॉडरेटर्स ही सामग्री को लेकर अंतिम निर्णय देते हैं.'

हालांकि बाइटडांस का कहना है कि दिशानिर्देश चरणबद्ध तरीक़े से लागू होते हैं, लेकिन कई लोगों का आरोप है कि 'इसका मॉडरेशन कल्चर चीन को लेकर झुका हुआ' है.

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