अरब दुनिया का यह है पहला समलैंगिक रेडियो स्टेशन

ट्यूनीशिया में समलैंगिकता अवैध और पूरी तरह से अस्वीकार्य है, लेकिन 2011 से हालात बदल रहे हैं.

अब समलैंगिकता के पक्ष में ट्यूनीशिया में भी आवाज़ उठ रही है और इसमें तब्दीली भी नज़र आने लगी है. अब समलैंगिकों में भरोसा लौट रहा है और वो बराबरी के हक़ की मांग कर रहे हैं.

बौहदिद बेलहिदी का कहना है कि वो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने ख़ुलेआम एलजीबीटी पर बोला. ट्यूनीशिया की राजधानी ट्यूनिश में 25 साल के बौहदिद ने अरब वर्ल्ड का पहला एलजीबीटी रेडियो स्टेशन खोला है.

इस रेडियो स्टेशन में बहुत पैसे नहीं लगे हैं, लेकिन पूरी तरह से पेशेवर है. इस रेडियो स्टेशन को चलाने में बौहदिद के अलावा 6 लोग और शामिल हैं.

रेडियो स्टेशन का कॉरिडोर एलजीबीटी के रेनबो रंग से रंगा है और इसी रंग का झंडा भी लगा है.

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गे रेडियो स्टेशन
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गे रेडियो स्टेशन

बेलहिदी का कहना है कि रेडियो स्टेशन बनने के 6 महीने बाद ही 15 देशों में 10 हज़ार श्रोता बन गए. इसका प्रसारण हफ़्ते में 6 दिन यूट्यूब के ज़रिए और ऑनलाइन लाइव भी किया जाता है.

इस रेडियो स्टेशन से गानों का प्रसारण होता है और साथ ही समलैंगिकता को लेकर गंभीर बहस भी होती है. हालांकि प्रसारण के दौरान लोगों की पहचान ज़ाहिर नहीं की जाती है.

ट्यूनीशिया का डच दूतावास आंशिक रूप से इस रेडियो स्टेशन को आर्थिक मदद दे रहा है. अंतरराष्ट्रीय दबाव और क़ानूनी चुनौतियों को देखते हुए इस रेडियो स्टेशन को मान्यता दे दी गई है.

ऐसा कहा जा रहा है कि उत्तरी अफ़्रीका में किसी भी एलजीबीटी समूह के लिए यह पहली उपलब्धि है.

स्टेशन शुरू होने के बाद इस पर पश्चिमी मीडिया का ध्यान गया. जब बेलहिदी को लोगों ने प्रताड़ित करना शुरू किया तो पश्चिमी मीडिया ने इसको भी ज़ोर शोर से उठाया.

रे रेडियो स्टेशन
BBC
रे रेडियो स्टेशन

इस रेडियो स्टेशन के कारण लोग ग़ुस्से का भी इज़हार कर रहे थे. बेलहिदी का कहना है कि उन्हें गालियों से भरे 4,700 मैसेज भेजे गए.

इनमें जान से मारने की भी धमकी थी और एक इमाम ने पिटाई की धमकी दी थी. बेलहिदी पर हमले भी हुए.

गे और लेस्बियन को लेकर ट्यूनीशिया में तीन साल की क़ैद की सज़ा का प्रावधान है. यहां तक कि पिछले साल ट्यूनीशिया की सरकार ने कहा कि संदिग्ध समलैंगिकों की पहचान के लिए जबरन एनल की जांच नहीं की जाएगी.

ट्यूनीशिया के लोग धार्मिक मान्यताओं और रूढ़ियों को मानते हैं. इस समाज में एलजीबीटी का मुद्दा कभी मुखर रूप से सामने नहीं आया और आया भी तो लोग इस पर बातचीत करने से बचते रहे. ऐसे लोगों के बीच यह रेडियो स्टेशन समलैंगिकों के मुद्दों और उनके हक़ों को ज़ोर-शोर से उठा रहा है.

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