2050 तक अमेरिका के समुद्र तटों पर मचेगी तबाही, NOAA के वैज्ञानिक कह रहे हैं दुनिया के लिए खतरे की घंटी

वॉशिंगटन, 16 फरवरी: जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक संकट की वजह से अब अमेरिका पर भी खतरा मंडराने लगा है। मंगलवार को वहां वैज्ञानिकों ने समुद्र के जलस्तर बढ़ने को लेकर सरकार को एक रिपोर्ट दी है, जिससे व्हाइट हाउस के भी पसीने छूटने लगे हैं। इसकी वजह ये है कि पिछले एक सौ साल में अमेरिका के आसपास समुद्र के स्तर में जितनी वृद्धि हुई है, आने वाले तीन दशकों में ही उतना समुद्र तल बढ़ सकता है। अमेरिका ऐसा देश है, जिसका कोई ना कोई इलाका आए दिन किसी ना किसी भयानक तूफान जैसे प्राकृतिक घटनाओं की चपेट में आता रहता है। लेकिन, आने वाले 30 वर्षों में खासकर तटीय इलाकों में तूफान और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं में 10 गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है।

2050 तक अमेरिका के समुद्र तटों पर मचेगी तबाही-रिपोर्ट

2050 तक अमेरिका के समुद्र तटों पर मचेगी तबाही-रिपोर्ट

अमेरिकी वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2050 तक अमेरिका के आसपास समुद्र का स्तर 10 से 12 इंच (0.25 - 0.30 मीटर) तक और बढ़ जाएगा। इसकी भयानकता का अंदाजा इसी से लगता है कि नेशनल ओशनिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) की टेक्निकल रिपोर्ट के मुताबिक जितना समुद्र तल एक शताब्दी में बढ़ना था, वह 30 वर्षों (2020 - 2050) से भी कम समय में बढ़ जाएगा। यह रिपोर्ट सैटेलाइट से निगरानी के आधार पर तैयार की गई है, जिसमें आने वाले दशकों कि लिए अनुमान जताया गया है। मंगलवार को जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि समुद्र के स्तर बढ़ने की वजह से तूफानों की स्थिति घातक होगी, उच्च ज्वारें पैदा होंगी, तटीय इलाकों में कटाव बढ़ेगा और दलदली जमीन बर्बाद हो जाएगी।

2017 के बाद पहला अनुमान- एनओएए टेक्निकल रिपोर्ट

2017 के बाद पहला अनुमान- एनओएए टेक्निकल रिपोर्ट

नेशनल ओशनिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन की वेबसाइट पर इस रिपोर्ट की सब-टाइटल है, 'अपडेटेड प्रोजेक्शंस एबलेबल थ्रू 2050 फॉर ऑल यूएस कोस्टल वॉटर्स'। इसके अनुसार यह सभी अमेरिकी राज्यों के लिए समुद्र के स्तर का अभी तक का सबसे ताजा अनुमान है; और फैसले लेने वालों को इससे जानकारी मिलेगी। यह मल्टी-एजेंसी कोशिशों का नतीजा है और 2017 के बाद पहला अपडेट है और 2050 तक के अनुमान से जनता की मदद करने में सहायता मिल सकती है।

पहले के अध्ययनों की पुष्टि हुई- नासा

पहले के अध्ययनों की पुष्टि हुई- नासा

इसकी वजह से भारी बारिश नहीं होने या तूफान की गैर-मौजूदगी में भी तटीय इलाकों में गंभीर रूप से बाढ़ जैसी स्थिति बनने लगेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि 'आज भी सामान्य हवा चलने या मौसमी ज्वार की वजह से आबादी लगातार बाढ़ की चपेट में आती है और कुछ दशकों में इसमें भयानक ढंग से इजाफा होगा....घर और कारोबार तबाह होंगे, स्टॉर्म वॉटर और वेस्ट वॉटर सिस्टम काम के नहीं रह जाएंगे, तटीय भूमिगत जल में खारा पानी मिल जाएगा, तटीय दलदली जमीन बेकार होगी और पूरा इकोसिस्टम चौपट हो जाएगा। ' रिपोर्ट के मुताबिक पहले जो तटीय इलाके हाई टाइड जैसी घटनाओं के बाद भी बाढ़ से बचे रहते थे, वहां भी गंभीर स्थितियां पैदा होंगी। नासा के एडमिनिस्ट्रेटर बिल नेल्सन ने एक बयान में कहा है ये रिपोर्ट पहले के अध्ययनों की पुष्टि करता है कि समुद्र का स्तर किस खतरनाक गति से बढ़ रहा है।

'दुनिया के लिए खतरे की घंटी'

'दुनिया के लिए खतरे की घंटी'

नोआ की रिपोर्ट की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगता है कि इसमें कहा गया है, 'आज मौसम बिगड़ने पर जो बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है और नुकसान होता है, 2050 तक यह इससे 10 गुना ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा।' नोआ के नेशनल ओशन सर्विस डायरेक्टर निकोल लिबॉइयूफ ने एक बयान में कहा है, 'कुछ स्थानों में इसकी संख्या में हर 2-5 साल में एक घटना से, हर साल कई घटनाएं देखने को मिलेगा। ' इस रिपोर्ट ने अमेरिका की संघीय सरकार के 2017 के समुद्र तल में इजाफे के अनुमान को अपटेड किया है। नोआ के एडमिनिस्ट्रेटर रिक स्पिनरैड ने कहा है, ये आंकड़े दुनिया के लिए खतरे की घंटी है और अमिरेकियों के लिए भी चेतावनी है कि अपने तटीय इलाकों के लोगों को ग्लोबल वॉर्मिंग से सुरक्षित करें।

2050 तक अमेरिका को बाढ़ से 4,060 करोड़ डॉलर के नुकसान का अनुमान

2050 तक अमेरिका को बाढ़ से 4,060 करोड़ डॉलर के नुकसान का अनुमान

पिछले महीने ही अमेरिका के नेचर क्लाइमेट चेंज में एक शोध प्रकाशित हुआ था, जिसमें बताया गया था कि 2050 तक अमेरिका को बाढ़ से होने वाले नुकसान में 26% तक इजाफा होगा और वह बढ़कर 4,060 करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा। इसकी वजह से वहां की गरीब जनता के सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। नोआ की ताजा रिपोर्ट के बारे में व्हाइट हाउस के नेशनल क्लाइमेट एडवाइजर गिना मैकार्थी ने एक बयान जारी कर कहा है, 'हमें ग्रीनहाउस गैसों को कम करने के लिए निश्चित तौर पर प्रयासों को दोगुना करना होगा, जिसके चलते जलवायु परिवर्तन होता है, इसके साथ ही तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को बढ़ते समुद्र की चुनौती का सामना करने लायक बनने के लिए तैयार करना होगा।'(तस्वीरें सौजन्य: यू ट्यूब)

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