लेनिन के अंतिम पलों की कहानी: तीन ब्रेन स्ट्रोक के बाद स्टालिन से मांगी थी मौत की भीख
नई दिल्ली। रूसी कम्युनिस्ट लीडर व्लादिमिर लेनिन पर 28 साल की फैनी कैप्लान नाम की महिला ने 30 अगस्त 1918 को तीन गोलियां दाग दी। जिसमें से एक लेनिन के जबड़े में जा लगी, दूसरी गोली उनके गर्दन पर और तीसरी उन्हें हल्के से छूती हुई निकल गई। हालांकि, कैप्लान की दो गोलियों से लेनिन बूरी तरह से घायल हो गए थे। इस घटना के बाद कैप्लान ने कहा था, 'आज मैंने ही लेनिन पर गोलियां चलाई है। मैं यह किसी को नहीं बताऊंगी कि यह रिवॉल्वर मैंने किससे ली। मैं कुछ भी डिटेल्स नहीं दूंगी।' हालांकि, इस घटना के 6 साल बाद महान रूसी क्रांतिकारी की मौत ब्रेन स्ट्रोक से हुई थी, लेकिन रुसी इतिहासकार बताते हैं कि जहर देने की वजह से हुई थी लेनिन की मौत हुई।

स्ट्रॉक के शिकार थे लेनिन
कैप्लान की गोली से लेनिन बच तो गए थे, लेकिन वे लंबे समय के लिए स्ट्रोक का शिकार हो गए। अप्रैल 1922 में लेनिन के अंदर से गोली निकाल दी गई थी, लेकिन उसके एक महीने के बाद ही उन्हें पहला स्ट्रोक आया, जिसने उन्हें भाषण से वंचित तो किया ही साथ ही वे अपने आंदोलन से भी बाधित हुए। छह महीने बाद लेनिन फिर से काम पर लौट आए। दिसंबर 1922 में आए दूसरे स्ट्रॉक ने उन्हें राजनीति से सन्यांस लेने के लिए मजबूर कर दिया। हालांकि, स्टालिन उन्हें बार-बार मिलने जरूर आते थे।

स्टालिन से थी खटपट
दिसंबर 1922 में लेनिन ने एक लेटर लिखा था, जिसमें वे पार्टी के सेंट्रल कमेटी के ढांचें और एक व्यक्तिगत कमांड को बदलना चाहते थे। उन्होंने अपने लेटर में लिओन ट्रोट्स्की और निकोलाई बुखरीन के बारे में भी टिप्पणी की थी। लेनिन ने पार्टी को लिखे लेटर में जोसेफ स्टालिन की कार्यों की गंभीर आलोचना की थी, जिन्हें अप्रैल 1922 में पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया था। स्टालिन पार्टी का महासचिव बनाने का पछतावा होने के साथ लेनिन ने स्टालिन के काम करने के तरीकों पर सवाल उठाए थे।

लेनिन को तीसर स्ट्रोक और पोटेशियम साइनाइड देने की गुहार
मार्च 1923 में आए तीसरे स्ट्रॉक ने लेनिन को बुरी तरह से जकड़ लिया और लेनिन बोलने की क्षमता तक खो दिए थे। अपने आखिरी क्षणों में लेनिन दर्द को सहन नहीं कर पा रहे थे, इसलिए उन्होंने स्टालिन से गुहार लगाई और कहा कि पोटेशियम साइनाइड की खुराक देकर हमेशा के लिए इस दर्द को शांत कर दो। लेनिन को लगता था कि एक स्टालिन ही है, जो यह साहस भरा काम कर सकते हैं। हालांकि, स्टालिन ने ऐसा करने से मना कर दिया था।

स्टालिन पर शक
रूसी इतिहासकार लेव लूरी ने 2012 में लिखा था कि लेनिन की मौत स्ट्रोक की वजह से नहीं, बल्कि पोटेशियम साइनाइड देने की वजह से हुई थी। इतिहासकार के मुताबिक, लेनिन को स्ट्रोक से मौत का जोखिम नहीं था। यहां एक बात गौर करने वाली है कि स्टालिन विरोधियों को निपटाने के लिए जहर देने में माहिर थे। यहां तक कि बुखरीन ने एक बार कहा था, 'कोबा (स्टालिन का क्रांतिकारी उपनाम) कुछ भी करने में सक्षम है।' हालांकि, कई इतिहासकार लेनिन की मौत का संदेह स्टालिन पर हमेशा से बना हुआ है।
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