श्रीलंका के राष्ट्रपति ने भारत की फिर से की प्रशंसा, कहा- PM मोदी ने हमें दी नई जिंदगी
कोलंबो, 03 अगस्त: श्रीलंका आजादी के बाद के अपने सबसे बुरे दौर में है। देश राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। बीते दिनों रानिल विक्रमसिंघे ने नए राष्ट्रपति के पद की शपथ ली थी। बुधवार को राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने श्रीलंका की संसद के नए सत्र का भी उद्घाटन किया है। इसी के साथ रानिल विक्रमसिंघे ने भारत को भी लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा, "मैं श्रीलंका में आर्थिक संकट को बेहतर बनाने की कोशिश में भारत की ओर से की गई मदद के लिए विशेष रूप से उसका धन्यवाद देता हूं।" उन्होंने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी तारीफ भी की।

भारत ने दी नई जिंदगी
श्रीलंका को मदद देने के लिए नए राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम कर रही भारत सरकार ने हमें नई जिंदगी दी है। मैं श्रीलंका के लोगों और अपनी ओर से प्रधानमंत्री मोदी, भारत सरकार और भारत के लोगों को धन्यवाद देता हूं।" राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने संसद के तीसरे सत्र के दौरान सरकार का नीतिगत बयान पेश करते हुए ये टिप्पणी की। इस दौरान उन्होंने राजनीतिक दलों को सर्वदलीय सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया।

सर्वदलीय सरकार बनाने की अपील की
विक्रमसिंघे ने अपने संबोधन में कहा कि संसद को एकजुट होना चाहिए और मौजूदा संकट को दूर करने के लिए विभाजित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक सर्वदलीय सरकार ऐसी सरकार नहीं है जो एक पार्टी की एकमात्र राय पर काम करती है बल्कि यह एक ऐसी सरकार है जो एक सामान्य नीति ढांचे के भीतर सभी दलों के विचारों को शामिल करती है और निर्णय लेती है।

नई आर्थिक नीति तैयार कर रहे राष्ट्रपति
राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि वे अगले 25 वर्षों के लिए एक राष्ट्रीय आर्थिक नीति तैयार कर रहे हैं। यह नीति एक सामाजिक बाजार आर्थिक प्रणाली की नींव रखेगी छोटे औऱ मध्यम उद्य़मियों को प्रोत्साहित करेगी औऱ गरीब, वंचित समूहों के लिए विकास सुनिश्चित करेगी। इससे पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को लेकर भी बात की थी। उन्होंने कहा था कि उनके पूर्ववर्ती गोटबाया राजपक्षे के श्रीलंका लौटने का यह सही समय नहीं है, क्योंकि यहां उनकी मौजूदगी से देश में राजनीतिक तनाव भड़क सकता है।

सबसे खराब दौर से गुजर रहा श्रीलंका
सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में नागरिकों द्वारा उग्र विरोध प्रदर्शनों के कारण राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे 13 जुलाई को देश छोड़कर भाग गए थे। इसके बाद फिर उन्होंने अगले दिन राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद संसद ने 20 जुलाई को विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति निर्वाचित किया था। छह बार प्रधानमंत्री रहे विक्रमसिंघे को राजपक्षे के देश छोड़कर भाग जाने के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति भी नियुक्त किया गया था।












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