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हिंद महासागर, तमिलों के लिए 13A... श्रीलंका के राष्ट्रपति से आज कड़वे सवाल पूछेंगे प्रधानमंत्री मोदी?

Sri Lnaka-India: श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे दो दिनों के भारत दौरे पर हैं, जहां आज उनकी मुलाकात भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ होनी है। श्रीलंका के राष्ट्रपति का भारत दौरा उस वक्त हो रहा है, जब देश आर्थिक संकट से उबरने के लिए जूझ रहा है और भारत, श्रीलंका की आर्थिक संकट से बाहर लाने के लिए बड़ी भूमिका निभा रहा है।

राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय संबंधों, विशेषकर आर्थिक, व्यापार और जियो-स्ट्रैटिजिक क्षेत्रों में नई गति प्रदान करने की उम्मीद के साथ गुरुवार को दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी और विक्रमसिंघे आज दोनों देशों के बीच संबंधों के सभी प्रमुख पहलुओं पर व्यापक बातचीत करेंगे, लेकिन सवाल उठ रहे हैं, कि दोनों नेताओं के बीच सिर्फ मीठी बातें ही होंगी, या रानिल विक्रमसिंघे से प्रधानमंत्री मोदी कुछ तीखे सवाल भी पूछेंगे?

Sri Lankan president in india

आर्थिक संकट के समय भारत दौरा

आर्थिक संकट में फंसे श्रीलंका की भारत ने भारी मदद की है और उस वक्त, भारत श्रीलंका के साथ पूरी ताकत के साथ खड़ा रहा, जब चीन ने श्रीलंका को बीच मंछधार में छोड़ दिया था।

जबकि, भारत ने ना सिर्फ श्रीलंका को भारी-भरकम आर्थिक पैकेज दिया, बल्कि आईएमएफ से बेलऑउट पैकेज दिलाने में भी भारत ने काफी अहम भूमिका निभाई है। जो पाकिस्तान, चीन और सऊदी अरब के मदद के बाद भी आईएमएफ से लोन हासिल करने के लिए तरस गया था, वहीं भारत की मदद से श्रीलंका को फौरन आईएमएफ से लोन मिल गया।

भारत ने पिछले साल श्रीलंका को लगभग 4 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता दी थी, जिसमें भोजन और ईंधन की खरीद के लिए ऋण भी शामिल था, जब वह गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था।

भारत ने श्रीलंका को 2.9 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज हासिल करने में मदद के लिए आईएमएफ को गारंटी भी प्रदान की है।

लिहाजा, श्रीलंका की मदद में भारत की भूमिका को समझा जा सकता है।

बातचीत का एजेंडा क्या होगा?

उम्मीद है, कि विक्रमसिंघे भारत से बड़े पैमाने पर निवेश की मांग करेंगे, क्योंकि वह श्रीलंका को आर्थिक उथल-पुथल से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

श्रीलंका अब दोनों देशों के बीच ग्रिड कनेक्टिविटी, बंदरगाह विकास और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करेगा, जो मुख्यतः श्रीलंका के उत्तरी भाग में। पहले श्रीलंका इन प्रोजेक्ट्स को चीन के हवाले करना चाहता था, लेकिन चीन से दोस्ती का स्वाद चखने के बाद फिर से श्रीलंका भारत के खेमे में खड़ा है।

Sri Lankan president in india

हिंद महासागर पर होगी बात?

दक्षिणी हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी डिजाइन भारत के सुरक्षा हितों को प्रभावित करते हैं और द्विपक्षीय वार्ता के दौरान माना जा रहा है, कि हिंद महासागर में होने वाली चीनी घुसपैठ, जिसकी इजाजत चीन देता है, उसे लेकर आमने-सामने की बात होने की संभावना है।

चीन श्रीलंका का सबसे बड़ा द्विपक्षीय ऋणदाता है, और एक चीनी कंपनी ने हंबनटोटा बंदरगाह के निर्माण के लिए ऋण चुकाने में नाकाम रहने के बाद, हंबनटोटा बंदरगाह का 99 साल का पट्टा हासिल कर लिया, जो भारत के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा चिंता है।

कोलंबो बंदरगाह के बगल में 1.4 अरब डॉलर की भूमि सुधार परियोजना - जो श्रीलंका में सबसे बड़ा विदेशी निवेश है, उसने भारत की चिंताओं को बढ़ा रखा है, कि चीन इसे भारत की जासूसी के केंद्र के रूप में उपयोग कर सकता है।

इसके अलावा, भारत श्रीलंका के सामने तमिलों का मुद्दा भी उठा सकता है और राष्ट्रपति विक्रमसिंघे से संविधान के 13वें संशोधन को लागू करने पर जोर दे सकता है, जो दशकों से श्रीलंकन तमिलों के लिए बड़ा मुद्दा रहा है। साल 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते के बाद 13वें संशोधन का ड्राफ्ट बनाया गया था, जिसे देश में राजनीतिक स्वायत्तता की तमिल मांग के आंसर के रूप में देखा जाता है।

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