श्रीलंका की जनता को तत्काल राहत मिलेगी, रानिल विक्रमसिंघे ने किया बड़ा ऐलान

देश को आर्थिक संकट से उबारने के लिए कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे जनता को राहत देने के लिए तत्काल राहत कार्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया है।

कोलंबो, 16 जुलाई : देश को आर्थिक संकट से उबारने के लिए कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे जनता को राहत देने के लिए तत्काल राहत कार्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया है। श्रीलंका के पीएम मीडिया डिवीजन ने जानकारी देते हुए बताया कि, कार्यवाहक राष्ट्रपति ने आज सुबह मंत्रियों और सांसदों के साथ देश को पटरी पर लाने के लिए महत्वपूर्ण चर्चा की।

रानिल विक्रमसिंघे का बड़ा ऐलान

रानिल विक्रमसिंघे का बड़ा ऐलान

बैठक में रानिल विक्रमसिंघे ने आर्थिक दबाव के कारण संघर्ष कर रही श्रीलंका की जनता के लिए ईंधन, गैस और आवश्यक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए तत्काल राहत कार्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया है।

एक्शन में रानिल विक्रमसिंघे

एक्शन में रानिल विक्रमसिंघे

इसके अलावा, अगस्त में पेश होने वाले राहत बजट से इसके लिए अतिरिक्त धन का उपयोग करने का बैठक में निर्णय लिया गया है। उन्होंने खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम में तेजी लाने की सलाह दी है। साथ ही बैठक में व्यवसायियों को बिना किसी बाधा के व्यवसाय चलाने के लिए आवश्यक वातावरण तैयार करने के लिए योजनाएं बनाई गई है।

क्या कहा कार्यवाहक राष्ट्रपति ने


इस बीच, कार्यवाहक राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों द्वारा सौंपी गई योजना को एक अच्छी योजना के रूप में मान्यता दी गई है और वह भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए किए जा रहे उपायों के बारे में कार्यकर्ताओं को सूचित करेंगे।

अब तक के सबसे बुरे दौर में श्रीलंका

अब तक के सबसे बुरे दौर में श्रीलंका

बता दें कि, श्रीलंका इस समय घोर आर्थिक और राजनीतिक संकट की दौर से गुजर रहा है। देश पिछले 70 सालों के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। राष्ट्रपति गोटाबाया देश को कंगाल बना कर सिंगापुर भाग चुके हैं। रानिल विक्रमसिंघे को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया है। अब 7 दिनों के भीतर राष्ट्रपति का चुनाव कराने की बात चल रही है।

एक्शन में आए रानिल विक्रमसिंघे

एक्शन में आए रानिल विक्रमसिंघे

बता दें कि, श्रीलंका के कार्यवाहक राष्ट्रपति (Acting President) रानिल विक्रमसिंघे ने देश में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक विशेष समिति की नियुक्ति की है। नियुक्त विशेष समिति में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, पुलिस महानिरीक्षक और तीन सशस्त्र बलों के कमांडर शामिल हैं। कार्यवाहक राष्ट्रपति ने बताया कि, यह समिति को बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के कानूनी कार्रवाई करने की आजादी दी गई है।

फासीवादी ताकतें हावी होने की कोशिश कर रही है

फासीवादी ताकतें हावी होने की कोशिश कर रही है

एक्टिंग प्रेसिडेंट रानिल विक्रमसिंघे ने देश के बिगड़ चुके हालात पर चर्चा करते हुए कहा था कि, देश की वर्तमान परिस्थिति में कुछ ऐसे समूह भी सक्रिय हो गए हैं, जो देश के लोकतंत्र का दमन कर फासीवादी तरीकों से देश में आग लगाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे अराजक लोगों ने संसद में सुरक्षाबलों के हथियार और गोली तक चुरा लिए। रानिल विक्रमसिंघे ने आगे कहा कि, देश में चल रहे प्रदर्शन के क्रम में सेना के 24 जवान घायल हुए हैं जिनमें से 2 की हालत गंभीर है। उन्होंने कहा कि, विद्रोहियों और प्रदर्शनकारियों के बीच बड़ा अंतर है। शुरू से ही संघर्ष में शामिल कई लोगों ने तोड़फोड़ जैसी घटनाओं का विरोध किया है।

घोर आर्थिक संकट के बीच बागडोर रानिल के हाथ में

घोर आर्थिक संकट के बीच बागडोर रानिल के हाथ में

श्रीलंका में घोर आर्थिक संकट से उत्पन्न राजनीतिक संकट के बीच आखिरकार राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने इस्तीफा दे ही दिया है। इसके साथ ही गोटाबाया राष्ट्रपति के पद से आधिकारिक तौर पर हट गए हैं। संसद के अध्यक्ष ने इसकी पुष्टि की है। स्पीकर ने कहा है कि, प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे नए नेता का चुनाव होने तक राष्ट्रपति पद को संभालेंगे। साथ ही, स्पीकर ने ये भी ऐलान किया है कि इस्तीफा मंजूर होने के बाद अब 7 दिन के भीतर नए राष्ट्रपति की नियुक्ति की जाएगी। बता दें कि, श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश जयंत जयसूर्या ने रानिल विक्रमसिंघे को कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई थी।

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