श्रीलंका में जनता की जीत! देश ‘डूबोने’ वाले PM महिंदा राजपक्षे देंगे इस्तीफा, भारी प्रदर्शन के बाद फैसला
गोतबाया राजपक्षे की अध्यक्षता में प्रेसीडेंट हाउस में एक विशेष कैबिनेट बैठक में महिंदा राजपक्षे ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देने पर सहमति व्यक्त की
कोलंबो, मई 07: श्रीलंका में भारी विरोध प्रदर्शन के बीच अब श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे इस्तीफा दे सकते हैं और जनता के द्वारा मजबूर करने के बाद राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे अपने बड़े भाई और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे का इस्तीफा लेने के लिए मजबूर हो गये हैं। देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने में अहम भूमिका निभाने वाले दोनों भाई सत्ता छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं और इसीलिए देश में दोबारा आपातकाल लगा दी गई है।

इस्तीफा देंगे श्रीलंकन प्रधानमंत्री
रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने द्वीप राष्ट्र में आपातकाल की स्थिति लागू करने के साथ-साथ गहराते आर्थिक संकट के कारण प्रधानमंत्री पद छोड़ने का अनुरोध किया था। कोलंबो पेज की रिपोर्ट के अनुसार, गोतबाया राजपक्षे की अध्यक्षता में प्रेसीडेंट हाउस में एक विशेष कैबिनेट बैठक में महिंदा राजपक्षे ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने पर सहमति व्यक्त की। श्रीलंकाई मंत्रिमंडल को सूचित किया गया था कि, देश के मौजूदा आर्थिक संकट से निपटने में प्रधानमंत्री की विफलता के कारण, महिंदा राजपक्षे ने अपने पद से इस्तीफा देने का प्रस्ताव रखा है। और अब श्रीलंका की कैबिनेट उनका इस्तीफा स्वीकार कर सकती है। इसके अलावा, महिंदा राजपक्षे ने कहा है, कि अगर श्रीलंका में लगातार आर्थिक संकट का एकमात्र समाधान उनका इस्तीफा है, तो वह ऐसा करने को तैयार हैं।

श्रीलंका में स्थिति काफी बिगड़ी
इस बीच, श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने स्वीकार किया है कि, लोगों के कड़े विरोध के बीच देश में आर्थिक और राजनीतिक संकट का प्रबंधन करना एक गंभीर समस्या बन गई है। कोलंबो पेज की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि संकट के परिणामस्वरूप देश में पर्यटकों की संख्या और कम हो गई है। इसके अलावा, कारखानों के बंद होने से पहले से ही प्रचलित आर्थिक संकटों का बोझ भी बढ़ गया था। इसके साथ ही, राजनीतिक सूत्रों से पता चलता है कि श्रीलंका के कैबिनेट मंत्री, प्रसन्ना रणतुंगा, नालका गोडाहेवा और रमेश पथिराना, सभी देश के प्रधानमंत्री के रूप में इस्तीफा देने के महिंदा राजपक्षे के फैसले से सहमत हैं। हालांकि कैबिनेट मंत्रियों के विरोधाभास में मंत्री विमलवीरा दिसानायके ने कहा था कि देश के संकट से निपटने में महिंदा का इस्तीफा बेकार साबित होगा।

सोमवार को सौपेंगें इस्तीफा?
इसके अलावा राजनीतिक सूत्र यह भी बताते हैं कि प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे सोमवार को एक विशेष संबोधन में अपने पद से अपने इस्तीफे की घोषणा करने वाले हैं, जिसके बाद अगले सप्ताह कैबिनेट में फेरबदल किया जाएगा और अगले प्रधानमत्री के नाम की घोषणा की जाएगी। इस बीच, श्रीलंका तीव्र भोजन और बिजली की कमी से जूझ रहा है, जिससे देश को अपने पड़ोसियों से मदद लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। COVID-19 महामारी के दौरान पर्यटन पर रोक के कारण विदेशी मुद्रा की कमी को मंदी के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। देश पर्याप्त ईंधन और गैस नहीं खरीद पा रहा है, जबकि लोगों को बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित किया जा रहा है। आर्थिक स्थिति ने प्रधान मंत्री महिंदा राजपक्षे और राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांगों के साथ भारी विरोध प्रदर्शन किया है।

श्रीलंका में आपातकाल का ऐलान
श्रीलंका की स्थिति पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है, लेकिन देश को अपनी खराब नीतियों की वजह से दिवालिएपन की दहलीज पर ला चुके राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे अपनी गद्दी से उतरने के लिए तैयार नहीं हैं। जबकि पूरे देश में भीषण प्रदर्शन किए जा रहे हैं। जिससे घबराकर राष्ट्रपति ने आधी रात से आपातकाल लगाने की घोषणा कर दी है। राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने देश में अशांति के बीच पांच सप्ताह में दूसरी बार आपातकाल की घोषणा की। यह 6 मई की मध्यरात्रि से पूरे श्रीलंका में लागू हो गया। बता दें कि इससे पहले भी श्रीलंका में आर्थिक सकंट की वजह से ही आपातकाल लगाया गया था। तब चार अप्रैल को देश में इमरजेंसी लागू की गई थी।












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