क्या खत्म होगा श्रीलंका का आर्थिक संकट ? राष्ट्रपति ने सुझाए ये उपाय, राजनीतिक हलचल तेज

श्रीलंका इस समय घोर आर्थिक संकट की दौर से गुजर रहा है। देश में ऐसे हालात एकाएक पैदा नहीं हुए। सरकार के आलोचकों का मानना है कि देश की ऐसी हालत सरकारी नीतियों, कुप्रबंधन के कारण हुई है।

कोलंबो, 12 मई : श्रीलंका के राष्ट्रपति ने देश को संकट से उबारने के लिए कई तरीके सुझाए हैं। उन्होंने संसद को और ज्यादा सशक्त बनाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि देश से अराजकता को खत्म करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने इसके लिए नई सरकार बनाने की बात कही है। वहीं मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक श्रीलंका के समागी जन बलवेगया (एसजेबी) के नेता सजित प्रेमदासा के राष्ट्रपति राजपक्षे की अंतरिम सरकार में प्रधानमंत्री बनने की इच्छुक नहीं होने के कारण मुख्य विपक्षी दल एसजेबी श्रीलंका का अगला पीएम चुनने को लेकर दो धड़ों में बंट गया है।

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रुके हुए कार्यों को आगे बढ़ाना होगा
राष्ट्रपति ने आगे बताया कि देश को घोर आर्थिक संकट और अराजकता से उबारने के लिए सरकार के रुके हुए कार्यों को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि, इसी सप्ताह प्रधानमंत्री की नियुक्ति की जाएगी। गोटबाया ने कहा कि, प्रधानमंत्री उसी को बनाया जाएगा जिसके पास न सिर्फ संसद में बहुमत होगा बल्कि वह लोगों का भरोसा भी जीतने वाला होगा। उन्होंने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी।

नई सरकार को मौका दिया जाएगा
गोटबाया ने ट्वीट में आगे कहा कि, देश को आगे ले जाने के लिए नई सरकार को मौके दिए जाएंगे। साथ ही संविधान को संशोधित किया जाएगा, ताकि 19वें संशोधन के नियमों को फिर से लागू कर संसद को और मजबूत किया जा सके। राजपक्षे ने श्रीलंका में फैली अशांति को समाप्त करने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। उन्होंने अपने अगले ट्वीट में कहा, विपक्ष की ओर सेकी जा रही मांगों पर एक बैठक बुलाई जाएगी। उन्होंने कहा, नई सरकार और उसकी देश को स्थायित्व देने की क्षमता के साथ हमारे पास सत्ता और उसकी ताकतों पर चर्चा करने का मौका होगा।

आपसी सहयोग आवश्यक
ट्वीट में गोटबाया ने विपक्ष की ओर से इशारा करते हुए अपील की कि उन्हें इन सब कार्यों के लिए सहयोग की जरूरत होगी, ताकि लोगों की जान और संपत्ति बचाई जा सके। साथ ही देश को बिखरने से रोकते हुए जरूरी सामानों की सप्लाई को बनाए रखा जा सके।

ऐसे हालात एकाएक पैदा नहीं हुए
श्रीलंका में ऐसे हालात एकाएक पैदा नहीं हुए। सरकार के आलोचकों का मानना है कि देश की ऐसी हालत सरकारी नीतियों ,कुप्रबंधन के कारण हुई है। वहीं, लचर अर्थव्यवस्था के बीच श्रीलंका के विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा ने श्रीलंका में चीन के राजदूत क्यूई झेनहोंग से मुलाकात की। उन्होंने ऐसे कठीन समय में चीन से आपसी सहयोग और भाईचारे की उम्मीद रखी है। बातचीत के दौरान प्रेमदासा ने चीनी राजदूत से कहा कि उनका देश श्रीलंका को वर्तमान आर्थिक संकटसे उबारने में मदद करे।

जान बचाकर निकले गोटबाया
दूसरी तरफ श्रीलंका में जारी हिंसा के बीच प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे पूरे परिवार के साथ भाग खड़े हुए। उग्र भीड़ ने कोलंबो में राजपक्षे के सरकारी आवास को घेर लिया था। अंत में महिंद्रा राजपक्षे को इस्तीफा देना पड़ गया। हालांकि, उनके इस्तीफे से लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ और भारी अशांति के बीच राजपक्षे का पूरा परिवार हेलिकाप्टर पर सवार होकर कोलंबों में उग्र प्रदर्शनकारियों से बचकर भाग निकला।

हिंसा की आग में आखिर क्यों झुलस रहा है श्रीलंका
एक समय ऐसा था जब श्रीलंका की अर्थव्यवस्था दक्षिण एशिया की सबसे सशक्त और मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में से एक मानी जाती थी। 2019 में श्रीलंका को दुनिया के हाई मिडिल इनकम वाले देशों की सूची में अपग्रेड किया गया था। लेकिन पिछले दो वर्षों में इस देश की इकोनॉमी अर्श से फर्श पर आ गई। उपर से श्रीलंका पर चीन का बेहिसाब कर्ज चढ़ा हुआ है। हालांकि, श्रीलंका ने चीन से कहा है कि वह श्रीलंका के प्रति आपसी भाईचारा का प्रदर्शन करते हुए संकट से उबारने में उसकी मदद करे। बता दें कि श्रीलंका जब अपना विदेशी कर्ज लौटा पाने में असमर्थ हो गया तो उसने खुद को दिवालिया घोषित कर लिया।

घोर आर्थिक संकट
सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो श्रीलंका में महंगाई दर 17 फीसदी को भी पार कर चुकी है । देखा जाए तो यह एक भयानक स्थिति है जिससे उबर पाना श्रीलंका जैसे देश के लिए फिलहाल मुश्किल है मगर नामुमकिन नहीं। देश के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने देश को आर्थिक संकट से उबारने के लिए कई तरीके बताए हैं। उन्होंने देश को पटरी पर लाने के लिए प्रधानमंत्री की नियुक्ति इसी सप्ताह करने का ऐलान किया है।

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