श्रीलंका में खत्म हुआ परिवार राज! राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे प्रधानमंत्री भाई को हटाने के लिए हुए तैयार
राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने सहमति व्यक्त की है, कि एक नए प्रधानमंत्री के नाम के लिए एक राष्ट्रीय परिषद की नियुक्ति की जाएगी और संसद में सभी दल के सजस्य नई सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल होंगे।
कोलंबो, अप्रैल 29: श्रीलंका में आखिरकार एक परिवार का राज समाप्त होने के कगार पर पहुंच गया है और भारी प्रदर्शन के बीच राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे अपने बड़े भाई महिंदा राजपक्षे का इस्तीफा लेने के लिए तैयार हो गये हैं, जो देश के प्रधानमंत्री हैं। राजपक्षे परिवार के बाकी सदस्य पिछले महीने ही केन्द्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे चुके हैं। आपको बता दें कि, राजपक्षे परिवार के 7 सदस्य केन्द्रीय कैबिनेट में शामिल थे।

श्रीलंका में खत्म हुआ परिवार राज?
श्रीलंका के राष्ट्रपति ने दशकों में देश के सबसे खराब आर्थिक संकट के कारण उत्पन्न राजनीतिक गतिरोध को हल करने के लिए अपने बड़े भाई महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री की कुर्सी से हटाने के लिए तैयार हो गये हैं। श्रीलंका के एक प्रमुख सांसद ने इसकी पुष्टि की है और कहा है कि, महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री पद से बदल दिया जाएगा। हालांकि, अभी भी राष्ट्रपति ने अपना इस्तीफा सौंपने से इनकार कर दिया है। जिसका मतलब ये हुआ, कि राजपक्षे परिवार का एक सदस्य अभी भी श्रीलंका सरकार में सबसे बड़े ओहदे पर मौजूद रहेगा।

कौन बनेगा नया प्रधानमंत्री?
राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने सहमति व्यक्त की है, कि एक नए प्रधानमंत्री के नाम के लिए एक राष्ट्रीय परिषद की नियुक्ति की जाएगी और संसद में सभी दल के सजस्य नई सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल होंगे। सांसद मैत्रीपाला सिरिसेना ने राष्ट्रपति के साथ बैठक के बाद इसकी घोषणा की है। यानि, श्रीलंका में एक सार्वजनिक सरकार का गठन किया जाएगा, जिसमे सभी पार्टी के सदस्य मंत्री रहेंगे। पिछले महीने की राष्ट्रपति ने सार्वजनिक सरकार बनाने का प्रस्ताव विपक्ष के सामने रखा था, लेकिन विपक्ष ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया था और धीरे धीरे श्रीलंका में हालात बिगड़ने के साथ काफी तेज प्रदर्शन शुरू हो गये थे, जिसमें एक शख्स की मौत भी हो गई थी।

अल्पमत में राजपक्षे की सरकार
आपको बता दें कि, श्रीलंका में आर्थिक स्थिति काफी ज्यादा खराब होने के बाद श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति सिरिसेना ने मौजूदा राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे से अपना समर्थन वापस ले लिया था। सिरिसेना के पास 40 सांसद थे, जिससे गोतबया राजपक्षे की सरकार अल्पमत में आ गई थी, लेकिन राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद लोगों का गुस्सा और भड़क उठा था और लगातार प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति निवास के आगे हजारों लोगों की भीड़ दोनों भाईयों से देश की विकराल स्थिति की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग के साथ प्रदर्शन कर रहे थे।

दिवालिया होने के कगार पर श्रीलंका
आपको बता दें कि, भारत का पड़ोसी और द्वीप देश श्रीलंका दिवालिया होने के करीब है और उसने घोषणा की है, कि वह अपने विदेशी ऋणों पर भुगतान फिलहाल सस्पेंड कर रहा है। उसे इस साल 7 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज और 2026 तक 25 अरब डॉलर चुकाना है। जबकि, श्रीलंका के पास विदेशी भंडार 1 अरब डॉलर से भी कम बचा है। विदेशी मुद्रा की कमी ने आयात को गंभीर रूप से सीमित कर दिया है, जिससे लोगों को भोजन, ईंधन, रसोई गैस और दवा जैसी आवश्यक चीजें खरीदने के लिए लंबी लाइनों में इंतजार करना पड़ रहा है।

राजपक्षे परिवार का दबदबा
राजपक्षे और उनका परिवार, जिनमें प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे भी शामिल हैं, पिछले 20 वर्षों में श्रीलंका में जीवन के लगभग हर पहलू पर हावी रहे हैं। मार्च से सड़कों पर भीड़ लगाने वाले प्रदर्शनकारियों ने उन्हें इस संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया। दो महीने पहले तक श्रीलंका की सरकार की ये स्थिति थी, कि देश के तमाम प्रमुख मंत्रालयों पर राजपक्षे परिवार का ही कब्जा था। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की कुर्सी के साथ साथ वित्त मंत्रालय, कानून मंत्रालय, परिवहन मंत्रालय और खेल मंत्रालय की कुर्सी भी राजपक्षे परिवार के ही पास थे और राजपक्षे परिवार की तीन पीढ़िया श्रीलंका की सरकार में शामिल थी।












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