श्रीलंका ने हिंद महासागर में चीनी जहाज को आने की नहीं दी इजाजत, विदेश मंत्री अली बोले- भारत ने जो कहा है...
Sri Lanka China Ship Indian Ocean: श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने मंगलवार को कहा, कि श्रीलंका ने चीनी जहाजों को श्रीलंका में रुकने की अनुमति नहीं दी है। हालांकि, साबरी ने सीधे तौर पर चीनी जहाज का उल्लेख नहीं किया, लेकिन भारत ने अतीत में चीन के कथित रिसर्च जहाज, शी यान 6 के बारे में चिंता जताई थी, जो एक तथाकथित चीनी रिसर्च जहाज है, जिसके बारे में चीन कहता है, कि ये जहाज राष्ट्रीय जलीय संसाधन अनुसंधान और विकास एजेंसी (एनएआरए) के साथ रिसर्च करता है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ये चीन का जासूसी जहाज है।
श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने कहा, कि "भारत ने इस संबंध में अपनी चिंता व्यक्त की है। हम अब एक एसओपी लेकर आए हैं, जब हम इसे बना रहे थे, तो हमने भारत सहित अपने दोस्तों से सलाह ली थी।"

हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है, कि अली साबरी अमेरिकी अवर सचिव विक्टोरिया नूलैंड की हालिया श्रीलंका यात्रा का जिक्र कर रहे थे या नही, लेकिन जब उन्होंने 'दोस्तों' का संदर्भ दिया है, तो अमेरिका की अवर सचिव का नाम सामने आ गया है, क्योंकि नूलैंड ने चीन के स्वामित्व वाले श्रीलंकाई बंदरगाह हंबनटोटा में चीनी जहाज शि यान 6 डॉकिंग के बारे में चिंता जताई थी।
भारत के साथ आया श्रीलंका
श्रीलंकाई समाचार आउटलेट्स ने बताया है, कि नूलैंड की साबरी के साथ बैठक के दौरान, दोनों ने श्रीलंकाई क्षेत्र में किसी भी गतिविधि को अंजाम देने में विदेशी जहाजों और विमानों द्वारा पालन की जाने वाली मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर चर्चा की।
रिपोर्ट के मुताबिक, चर्चा की गई थी, कि "जब तक यह (चीन) एसओपी का अनुपालन करता है (कोई समस्या नहीं है)। लेकिन, अगर यह अनुपालन नहीं करता है, तो हमें समस्या है।"
श्रीलंकन विदेश मंत्री ने कहा, कि "हमने अक्टूबर में (जहाज को) श्रीलंका आने की इजाजत नहीं दी है। (चीनी जहाज को लेकर) भारत की सुरक्षा चिंताएं, जो वैध हैं, हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि हम अपने क्षेत्र को शांति के क्षेत्र के रूप में रखना चाहते हैं।"
आपको बता दें, कि भारत ने कहा है, कि भारत के पड़ोस में कोई भी घटनाक्रम, जिसका भारत की सुरक्षा पर असर पड़ता है, वह भारत की चिंता है। केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पिछले साल श्रीलंका में रुके चीनी जासूसी जहाज युआन वांग-5 पर टिप्पणी करते हुए कहा था, कि "हमारे पड़ोस में क्या होता है, हमारी सुरक्षा पर असर डालने वाला कोई भी घटनाक्रम स्पष्ट रूप से हमारे लिए दिलचस्पी का विषय है।"
हिंद महासागर में चीन का जासूसी जहाज
चीन यह दावा करता रहा है कि शि यान 6 एक "वैज्ञानिक अनुसंधान पोत" है जिसमें 60 लोग सवार हैं जो समुद्र विज्ञान, समुद्री भूविज्ञान और समुद्री पारिस्थितिकी परीक्षण करता है।
इससे पहले युआन वांग 5 को भी चीन ने "वैज्ञानिक अनुसंधान पोत" के रूप में भी प्रचारित किया था। लेकिन, यह अंतरिक्ष यान ट्रैकिंग में माहिर है, और समुद्र तल का मानचित्रण करने में सक्षम है, जो चीनी नौसेना के पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए महत्वपूर्ण सर्विलांस उपकरण है।
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि चीन ने युआन वांग 5 जासूसी जहाज को उस वक्त हिंद महासागर में भेजा था, जब भारत अपने एक प्रमुख मिसाइल का प्रक्षेपण करने वाला था और चीनी जहाज के आने की वजह से भारत को अपना प्रक्षेपण टालना पड़ा था।
चीन ने श्रीलंका से इस साल अगस्त में भी शि यान 6 को डॉक करने की अनुमति देने का अनुरोध किया हुआ है, और चीन ने अक्टूबर महीने में अपने जहाज को हिंद महासागर में श्रीलंका के हिस्से में भेजने का अनुरोध किया हु्आ है, जिसे श्रीलंका ने ठुकरा दिया है।
भारत, हिंद महासागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति और श्रीलंका में उसके प्रभाव को लेकर सशंकित है, क्योंकि वह दोनों को अपने प्रभाव क्षेत्र में देखता है।
वहीं, चीन ने नाराजगी जताते हुए कहा, कि "कुछ देशों द्वारा श्रीलंका पर दबाव बनाने के लिए सुरक्षा चिंताओं का हवाला देना अनुचित है।" श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह को भी चीन चलाता है। उसने इसे 2017 में 1.12 अरब डॉलर में 99 साल की लीज पर लिया, जो कि श्रीलंका द्वारा इसे बनाने के लिए चीनी फर्म को भुगतान किए गए 1.4 बिलियन डॉलर से भी कम है।
नकदी संकट से जूझ रहे श्रीलंका के द्विपक्षीय ऋण का 52% हिस्सा चीन का है। अप्रैल 2022 में कोलंबो ने अपने 46 अरब डॉलर के विदेशी ऋण पर चूक कर दी और आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।
वहीं, पिछले साल जनवरी से जुलाई के बीच, भारत ने श्रीलंका को क्रेडिट लाइन, मुद्रा स्वैप व्यवस्था और स्थगित आयात भुगतान के माध्यम से 4 अरब डॉलर की त्वरित सहायता प्रदान की थी। श्रीलंका पर चीनी ऋणदाताओं का 7.4 अरब डॉलर बकाया है।
श्रीलंका की संसद ने जुलाई में घरेलू ऋण पुनर्गठन योजना को मंजूरी दे दी, जो अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा स्वीकृत 2.9 अरब डॉलर के बेलआउट को जारी रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
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