8,000 से ज्यादा सैटेलाइट लगा रहे पृथ्वी का चक्कर,सितारे देखना भी होगा मुश्किल, वैज्ञानिकों ने दी ये चेतावनी
अंतरिक्ष मे जमा हो रहे सैटेलाइट कचरे पर अब वैज्ञानिकों ने भी चिंता जतानी शुरू कर दी है। आने वाले कुछ ही वर्षों में हालात ऐसे बन सकते हैं कि आसमान में सितारे की जगह सिर्फ सैटेलाइट ही घूमते दिखेंगे।

धरती पर महानगरों की तरह अंतरिक्ष में भी कूड़े का अंबार लगना शुरू हो गया है। लेकिन, यह पृथ्वी वाले कचरे से ज्यादा भयावह साबित हो सकता है। वैज्ञानिकों ने पुराने पड़े और खराब हो चुके सैटेलाइट के कचरों से दुनिया को सावधान किया है। आने वाले समय में इनकी संख्या लाखों तक पहुंच सकती है। कल्पना कीजिए कि यदि अभी प्रदूषण कम रहने पर कभी-कभार आसमान में सितारे देखने का सौभाग्य मिल भी जाता है, लेकिन एक दिन ऐसा भी आ सकता है, जब आकाश में सितारों की जगह मानव निर्मित सैटेलाइट ही सैटेलाइट घूमते नजर आएंगे। वैज्ञानिकों के मुताबिक हालात विस्फोटक होते जा रहे हैं।

अभी 8,000 से ज्यादा सैटेलाइट लगा रहे हैं पृथ्वी का चक्कर
वैज्ञानिकों ने हाल ही में चेतावनी दी है कि अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स की भरमार से रात के समय में आकाश का स्वरूप ही बदलने का खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते सितारों को देख पाना मुश्किल हो सकता है और एलियंस जीवन के बारे में खोज भी असंभव हो जा सकता है। द इंडिपेंडेंट के मुताबिक इस समय 8,000 से ज्यादा सैटेलाइट पृथ्वी की कक्षा का चक्कर लगा रहे हैं। यह संख्या 2019 के बाद से चार-गुना बढ़ गई है। जिस तरह से ग्लोबल स्पेस इंडस्ट्री का व्यावसायिकरण हो रहा है, उससे यह रफ्तार और भी ज्यादा बढ़ने की संभावना है।

आसमान में सितारों की जगह सैटेलाइट रेंगते दिखेंगे-वैज्ञानिक
टेंशन वाली बात ये है कि दुनिया भर में पृथ्वी की निचली कक्षा के लिए करीब 4,00,000 सैटेलाइट को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। जहां कनेक्टिविटी और नैविगेशन से लेकर जलवायु परिवर्तन तक पर नजर रखने के लिए यह आवश्यक है, वहीं प्रौद्योगिकी की अधिकता का एक दूसरा संकट भी है, जो पूरी मानवता पर मंडरा रहा है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में फिजिक्स और ऐस्ट्रोनॉमी के प्रोफेसर टोनी टायसन ने कहा है, 'अगर आप किसी भी अंधकार वाले स्थान में गए हों और 2030 में आसमान की ओर देखेंग तो वहां बहुत ही भयावह नजारा दिखेगा। आसमान में सैटेलाइनट रेंग रहे होंगे और बहुत ही अंधकार वाले आसमान में भी बहुत ही कम सितारे नजर आएंगे। यह बहुत ही गंभीर मामला है।'

दूसरी सभ्यताओं का पता लगाना मुश्किल हो सकता है
पिछले हफ्ते ही यूके की स्पेस एजेंसी रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी(RAS) और डिपार्टमेंट फॉर बिजनेस ने डार्क एंड क्वाइट स्काइज कॉन्फ्रेंस किया है, ताकि इस संबंध में कोई विशेष नियम निर्धारित किए जा सकें। आरएएस के डिप्टी एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर डॉक्टर रॉबर्ट मैसी ने कहा कि हम अंतरिक्ष को कैसे देखते हैं, इसमें 'आदर्श रूप से एक बदलाव' आ गया है। उन्होंने बताया, 'वास्तविक संभावना ये है कि हम इस दशक के अंत तक हजारों-हजार सैटेलाइट को चक्कर लगाते देखेंगे। सच कहूं तो जीवन की उत्पत्ति का पता लगाने में काफी देर हो सकती है, लेकिन अगर आसमान में अविश्वसनीय रूप से ज्यादा कोलाहल होगा तो दूसरी सभ्यताओं के संकेतों को पकड़ पाना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा। प्रकाश प्रदूषण की तरह आप इससे भाग नहीं सकते, क्योंकि जब भी आप धरती पर होंगे, तभी आसमान देख सकते हैं।'

सैटेलाइट की वजह से पहले से भी हो रही हैं परेशानियां
उन्होंने कहा कि 'अगर हम इसे यूं ही अनियंत्रित छोड़ दें तो मैं समजता हूं कि यह एक सांस्कृतिक मुद्दा भी है। अगर आप उस स्थिति में पहुंच जाते हैं, जहां सितारों के करीब 10 फीसदी सैटेलाइट घूमते रहेंगे तो मुझे लगता है कि यह काफी रुकावट पैदा करने वाला है और इससे प्राकृतिक परिदृश्य को नुकसान पहुंचेगा। ' एक्सप्रेस के अनुसार विशेषज्ञों ने बताया है कि इस मामले का यह भी एक हिस्सा है कि सैटेलाइट की वजह से सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर रिफ्लेक्ट होता है, जिससे खगोलविदों को पहले ही समस्या हो रही है। दूसरी चीज ये है कि इंटरनेट सैटेलाइट संवेदनशील रेडियो टेलीस्कोप को प्रभावित करने में सक्षम हैं।

ब्रह्मांड से जुड़ी खोजों पर भी पड़ रहा है असर
चिली में स्थित वेरा सी रुबिन ऑब्जर्वेटरी का वेरा रुबिन टेलीस्कोप पहले से ही सैटेलाइट की वजह से बड़ी बाधाएं झेल रहा है। यह अगले साल 10 वर्षीय सर्वे शुरू करने वाला है, जिसका उद्धेश्य 37 अरब सितारों और आकाशगंगाओं में सूक्ष्म बदलावों की खोज करना है। लेकिन, शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इसके लगभग 40 फीसदी फ्रेम ट्विलाइट ऑवर्स के दौरान प्रभावित होंगे।
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सैटेलाइट को लेकर भयावह भविष्यवाणी
जानकारी के मुताबिक एक स्वतंत्र विशेषज्ञ केन मैकलेओड ने गणना की है कि जब सभी इंटरनेट समूह ऑपरेशन में होंगे तब करीब 16,000 खराब इंटरनेट सैटेलाइट को किसी भी समय कक्षा से बाहर करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा, 'वे रि-एंट्री फायरबॉल्स पैदा करेंगे।' 'अगर हम सच में उन संख्याओं पर विश्वास करेंगे कि कितने गिरने वाले हैं तो यह करीब 60 प्रतिदिन हैं और वह भी 7 मैग्निट्यूड से भी ज्यादा चमकीला (नंगी आंखों से दिखने देने वाला सबसे मंद तारा प्रकाश),इसलिए वे सभी निरीक्षणों में बाधा खड़ी कर सकते हैं। '(तस्वीरें- सांकेतिक)
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