दक्षिणी ध्रुव: अंटार्टिका तक कोरोना का प्रकोप, एक मिशन के करीब दो-तिहाई सदस्य संक्रमित
नई दिल्ली, 3 जनवरी: ओमिक्रॉन के दुनिया भर में बढ़ते असर के बीच दक्षिण अफ्रीका से होकर पहुंचे एक मिशन के अधिकतर सदस्य अंटार्टिका में कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। बेल्जियम का यह मिशन दक्षिणी ध्रुव के नजदीक दूर-दराज वाले क्षेत्र में है। सभी संक्रमितों को फिलहाल आइसोलेशन में रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक सब ने कोविड वैक्सीन की दोनों डोज लगवा रखी है और कोविड जांच के बाद ही निकले थे, लेकिन वहां पहुंचकर संक्रमित होने शुरू हो गए। दुनिया के इस दक्षिणतम हिस्से में कोरोना का पहला संक्रमण पहली लहर में दो साल पहले मिला था।

एक पोलर स्टेशन के करीब दो-तिहाई से ज्यादा सदस्य संक्रमित
अंटार्टिका में एक वैज्ञानिक रिसर्च बेस पर कोविड-19 का संक्रमण फैल गया है। इसकी वजह से प्रिंसेस एलिजाबेथ पोलर स्टेशन के करीब दो-तिहाई सदस्य कोविड पॉजिटिव हो गए हैं। यह रिसर्च स्टेशन दक्षिणी ध्रुव के बिल्कुल नजदीक एक बहुत ही दूर-दराज इलाके में है और वहां पर मौजूद सभी कर्मियों की दो-दो बार कोविड जांच की गई थी और उन्हें लाए जाने से पहले सबको क्वारंटाइन भी किया गया था। पहले मामले का पता बेल्जियम आउटपोस्ट पर 14 दिसंबर को चला। यह टीम उससे हफ्ते भर पहले ही दक्षिण अफ्रीका से होकर पहुंची थी। उसके बाद से एक के बाद एक करके लोग वायरस की चपेट में आते चले गए। 23 दिसंबर को कुल तीन संक्रमितों को वहां से अलग कर दिया गया, लेकिन संक्रमण की तादाद बढ़ती ही चली गई।

पोलर स्टेशन पर इमरजेंसी डॉक्टर मौजूद-रिपोर्ट
ली सॉयर की एक रिपोर्ट के मुताबिक टीम के सभी सदस्यों को वैक्सीन की दोनों डोज लगी हुई है और उनमें से किसी में भी गंभीर लक्षण नहीं दिख रहे हैं। स्टेशन पर दो इमरजेंसी डॉक्टर मौजूद हैं, जो गंभीर लक्षणों की स्थिति में इलाज कर सकते हैं और पीसीआर टेस्ट की भी पड़ताल कर सकते हैं। इंटरनेशनल पोलर फाउंडेशन के प्रोजेक्ट मैनेजर जोसेफ चीक ने बीबीसी से कहा है, 'परिस्थिति नाटकीय नहीं है।' उनके मुताबिक, 'हालांकि, वायरस की चपेट में आने वाले कुछ कर्मचारियों को क्वारंटाइन करने में असुविधा हुई है, लेकिन इससे स्टेशन पर हमारे काम पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।

बेल्जियम से दक्षिण अफ्रीका होते हुए पहुंची थी टीम
पोलर स्टेशन पर काम करने वाले लोगों को बेल्जियम से दक्षिण अफ्रीका के लिए निकलने से पहले निगेटिव टेस्ट रिपोर्ट दिखाना होता है। जबकि उसके बाद भी दक्षिण अफ्रीका में क्वारंटाइन रहकर अंटार्टिका के लिए रवानगी से पहले निगेटिव टेस्ट रिपोर्ट आना जरूरी होता है। गौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीका से ही अत्यधिक संक्रामक ओमिक्रॉन वेरिएंट का पहला मामला सामने आया है। अब जीरो एमिशन पोलर रिसर्च स्टेशन पर तब तक आने की पाबंदी लगा दी गई है, जब तक कि कोविड का प्रकोप थमता नहीं है।

स्टेशन पर नए लोगों के आने पर रोक
वैसे कर्मचारियों को पोलर स्टेशन छोड़ने का विकल्प दिया गया है, लेकिन उन्होंने वहीं पर रहने का फैसला किया है। चीक ने कहा है, 'स्टेशन के सभी निवासियों को 12 जनवरी को पहले से शेड्यूल फ्लाइट से जाने का मौका दिया गया था। लेकिन, उन सभी ने रहने और अपना काम जारी रखने का इरादा जताया।' लेकिन, इस इंफेक्शन के चलते स्टेशन पर नए लोगों के आगमन को रोक दिया गया है।

25 में से अबतक 16 कोविड पॉजिटिव
वैसे इस समय प्रिंसेस एलिजाबेथ पोलर स्टेशन पर कुल 25 सदस्य हैं, जिनमें से कोविड पॉजिटिव लोगों की तादाद 16 तक पहुंच चुकी है। बता दें कि कोरोना की पहली लहर में कोविड का संक्रमण पहुंचने वाला अंटार्टिका अंतिम महाद्वीप था, जहां पहला मामला दिसंबर, 2020 में सामने आया था। तब वहां मौजूद चीली के आर्मी बेस में लोग इस वायरस से संक्रमित हुए थे। अगले कुछ हफ्तों में 36 लोग इससे संक्रमित हुए थे। (तस्वीरें-फाइल )












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