सिंगापुर में पुरुषों के बीच यौन संबंध बनाना अब नहीं होगा अपराध, समलैंगिक शादी को लेकर फंसाया पेंच
LGBTQ समाज से जुड़े लोगों ने सरकार के समलैंगिक संबंधों को अपराध के दायरे बाहर लाने के निर्णय की सराहना की है, हालांकि संविधान में हुए संशोधन को उन्होंने निराशाजनक बताया है।
सिंगापुर की संसद ने आखिरकार पुरुषों के बीच यौन संबंध को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। सरकार ने इससे जुड़ा बिल संसद में पास कर दिया है। हालांकि सरकार ने अन्य देशों की तरह समलैंगिक विवाह को कानूनी बनाने के लए कोर्ट में याचिका दायर करने के रास्तों को भी सीमित कर दिया है। यानी कि अब LGBTQ+ समुदाय से जुड़े मुद्दों पर फैसला लेने का अधिकार न्यायपालिका नहीं बल्कि कार्यपालिका और विधायिका तय करेगी।

सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने बताया मील का पत्थर
सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सियन लूंग ने इस नए कानून को मील का पत्थर बताया और सभी पक्षों के संयम दिखाने की प्रशंसा की। इससे पहले सिंगापुर में गे को अपराध माना जाता था। इसके लिए ब्रिटिश औपनिवेशिक काल का कानून लागू था और यौन संबंध बनाने वाले पुरुषों को 2 साल तक की सजा हो सकती थी। हालांकि कानून को सक्रिय रूप से लागू नहीं किया गया था। LGBTQ+ समुदाय के प्रति भेदभावपूर्ण और लांछनकारी के रूप में कानून की लंबे समय से आलोचना की जा रही थी।

समलैंगिक शादी को सरकार ने दिया झटका
LGBTQ समाज से जुड़े लोगों ने सरकार के समलैंगिक संबंधों को अपराध के दायरे बाहर लाने के निर्णय की सराहना की है, हालांकि संविधान में हुए संशोधन को उन्होंने निराशाजनक बताया है। उन्होंने कहा कि इससे LGBTQ समाज के नागरिक, विवाह, परिवार और संबंधित नीतियों की परिभाषा जैसे मुद्दों पर कानूनी चुनौतियों का सामना नहीं कर पाएंगे। ये केवल कार्यपालिका और विधायिका द्वारा तय किए जाएंगे। सरकार ने संविधान में किए संशोधन का बचाव करते हुए कहा कि ऐसे मुद्दों पर निर्णय अदालतों के नेतृत्व में नहीं होने चाहिए। हम पारंपरिक, विषमलैंगिक पारिवारिक मूल्यों के साथ एक स्थिर समाज को बनाए रखने की और समलैंगिकों को अपना जीवन जीने एवं समाज में योगदान देने के लिए जगह देने की कोशिश करेंगे और संतुलन बनाए रखेंगे।

सरकार ने फैसले का किया बचाव
कानून और गृह मंत्री के. शनमुगम ने कहा कि विवाह की मौजूदा परिभाषा को संरक्षण की जरूरत है क्योंकि इसे खत्म करने से विषमलैंगिक ढांचे को भी चुनौती मिल सकती थी। उन्होंने कहा कि यदि विवाह की परिभाषा बदल दी जाती है, तो यह पारंपरिक ढांचे पर आधारित सभी सरकारी नीतियों को खतरे में डाल देगा। आवास और स्वास्थ्य सेवा के लिए सरकार द्वारा बनाई गई नीतियों पर भी इसका असर होने लगेगा। मंगलवार को बहस के अंत में मंत्री के. शनमुगम ने कहा कि इस कानून को निरस्त करना सही था क्योंकि ऐसी कोई सार्वजनिक चिंता नहीं है जो पुरुषों के बीच निजी सहमति से यौन संबंध को अपराध ठहराती हो।

विवाह की पारंपरिक परिभाषा समाज की आधारशिला
सामाजिक और पारिवारिक विकास मंत्री मसागोस जुल्किफली ने जोर देकर कहा कि समलैंगिक विवाह को शामिल करने के लिए विवाह की परिभाषा को बदलने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि समलैंगिक शादी को किसी भी सूरत में कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि विवाह की पारंपरिक परिभाषा समाज की आधारशिला है। समलैंगिक विवाह को इसमें शामिल कर इसे बदला नहीं जा सकता है।












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