Pakistan Army Act: पाकिस्तान में लागू हो गया है मॉर्शल लॉ? शहबाज शरीफ ने आर्मी एक्ट लगाने की दी मंजूरी

इमरान खान ने दावा किया है, कि उनके 7 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। तो क्या सभी के खिलाफ आर्मी एक्ट लगेगा, या फिर मुख्य निशाना सिर्फ इमरान खान हैं।

Pakistan Army Act

Pakistan Army Act: पाकिस्तान में इमरान खान के समर्थकों पर आर्मी एक्ट लगाने की मंजूरी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दे दी है। यानि, पाकिस्तान की शहबाज शरीफ की सरकार ने देश की कानून व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी सेना के हाथों में सौंप दी है।

तो क्या पाकिस्तान में अघोषित तौर पर सेना का शासन, जिसे मार्शल लॉ कहते हैं, वो लागू हो चुका है? आईये समझते हैं, कि आखिर आम नागरिकों के खिलाफ आर्मी की अदालत में मुकदमा चलाने की इजाजत देना क्यों खतरनाक है और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का ये फैसला लोकतंत्र की बुनियाद पर ही चोट क्यों है?

हालांकि, 76 साल के हो चुके पाकिस्तान में आज तक लोकतंत्र कभी सही स्थिति में नहीं रहा, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है, जब देश की एक बड़ी आबादी आर्मी के खिलाफ खड़ी हो गई है।

आम आदमियों पर आर्मी एक्ट का मतलब

बहुत साधारण शब्दों में समझें, तो पहली बात ये है, आर्मी कानून सेना के लिए होता है, जबकि सिविल कानून आम नागरिकों के लिए होता है। आम नागरिकों को आर्मी कानून के अंदर सुनवाई करने का मतलब ये हुआ, कि सिविल कोर्ट्स के पास इतनी ताकत नहीं बची है, कि वो किसी मामले की सुनवाई कर सके।

दूसरी बात, आम नागरिकों के खिलाफ आर्मी कोर्ट में मुकदमा चलने का मतलब है, कि देश की सरकार के पास ताकत नहीं है, कि वो किसी मामले की सुनवाई कर सके।

तीसरी बात ये, कि आर्मी कोर्ट में आम नागरिकों पर मुकदमा चलाने का मतलब ये है, कि आर्मी ने देश की कानून व्यवस्था को अपनी हाथों में ले लिया है, जो कि नागरिकों द्वारा चुनी गई सरकार के पास होता है।

शहबाज शरीफ ने क्या किया है?

मंगलवार को पाकिस्तान की नागरिक सरकार, यानि शहबाज शरीफ की सरकार ने सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ, जिसमें कोर कमांडर्स शामिल थे, उनके साथ एक बैठक की है। इस बैठक का नाम नेशनल सिक्योरिटी कमेटी (NSC) की बैठक था।

इस बैठक के दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सेना को इस बात की इजाजत दे दी, कि वो 9 और 10 मई को देश में भड़की हिंसा के लिए आरोपियों के खिलाफ आर्मी एक्ट और ऑफिसियल सेक्रेट एक्ट के तहत कार्रवाई कर सकती है।

यानि, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश की कानून व्यवस्था को अपने ही हाथों से उठाकर सेना के हाथों में रख दी है, जबकि उन्हें करना ये चाहिए था, कि वो सेना को कहते, कि आरोपियों को सजा दिलाने का काम सरकार का है और आर्मी अपना काम करे।

पाकिस्तानी अखबार डॉन ने लिखा है, कि आर्मी एक्ट के तहत आम नागरिकों पर मुकदमा चलाने के प्रस्तावित कदम की काफी आलोचना हो रही है और अलग अलग एक्टिविस्ट ग्रुप ने शहबाज शरीफ की आलोचना की है और इस एक्ट को आम नागरिकों के खिलाफ लगाने से परहेज करने के लिए कहा है।

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी आर्मी एक्ट को लेकर चिंता जताई है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है, कि पाकिस्तान में "सैन्य कानूनों के तहत नागरिकों पर मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए" क्योंकि सैन्य अदालतों में नागरिकों पर मुकदमा चलाना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।

इस बैठक में शहबाज शरीफ की पूरी कैबिनेट, यानि विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो-जरदारी, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह, कानून मंत्री आजम नजीर तरार, सूचना मंत्री मरियम औरंगजेब, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ तौकीर शाह भी मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी आम नागरिकों के खिलाफ आर्मी एक्ट लगाने के फैसले का विरोध नहीं किया।

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    इमरान खान का क्या होगा?

    आम नागरिकों पर आर्मी एक्ट लगाने का सीधा सा मतलब ये है, कि इमरान खान के खिलाफ भी आर्मी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा और अब उन्हें पाकिस्तान की सेना गिरफ्तार करेगी और सेना की अदालत में उनके खिलाफ मुकदमा चलेगा।

    यानि, इस बात की पूरी संभावना बन रही है, कि आने वाले कुछ हफ्तों या कुछ महीनों में इमरान खान को आर्मी की अदालत में जाना होगा। आर्मी एक्ट के तहत दोषियों को फांसी की सजा देने या उम्र कैद देने का प्रावधान होगा। आर्मी की अदालतों में सैन्य अधिकारियों का कोर्ट मार्शल होता है।

    यानि, बहुत संभावना है, कि कुछ महीनों की सुनवाई के बाद आर्मी सेंटर्स पर हमला करने के आरोप में इमरान खान को या तो फांसी या उम्र कैद की सुनाई जा सकती है। यानि, पाकिस्तान का एक और प्रधानमंत्री, आर्मी शासन की भेंट चढ़ने के लिए तैयार हो गया है।

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