'चीन ने पाकिस्तान को डिफॉल्ट होने से बचाया', IMF से कर्ज मिलने के बाद शहबाज शरीफ का बड़ा बयान
Pakistan China IMF: पाकिस्तान को आखिरकार कई महीनों तक चक्कर काटने के बाद अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से 3 अरब डॉलर का लोन मिल गया है और इसके साथ ही, पाकिस्तान के ऊपर से फिलहाल डिफॉल्ट होने का खतरा टल गया है। पाकिस्तान को 30 जून को आईएमएफ से लोन मिलने की बात कही गई, जब उसका आईएमएफ के साथ बेलऑउट पैकेज को लेकर समझौता खत्म हो रहा था।
आईएमएफ से 3 अरब डॉलर का कर्ज मिलने के बाद पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ ने इस प्रक्रिया में नकदी संकट से जूझ रहे देश की मदद करने के लिए चीन को धन्यवाद दिया है। शहबाज शरीफ ने कहा है, कि "इस अवधि के दौरान चीन ने पाकिस्तान को डिफॉल्ट से बचाया है।"

'चीन ने पाकिस्तान को बचाया'
30 जून को आईएमएफ ने घोषणा की, कि पाकिस्तान के साथ बेलऑउट पैकेज पर समय सीमा समाप्त होने से कुछ घंटे पहले 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्टैंडबाय समझौते पर कर्मचारी-स्तरीय समझौते पर पहुंच गए हैं। आईएमएफ से मिली यह धनराशि पाकिस्तान को कुछ राहत देगी, जो गंभीर भुगतान संतुलन संकट और गिरते विदेशी मुद्रा भंडार से जूझ रहा है।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि 3 अरब डॉलर के इस लोन से पाकिस्तान कुछ महीने तक ही सुकून से रह सकता है और उसके बाद उसके लिए डिफॉल्ट से बचने के करीब करीब सारे रास्ते बंद हो जाएंगे।
पाकिस्तान को आईएमएफ फंड से कुल 4 अरब डॉलर पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
नाथन पोर्टर के नेतृत्व में एक आईएमएफ टीम ने आईएमएफ स्टैंड-बाय अरेंजमेंट (एसबीए) के तहत पाकिस्तान के लिए एक नई वित्तपोषण भागीदारी पर चर्चा करने के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ व्यक्तिगत और आभासी बैठकें कीं थीं।
पाकिस्तान को कितनी बड़ी राहत
IMF के साथ हुआ ये समझौता पाकिस्तान के लिए बड़ी राहत है, हालांकि ये राहत कुछ ही महीनों के लिए है। फिलहाल के लिए पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर्स आ गये हैं।
आज जारी बयान में, आईएमएफ ने कहा है, कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को 2022 में विनाशकारी बाढ़ और यूक्रेन युद्ध जैसे कई झटकों का सामना करना पड़ा है, जिसने लाखों पाकिस्तानियों के जीवन को प्रभावित किया है और पाकिस्तान में महंगाई काफी बढ़ गई है।
इसके अलावा, पाकिस्तान सरकार के कुछ नीतिगत कदमों ने भी विदेशी मुद्रा भंडार को नुकसान पहुंचाया है। देश का आर्थिक विकास रूक गया है और आवश्यक वस्तुओं की कीमत काफी ज्यादा बढ़ गई है। आयात और व्यापार घाटे को कम करने के अधिकारियों के प्रयासों के बावजूद, विदेशी मुद्रा भंडार बहुत निचले स्तर तक गिर गया है।
Stand-by Arrangement क्या है?
आपको बता दें, कि पाकिस्तान और आईएमएफ Stand-by Arrangement के तहत इस समझौते पर पहुंचे हैं।
स्टैंड-बाय अरेंजमेंट (एसबीए) भुगतान संतुलन की समस्याओं का सामना करने वाले देशों को अल्पकालिक वित्तीय सहायता प्रदान करता है। जैसे पाकिस्तान को फौरन विदेशी कर्ज का भुगतान करना था और अगर वो नहीं कर पाता, तो फिर वो डिफॉल्ट हो जाता।
लिहाजा, पाकिस्तान ने आखिरी हफ्ते में स्टैंड-बाय अरेंजमेंट के तहत आईएमएफ से ऋण मांगा था।
पिछले कुछ वर्षों में एसबीए का चलन काफी बढ़ा है और आईएमएफ ने भी इसका इस्तेमाल संकट में फंसे देशों को अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर ज्यादा से ज्यादा उत्तरदायी और जवाबदेह बनाने के लिए किया है, ताकि वो आर्थिक संकट से बाहर निकल सकें।












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