डोकलाम और रोहिंग्या मुद्दे पर चर्चा के लिए बना संसदीय आयोग, राहुल गांधी भी हैं सदस्य

नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने डोकलाम और रोहिंग्या मुद्दे पर चर्चा के लिए एक आयोग का गठन किया है। इस आयोग की अध्यक्षता कांग्रेस सांसद शाशि थरूर करेंगे। कांग्रेस पार्टी उपाध्यक्ष भी इस आयोग के सदस्य होगें। यह आयोग देश में रह रहे रोहिंग्या मुस्लिमों और डोकलाम के मुद्दे पर चर्चा करेगा। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक संसदीय आयोग के सदस्य ने बताया है कि यह आयोग विदेश नीति से जु़ड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करेगा।

shashi tharoor panel will examined dokalam china rohingya issue

बता दें, विदेश सचिव एस जयशंकर ने इस साल जुलाई महिने में डोकलाम मुद्दे को लेकर आयोग के बारे में थोड़ी-बहुत जानकारी दी थी। इस साल संसदीय आयोग ने कई मुद्दों को चुना है उनमें से ये दो मुद्दे प्रमुख हैं। इस साल संसदीय आयोग एनआरआई को वोटिंग के अधिकार, यूपोपियन यूनियन के संकट से भारत का संबंध आदि मुद्दों पर चर्चा करेगा।

भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद का डिप्लोमेटिक लेवल पर हल निकाल लिया। इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच डिप्लोमेटिक लेवल पर 38 मीटिंग्स हुई थी। दोनों देशों की सेनाएं करीब 73 दिनों तक एक दूसरे के आमने-सामने रही थी। यह विवाद 16 जून को उस वक्त शुरू हुआ था जब चीन डोकलाम में सड़क बना रहा था। भारत में यह इलाका डोकलाम और चीन में डोंगलोंग कहलाता है।

रोहिंग्या मुस्लिमों का मामला- भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्या मुस्लिमों को देश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बताया था।

कौन हैं रोहिंग्या मुसलमान -म्यांमार में बौद्ध आबादी बहुसंख्यक है वहीं करीब 11 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं। इनके बारे कहा जाता है कि इनमें मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं और ये कई सालों से वहां रह रहे हैं। म्यांमार की सरकार ने उन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया है। पिछले पांच-छह सालों से वहां सांप्रदायितक हिंसा देखने को मिल रही है। इसके अलावा लाखों लोग बांग्लादेश में आ गए हैं। म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों को बड़े पैमाने पर भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है।

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क्यों हो रही है हिंसा-म्यांमार में बड़ी संख्या के रोहिंग्या मुसलमान जर्जर कैंपो में रह रहे हैं। उनकी हालत बहुत खराब है, उन्हें भेदभाव और दुर्व्यवार का सामना करना पड़ रहा है। कब शुरू हुई हिंसा- म्यांमार में साल 2012 से हिंसा हो रही है,लेकिन 25 अगस्त को म्यांमार में मौंगडोव सीमा पर कुछ पुलिस वालों की मौत हो गई, जिसके बाद वहां की सरकार ने व्यापक ऑपरेशन शुरू किया। कहा जा रहा है कि अभी तक 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। म्यांमार की सेना पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप भी लग रहे हैं।

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