बरगाम एयरपोर्ट पर कई मिलिट्री विमान उतरे, क्या तालिबान की मदद करने पहुंच गई है चीन की सेना?
बरगाम एयरबेस पर कई सैन्य विमान उतरने की खबर है और ऐसी संभावना है कि तालिबान की मदद करने के लिए चीन की सेना अफगानिस्तान पहुंच गई है।
काबुल, अक्टूबर 03: अफगानिस्तान में बगराम एयरबेस पर कई सैन्य विमानों के पहुंचने की रिपोर्ट आ रही हैं और बताया जा रहा है कि अमेरिका के द्वारा बरगाम एयरपोर्ट खाली करने के बाद अब चीन ने अपनी सेना को बरगाम एयरपोर्ट पर भेज दिया है, जो भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता की बात है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ घंटों में बरगाम एयरपोर्ट पर कई सैन्य विमानों के उतरने की खबर मिल रही है और सोशल मीडया पर कई ऐसी तस्वीरें आ रही हैं, जिसमें एयरबेस पर फ्लडलाइट्स दूर से ही जलते देखे जा रहे हैं।

बरगाम एयरबेस पर उतरी चीन की सेना
कई स्रोत बता रहे हैं कि बरगाम एयरबेस पर चीन के मिलिट्री विमान उचरे हैं और वो तालिबान की मदद करने के लिए अफगानिस्तान पहुंचे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के पास मिलिट्री विमानों को उड़ाने के लिए पायलट नहीं है, लिहाजा जिस तरह के एयरक्राफ्ट बरगाम एयरबेस पर उतरे हैं, वो निश्चित ही तालिबान के नहीं हैं। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि अफगानिस्तान के बरगाम एयरबेस पर चीन कब्जा कर सकता है और तालिबान बहुत खुशी के साथ चीन की मदद लेगा। वहीं चीन के स्टिमसन थिंक टैंक में चीन कार्यक्रम के निदेशक यून सन ने भी कहा था कि चीन बरगाम एयरबेस पर नियंत्रण हासिल करने में काफी दिलचस्पी लेगा।

जुलाई में अमेरिका ने किया था खाली
अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना ने जुलाई में रातोंरात बगराम हवाई अड्डे पर अपना मुख्य आधार छोड़ दिया था और फिर रोशनी बंद कर दी थी, लेकिन एक बार फिर से बगराम एयरपोर्ट पर ना सिर्फ फ्लडलाइट्स जलते देखे गये, बल्कि मिलिट्री प्लेन्स को उतरते देखा गया है। काबुल से लगभग एक घंटे की दूरी पर स्थित सैन्य हवाई क्षेत्र पर पहली बार सोवियत संघ ने अफगानिस्तान के अपने कब्जे के दौरान पहली बार बरगाम एयरबेस पर कब्जा किया था और फिर जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर आक्रमण किया था, तो अमेरिकी सैनिकों ने बरगाम एयरबेस को अपना ठिकाना बनाया था और अमेरिका अगले 20 सालों तक बगराम एयरबेस से ही ऑपरेशंस को अंजाम देता रहा।

बगराम एयरपोर्ट पर कब्जा क्यों चाहता है चीन?
यूएस न्यूज एंड वर्ल्ड रिपोर्ट के अनुसार, चीन बगराम एयरबेस में सैन्य कर्मियों और आर्थिक विकास अधिकारियों को भेजने पर विचार कर रहा है, और अपनी 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' को आगे बढ़ाने के लिए बरगाम एयरबेस से ऑपरेशंस को अंजाम देना चाहता है। माना जा रहा है कि बगराम एयरबेस पर चीन का कब्जा करने का ये कदम तालिबान के साथ संबंधों को मजबूत करने और अमेरिका को और शर्मिंदा करने की दिशा में लिया गया फैसला है। हालांकि, पिछले महीने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बगराम एयरपोर्ट पर कब्जा करने की रिपोर्ट का खंडन किया था। वांग वेनबिन ने पिछले महीने संवाददाताओं से कहा, "मैं सभी को बता सकता हूं कि यह पूरी तरह से गलत सूचना है।"

चीन के दावे पर शक ही शक
चीन के स्टिमसन थिंक टैंक में चीन कार्यक्रम के निदेशक यून सन को चीन के विदेश मंत्रालय के दावे पर गहरा शक है। उन्होंने कहा कि, "अपने पिछले अनुभव को देखते हुए, अमेरिका ने जो कुछ भी बेस पर छोड़ा है, उस पर चीनियों को कब्जा करने के लिए काफी उत्सुक होना चाहिए।" तालिबान लड़ाकों ने अमेरिका के पीछे हटने के बाद बगराम हवाई क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था, लेकिन तालिबान के पास ना ही ऐसे इंजीनियर हैं और नाही ऐसे मिलिट्री विशेषज्ञ हैं, जो एयरबेस पर फिर से बिजली बहाल कर सके या फिर बगराम एयरबेस को फिर से विमानों के संचालन लायक बना सके। वहीं, तालिबान ने इन रिपोर्ट्स को खारिज किया है कि बगराम एयरबेस पर चीन की मिलिट्री ने मौजूद है, लेकिन तालिबान ने ये भी साफ नहीं किया है कि बगराम एयरबेस पर जो मिलिट्री विमान हैं, वो किसके हैं और फ्लडलाइट्स किसने जलाए हैं?












Click it and Unblock the Notifications