अंतरिक्ष में चमत्कार! वैज्ञानिकों को मिला शीशे जैसा ग्रह, बादलों से होती है धातुओं की 'बारिश'
ब्रह्मांड अनंत है और वो अपने आप में बहुत सारे राज समेटे हुए है। अब इंसान तकनीकी रूप से काफी ज्यादा विकसित हो गए हैं, ऐसे में रोजाना अंतरिक्ष से जुड़ी नई-नई बातें पता चलती हैं। हाल ही में एक ऐसे ग्रह की खोज हुई, जो बड़ा ही अनोखा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खगोलविदों को एक नया ग्रह मिला है, जो एकदम शीशे की तरह है। ये अपनी ओर आने वाली 80 प्रतिशत रोशनी को वापस भेज देता है। अभी इस पर खोज जारी है, ऐसे में भविष्य में इसको लेकर और ज्यादा जानकारी मिल सकती है।

खगोलविदों के मुताबिक ये ग्रह पृथ्वी से 260 प्रकाश वर्ष से ज्यादा दूर है। यूरोप के एक्सोप्लैनेट-प्रोबिंग चेओप्स स्पेस टेलीस्कोप से जब अंतरिक्ष की जांच की जा रही थी, तो इसकी खोज हुई। खगोलविद शुरू में इसको देखकर हैरान रह गए। ये कांच की तरह काम कर रहा। इसका सूर्य जब इस पर रोशनी भेज रहा, तो ये 80 प्रतिशत तक उसे रिफ्लेक्ट कर दे रहा।
ये खोज एक्सोप्लैनेट को हमारे सौरमंडल के शुक्र ग्रह की तरह चमकदार बनाती है, जो चंद्रमा के बाद रात में सबसे चमकदार वस्तु है। आकार की बात करें, तो ये वरुण ग्रह के आकार के बराबर है। इसका मतलब है कि ये हमारे ग्रह से काफी ज्यादा बड़ा है। साथ ही 19 घंटे में अपने मूल तारे (सूर्य) की परिक्रम करता है। इसका नाम LTT9779b रखा गया है।
वहीं ये ग्रह अपने मूल तारे के बहुत ज्यादा करीब है, ऐसे में वहां का तापमान 2000 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। इससे ये भी साफ होता है कि ये जीवन योग्य नहीं है। साथ ही पानी वाले बादल निर्माण के लिए यहां पर अनुकूल माहौल नहीं है।
मामले में एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स जर्नल के को-राइटर विवियन पारमेंटियर ने बताया कि ये ग्रह वास्तव में एक पहेली की तरह है। आप जब बाथरूम में गर्म पानी से नहाते हैं, तो चारों ओर भाप जम जाती है। इस ग्रह पर भी वैसा ही होता है।
इस अनोखे ग्रह पर बादल सामान्य नहीं हैं, वहां पर मेटल के बादल हैं, जिससे टाइटेनियम की बूंदें बरसती हैं। यही मेटल के बादल ग्रह के लिए शीशे का काम करते हैं।












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