वैज्ञानिकों की सलाह- पृथ्वी को एस्टेरॉयड से बचाने के लिए करना होगा इस बम का इस्तेमाल
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर: अंतरिक्ष में बहुत से एस्टेरॉयड घूमते रहते हैं। कई बार वो पृथ्वी के बहुत करीब आ जाते हैं। अभी तक कोई बड़ा एस्टेरॉयड पृथ्वी की कक्षा में नहीं आया है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में ऐसा हो सकता है। इसके लिए खतरनाक एस्टेरॉयड की लिस्ट भी बनाई गई है। वहीं कुछ वैज्ञानिकों की टीम इस खतरे से बचने के लिए अभी से प्लान तैयार कर रही है, ताकि मुश्किल वक्त में पूरी तैयारी रहे। (तस्वीरें-सांकेतिक)

डायनासोरों के पतन की वजह थे एस्टेरॉयड?
दरअसल काफी वक्त से एस्टेरॉयड वैज्ञानिकों के लिए चिंताजनक बिषय रहे हैं। सब के मन में एक ही सवाल है कि अगर कोई बड़ा एस्टेरॉयड पृथ्वी से टकराया तो क्या होगा। उनकी चिंताएं निराधार नहीं हैं, क्योंकि अगले 100 साल में बहुत से एस्टेरॉयड हमारे बहुत ही पास से गुजरेंगे। इसके अलावा एक थ्योरी ये भी है कि एस्टेरॉयड के टकराने की वजह से लाखों वर्ष पहले डायनासोरों का पतन हुआ था। इसी वजह से बचने के तरीके तेजी से खोजे जा रहे हैं।
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परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल
एक्टा एस्ट्रोनॉटिका जर्नल में इस संबंध में एक रिसर्च प्रकाशित हुई है, जिसके प्रमुख लेखक लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी (एलएलएनएल) के पूर्व विद्वान पैट्रिक किंग हैं। उनका मानना है कि अगर कोई एस्टेरॉयड पृथ्वी के करीब आता है, तो परमाणु शक्ति के जरिए उस खतरे को टाला जा सकता है। इसके अलावा विभिन्न तरीकों का भी पता लगाया गया, जिसमें अलग-अलग क्षुद्रग्रह कक्षाएं और अलग-अलग टुकड़े वेग वितरण टुकड़ों को प्रभावित करने के लिए मिलकर काम करेंगे। हालांकि ये उतना आसान नहीं है, जितना लग रहा है।

पृथ्वी पर क्या पड़ेगा असर?
पैट्रिक किंग के मुताबिक एस्टेरॉयड की कक्षा का आंकलन सबसे बड़ी चुनौती है। अगर कोई दूसरा उपाय नहीं मिलता है, तो परमाणु बम के जरिए एस्टेरॉयड को पृथ्वी के पास आने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस कदम को उठाने के पहले ये भी देखना होगा कि इसका पृथ्वी और उस पर रहने वाले लोगों पर कितना नकारात्मक असर पड़ता है। किंग ने कहा कि उनके अध्ययन में परमाणु विस्फोट को अंतिम उपाय के रूप में बताया गया है, लेकिन अगर समय मिलता है तो वैज्ञानिक अन्य उपाय आजमाएंगे।

आमतौर पर होती हैं ये चीजें
वैसे ज्यादातर बड़े एस्टेरॉयड पृथ्वी की कक्षा से लाखों किलोमीटर की दूरी से निकल जाते हैं। कई बार छोटे आकर के उल्कापिंड पृथ्वी की कक्षा में आए हैं, लेकिन वो वायुमंडल में आते ही जलकर राख जा जाते हैं, जिस वजह से कोई नुकसान नहीं होता। बड़ा एस्टेरॉयड भी वायुमंडल में आते ही टूटेगा, लेकिन उसके टूकड़े इतने बड़े होंगे कि वो तबाही ला सकते हैं।
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