Saudi Deported Pak Baggers: पाक की इंटरनेशनल बेइज्जती, सऊदी ने वापस भगाए 4700 पाकिस्तानी भिखारी
Saudi Deported Pak Baggers: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की एक बार फिर से इंटरनेशनल बेइज्जती हुई है। दरअसल अलग-अलग तरह से फर्जी वीजा का जुगाड़ कर सऊदी अरब गए 4700 से अधिक पाकिस्तानी नागरिकों को अवैध रूप से भीख मांगने के आरोप में सऊदी अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार कर वापस पाकिस्तान डिपोर्ट कर दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने सियालकोट में आयोजित एक कार्यक्रम में इस बात की जानकारी दी है। हालांकि इस दौरान उनके चेहरे पर शर्मिंदगी की शिकन की एक लकीर भी ना दिखी। इसके अलावा पूछे जाने पर भी मंत्री महोदय ने ज्यादा जानकारी नहीं दी। लेकिन पाकिस्तान के अखबार द डॉन ने इस मामले पर डिटेल में बताया कि पाकिस्तानी भिखारियों ने भीख मांगकर सऊदी में कितने पैसे बनाए और उनसे पाकिस्तान में क्या-क्या खरीदा। साथ ही द डॉन ने ये भी बताया कि पाकिस्तान में कितने भिखारी हैं और वे कितनी कमाई कर रहे हैं।
पाकिस्तान की जीडीपी में भिखारियों का योगदान
द डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में करीब 2.2 करोड़ भिखारी हैं, जो हर साल तकरीबन 42 अरब पाकिस्तानी रुपए भीख मांगकर इकठ्ठा कर लेते हैं। इस कमाई से जो भिखारी हवाई यात्रा, वीजा और होटल का किराया देने लायक पैसे बना लेता है वो दूसरे देश भीख मांगने के लिए निकल जाता है। और इसी वजह से विदेशों में पाकिस्तान भिखारियों की बढ़ती संख्या पाक की साख पर बट्टा लगा रही है। वहीं इस मामले के सामने आने पर मोहम्मद ने ये भी बयान दिया कि पाकिस्तान की सरकार देश की गिरी हुई अर्थव्यवस्था को उठाने की कोशिश कर रही है। जिसमें उन्होंने पाकिस्तान को 2035 तक 100 अरब डॉलर की निर्यात करने वाली अर्थव्यवस्था बनाने की बात कही, हालांकि वो बात अगल है कि उसके अभी पासिंग मार्क्स नहीं आ पा रहे हैं। क्योंकि वर्तमान में पाकिस्तान बमुश्किल 30 अरब डॉलर तकरीबन साढ़े आठ खरब (8,44,35,00,00,000) पाकिस्तानी रुपए का ही निर्यात कर पाता है। जबकि इसकी तलुना में पाकिस्तानी भिखारी 42 अरब पाकिस्तानी रुपए तकरीबन 14.9 मिलियन डॉलर रुपए कमा लेते हैं। जो कि अच्छी खासी रकम है। इससे पाकिस्तान की जीडीपी में भी सहयोग जरूर मिलता होगा।

पाकिस्तान में करोड़ों भिखारी
पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने पिछले साल वहां की संसद को बताया था कि सऊदी अरब ने 2024 तक पिछले तीन सालों में 4,000 पाकिस्तानी भिखारियों को गिरफ्तार कर वापस पाकिस्तान भेजा है। सऊदी अरब में भीख मांगने के खिलाफ सख्त कानून हैं। इन कानूनों के तहत भिखारियों को जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है। पाकिस्तान के कई भिखारी सऊदी की जेलों में बंद हैं और जैसे ही उनकी सजा पूरी होती है, सऊदी सरकार उन्हें पाकिस्तान डिपोर्ट कर देती है।
पाकिस्तानी भिखारियों से अरब देश त्रस्त
FIA के एक अधिकारी ने बताया कि विदेशों में ज्यादातर पाकिस्तानी भिखारी दक्षिणी पंजाब, कराची और सिंध के ग्रामीण या सुदूर क्षेत्रों से हैं। पाकिस्तान वापस आने पर भिखारियों के नाम एफआईए इमिग्रेशन की पासपोर्ट कैंसिलेश लिस्ट (पीसीएल) में जोड़ दिए गए हैं, ताकि ये दोबारा पाकिस्तान से बाहर जाकर बेज्जती ना करवा सकें। क्योंकि पाकिस्तान सरकार के सामने दूसरे देशों में जाकर भीख मांग रहे भिखारी आज से नहीं बल्कि पहले से ही एक बड़ी समस्या रही है। सऊदी के अलावा यूएई में भी पाकिस्तानी भिखारियों की दहशत का आलम जिंदा है। यूएई सरकार भी समय-समय पर इनके खिलाफ कार्रवाई करती रहती है लेकिन ये समस्या वहां आज भी बनी हुई है। यही हाल बाकी के अरब देशों जैसे कि कतर, ईरान, इजिप्ट, यमन, कुवैत और लीबिया का भी है। ये देश भी पाकिस्तानी भिखारियों से त्रस्त हो चुके हैं।
पाक कि वैश्विक साख पर बट्टा मलते भिखारी
वैश्विक स्तर पर देश की छवि को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए पाक सरकार ने हालिया महीनों में ऐसे हजारों लोगों का पासपोर्ट सस्पेंड किया है, जो विदेशों में जाकर भिखारी बन गए। खासतौर से अरब देशों में पकड़े जाने वाले भिखारियों में ज्यादातर पाकिस्तानी मूल के हैं। इसका असर ये हुआ है कि सऊदी अरब देशों ने पाकिस्तानी सरकार से भिखारियों की आमद को रोकने तक के लिए अब तो पाकिस्तान सरकार के ही हाथ जोड़ लिए हैं।
क्यों पाकिस्तानी नागरिक बनते हैं अरब में भिखारी?
पाकिस्तान के सामने अपने नागरिकों को नौकरी देने की एक बड़ी समस्या है। जैसे भारत में ज्यादातर लोग इंजीनियर, डॉक्टर, साइंटिस्ट, एआई इंजीनियर, बिजनेसमेन या फिर आईएस-आईपीएस बनने की इच्छा रखता है वैसे ही पाकिस्तान में इसके उलट उनके पास रोजगार के नाम पर ड्रीम जॉब आर्मी की होती है। अब सब तो आर्मी में जा नहीं सकते और पाकिस्तान के बाकी धंधों जैसे कि सूत, आईटी, टेलेकॉम, मसाले, आदि में इतना दम है नहीं कि एक बड़ी युवा भीड़ को रोजगारशुदा कर सके। लिहाजा इनके पास विदेश जाकर काम-धंधा ढूंढने के अलावा विकल्प बचता नहीं है। ऐसे में ये भीड़ अरब देशों रुख करती है और वहां पर मजदूरी करना शुरू कर देती है। जिनको मजदूरी भी नहीं मिलती वे भीख मांगना शुरू कर देते हैं. चूंकि एक सऊदी रियाल की कीमत पाकिस्तान में 75 रुपए होती है तो इससे एक डिसेंट अमाउंट की कमाई हो जाती है। इसी कारण पाकिस्तान जवान से लेकर बुजुर्ग भिखारियों की फैक्ट्री बनकर दुनिया के नक्शे पर आया है।
कब-कितने पाकिस्तानी भिखारियों को भेजा वापस?
इसी साल फरवरी में 10 पाकिस्तानी भिखारियों को मक्का में पकड़ा गया था और ये सभी उमराह के वीजा पर गए थे। उमराह मुस्लिमों का दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ है जिसके लिए दुनिया भर से मुस्लिम मक्का जाते हैं। इसके पहले दिसंबर 2024 में भी सऊदी ने पाकिस्तान के 4300 लोगों को नो फ्लाई लिस्ट में डलवाया था। वहीं दिसंबर 2023 में 16 पाकिस्तानी भिखारियों को भीख मांगते हुए अरेस्ट किया था। देखा जाए तो पाकिस्तानी भिखारियों का दूसरे देशों में इतहास पुराना है और अब तो खुद पाकिस्तान भी इसे मान चुका है।
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