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इजराइल से दोस्ती के लिए भारी कीमत वसूलने के मूड में प्रिंस सलमान, सऊदी अरब अमेरिका को क्या संकेत भेज रहा?

Saudi Arabia-Israel Tie: 7 अक्टूबर को दक्षिणी इजराइल में किए गये हमास के हमले से कुछ हफ्ते पहले सऊदी अरब ने कहा था, कि वह यहूदी राज्य इजराइल के साथ राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाने के करीब पहुंच रहा है।

तीन महीने के युद्ध के बावजूद, जिसमें 23,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं और अरब दुनिया उबल रही है, उसके बाद भी सऊदी अरब यही संकेत दे रहा है, कि इजराइल को वो अभी भी मान्यता देने के अपने फैसले से पीछे नहीं हटा है।

Saudi Arabia-Israel Tie

सऊदी अरब और इजराइल सहित पूरे मध्य पूर्व में शटल कूटनीति के एक और दौरे पर, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने पिछले हफ्ते कहा था, कि इजराइल-सऊदी अरब के संबंधों में सामान्यीकरण वार्ता अभी भी जारी है और "उसे आगे बढ़ाने में क्षेत्र में स्पष्ट तौर पर दिलचस्पी है।"

एंटनी ब्लिंकन ने इजराइल जाने से ठीक पहले सऊदी अरब में संवाददाताओं से कहा, कि "एकीकरण के संबंध में, सामान्यीकरण के संबंध में, हां, हमने वास्तव में हर पड़ाव पर इस बारे में बात की, जिसमें निश्चित रूप से यहां सऊदी अरब भी शामिल है।" उन्होंने आगे कहा "और मैं आपको यह बता सकता हूं, कि इसे (रिश्तों में सामान्यीकरण) आगे बढ़ाने में यहां स्पष्ट रुचि है। यह रुचि अभी भी मौजूद है, यह वास्तविक है, और यह परिवर्तनकारी हो सकती है।"

मंगलवार को बीबीसी को दिए गये एक इंटरव्यू में यूनाइटेड किंगडम में सऊदी अरब के राजदूत प्रिंस खालिद बिन बंदर ने कहा, कि संबंधों को सामान्य बनाने में "निश्चित रूप से रुचि है"। उन्होंने कहा, कि "1982 से ही इसमें दिलचस्पी रही है।"

दोस्ती के एवज में भारी कीमत वसूल सकता है सऊदी

सऊदी अरब की तरफ से साफ कर दिया गया है, कि गाजा युद्ध के बाद भी वो इजराइल के साथ रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अगर सऊदी अरब, इजराइल से रिश्तों को सामान्य करता है, तो सऊदी अरब अब जो कीमत वसूलेगा, वो गाजा युद्ध शुरू होने से पहले की कीमत से काफी ज्यादा होगी, क्योंकि अब रियाद, संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल से काफी ज्यादा रियायतें मांग सकता है।

हालांकि, सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय की तरफ से इस बाबत फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की गई है।

सीएनएन की एक रिपोर्ट में सऊदी अरब के लेखक और विश्लेषक अली शिहाबी ने कहा है, कि "सऊदी सरकार अभी भी इस शर्त पर सामान्यीकरण के लिए तैयार है, कि इज़राइल दो-राज्य समाधान की नींव बनाने के लिए जमीन पर ठोस कदम उठाए। उदाहरण के लिए, गाजा से नाकाबंदी को पूरी तरह से हटाना, गाजा और वेस्ट बैंक में पीए (फिलिस्तीनी प्राधिकरण) को पूरी तरह से सशक्त बनाना और वेस्ट बैंक में प्रमुख क्षेत्रों से इजराइली सैनिकों वापसी।"

शिहाबी ने कहा, कदम "ठोस होने चाहिए न कि खोखले वादे, जिन्हें इज़राइल सामान्यीकरण के बाद भूल सकता है, जैसा कि इजराइल ने कई अन्य देशों से रिश्तों को सामान्य होने के बाद किया है।"

वहीं, एंटनी ब्लिंकन ने गाजा में अभी भी युद्धविराम का आह्वान नहीं किया, लेकिन उन्होंने कहा, कि मध्य पूर्व में इजरायल के आगे एकीकरण के लिए "गाजा में संघर्ष समाप्त करना" और साथ ही फिलिस्तीनी राज्य के लिए "व्यावहारिक मार्ग" प्रशस्त करना आवश्यक होगा।

वहीं, फिलिस्तीनी, इजराइल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक, पूर्वी येरुशलम और गाजा में एक स्वतंत्र राज्य चाहते हैं। अधिकांश मुस्लिम और अरब देशों ने ऐसा राज्य स्थापित होने तक इज़राइल को मान्यता देने से इनकार कर दिया है।

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अलग फिलीस्तीन पर क्या सोचता है इजराइल?

इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अन्य इजरायली अधिकारियों ने बार-बार फिलिस्तीनी राज्य की संभावना को खारिज कर दिया है। पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था, कि इजरायली सरकार "दो-राज्य समाधान नहीं चाहती है।"

2020 में, चार अरब देशों, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को और सूडान ने फिलीस्तीनी राज्य की लंबे समय से चली आ रही अरब मांग को दरकिनार करते हुए, इब्राहीम अकॉर्ड के रूप में जानी जाने वाली संधियों के एक सेट के तहत इज़राइल को मान्यता दे दी थी। तब से, बाइडेन प्रशासन व्यापक रूप से मुस्लिम दुनिया के नेता के रूप में माने जाने वाले सऊदी अरब को अपने साथ लाने के लिए काम कर रहा है, एक ऐसा कदम जो अन्य मुस्लिम देशों के लिए इज़राइल को मान्यता देने का द्वार खोल सकता है।

अगर सऊदी अरब की तरफ से इजराइल को मान्यता मिल जाती है, तो फिर दर्जनों मुस्लिम देश इजराइल के लिए अपने घर का दरवाजा खोल सकते हैं।

जब यूएई ने इजराइल को मान्यता दी थी, तो अब्राहम अकॉर्ड के वास्तुकार समझे जाने वाले उस समय संयुक्त अरब अमीरात के राजदूत यूसुफ अल ओतैबा ने दो-राज्य समाधान की व्यवहार्यता पर जोर दिया था, लेकिन इजराइल ने उसे अभी तक नहीं माना है।

यूएई और इजराइल के बीच जो संधि हुई थी, उसमें कब्जे वाले वेस्ट बैंक में हिंसा रोकना, दो राज्य समाधान की संभावना को बनाए रखना शामिल था, जाहिर है इजराइल ने ऐसा कुछ भी नहीं माना है।

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इजराइल पर क्या सोचते हैं प्रिंस सलमान

इजराइल के साथ रिश्तों के सामान्यीकरण के लिए सऊदी अरब की आवश्यकताओं के बारे में पूछे जाने पर, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) ने सितंबर में फॉक्स न्यूज को बताया था, कि उन्हें उम्मीद है, कि यह समझौता "ऐसी जगह पहुंचेगा जो फिलिस्तीनियों के जीवन को आसान बना देगा।"

प्रिंस सलमान का उस वक्त का बयान, सऊदी अरब के लिए मजबूत अमेरिकी सुरक्षा गारंटी के साथ-साथ राज्य के नागरिक परमाणु कार्यक्रम में अमेरिकी मदद पर केंद्रित थी।

लेकिन, 7 अक्टूबर को इजराइल और हमास के बीच शुरू हुए युद्ध ने पूरी स्थिति को बदल दिया है।

वाशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी द्वारा 14 नवंबर से 6 दिसंबर तक किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया है, कि 1,000 सउदी अरब लोगों में से 96% ने कहा, कि उनका मानना ​​है कि "अरब देशों को तुरंत इजराइल के साथ सभी राजनयिक, राजनीतिक, आर्थिक और किसी भी अन्य प्रकार के संपर्क को तोड़ देना चाहिए।"

वहीं, अमेरिका भी इजराइल के ऊपर लगातार दो राज्य समाधान के लिए दबाव बना रहा है, जिससे लगने लगा है, कि इजराइल-सऊदी अरब सामान्यीकरण वार्ता एक बार फिर फिलिस्तीनी अधिकारों को प्राथमिकता दे रही है।

मिडिल ईस्ट मामलों के एक और एक्सपर्ट और ऑउटरीच के सीनियर फेलो और डायरेक्टर फिरास मकसाद का कहना है, कि "गाजा की लड़ाई के बाद सऊदी अरब के लोग भड़के हुए हैं, इसलिए रिश्तों में सामान्यीकरण के लिए रियाद को अमेरिका और इजराइल से काफी रियायतों की जरूरत होती, जिसमें संभवत: एक अस्थायी फिलिस्तीनी राज्य का निर्माण भी शामिल है।"

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में सऊदी अरब के राजदूत प्रिंस खालिद ने कहा, "हम अभी भी, 7 अक्टूबर के बाद भी आगे बढ़ते हुए, सामान्यीकरण में विश्वास करते हैं, लेकिन यह फिलिस्तीनी लोगों की कीमत पर नहीं होगा।" उन्होंने इज़राइल के साथ सामान्यीकरण समझौते में फिलिस्तीनियों को किसी भी स्थिति में "प्रमुख तत्व" बताया। उन्होंने कहा, कि "यह सऊदी अरब-इजरायल शांति योजना नहीं है, बल्कि यह फिलिस्तीनी-इजरायल शांति योजना है।"

यह पूछे जाने पर, कि क्या हमास भविष्य में किसी फिलिस्तीनी राज्य का हिस्सा होगा, राजदूत ने इस संभावना से इंकार नहीं किया और कहा, "इसके लिए बहुत विचार, बहुत काम करने की आवश्यकता है... यदि आपके पास आशावाद और आशा है, तो बदलाव की हमेशा गुंजाइश है।"

जल्दबाजी के मूड में नहीं है सऊदी अरब

हालांकि, मकसाद का मानना है, कि इजराइल के साथ रिश्तों को सामान्य करने के लिए सऊदी अरब फिलहाल कोई जल्दबाजी के मूड में नहीं दिख रहा है और सही समय का इंतजार किया जा रहा होगा।

वहीं, सऊदी अरब और इजराइल के बीच रिश्ते को सामान्य करवाना, अमेरिका की प्रमुख नीतिगत मकसद बन चुका है। और इसका सबसे बड़ा उदाहरण जो बाइडेन हैं।

राष्ट्रपति बनने के बाद जो बाइडेन ने कसम खाई थी, कि वॉशिंगटन पोस्ट के कॉलमगार जमाल खशोगी की हत्या के लिए प्रिंस सलमान जिम्मेदार हैं और उन्हें कानून के सामने लाया जाएगा, लेकिन इजराइल के साथ रिश्तों को सामान्य करने के संकेत मिलने के बाद जो बाइडेन ने अपने कसम को पीछे छोड़ दिया।

अगर बाइडेन प्रशासन, सऊदी अरब और इजराइल के बीच के रिश्ते को सामान्य करवा देता है, तो फिर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में इसे सबसे बड़ा चुनावी कैम्पेन बनाया जाएगा, क्योंकि ये सबसे बड़ी विदेश नीति की जीत होगी।

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