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सऊदी अरब में 26 साल के लड़के को सजा-ए-मौत, फोन में मिली थी सरकार विरोधी प्रदर्शन की तस्वीर

सऊदी अरब किंगडम ने 26 साल के लड़के को फांसी देकर अपने उस वादे को तोड़ने का काम किया है, जिसमें उसने विश्व से वादा किया था कि वो कम उम्र के लोगों को मौत की सजा नहीं देगा।

रियाद, जून 16: सऊदी अरब ने कल 26 साल के एक लड़के को फांसी की सजा दे दी। सऊदी सरकार ने कहा कि 26 साल के लड़के मुस्‍तफा अल-दरविश के फोन पर आपत्तिजनक तस्वीर पाई गई थी, इसीलिए उसे फांसी की सजा दी गई है। 26 साल के लड़के को फांसी की सजा से बचाने की कई बार कोशिश की गई और दुनियाभर से सऊदी सरकार पर दवाब बनाया गया था, लेकिन सऊदी अरब सरकार ने किसी की भी बात नहीं मानी और रिपोर्ट के मुताबिक कल 26 साल के लड़के को मौत की सजा दे दी गई।

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    26 साल के लड़के को फांसी

    26 साल के लड़के को फांसी

    सऊदी अरब किंगडम ने 26 साल के लड़के को फांसी देकर अपने उस वादे को तोड़ने का काम किया है, जिसमें उसने विश्व से वादा किया था कि वो कम उम्र के लोगों को मौत की सजा नहीं देगा। रिपोर्ट के मुताबिक 26 वर्षीय मुस्तफा अल-दरविश को फांसी की सजा सिर्फ इसलिए दी गई है, क्योंकि उसने अपने फोन में सरकार के खिलाफ किए गये विरोध प्रदर्शन की तस्वीर को रखा था, जो सऊदी सरकार के लिए आपत्तिजनक था। रिपोर्ट के मुताबिक मुस्तफा अल-दरविश ने 2011-2012 में सऊदी सरकार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और उस वक्त उसकी उम्र सिर्फ 17 साल थी।

    17 की उम्र में गिरफ्तारी

    17 की उम्र में गिरफ्तारी

    सऊदी अरब सरकार ने जब मुस्तफा अल-दरविश को गिरफ्तार किया था, उस वक्त उसकी उम्र सिर्फ 17 साल थी और उसने उस वक्त सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। दरअसल, 2011-12 में सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में शिया मुस्लिमों के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और 2015 में उसे सऊदी सरकार ने गिरफ्तार कर लिया था। सऊदी सरकार लगातार वैश्विक समुदाय से कह रही थी कि अब वो उन लोगों को मौत की सजा नहीं देगा, जिन्होंने नाबालिग अवस्था में किसी अपराध को अंजाम दिया हो, लेकिन मुस्तफा अल-दरविश पर सऊदी सरकार ने कोई रहम नहीं की और उसे फांसी पर लटका दिया गया।

    मुस्तफा अल-दरविश का कसूर

    मुस्तफा अल-दरविश का कसूर

    2015 में मुस्तफा अल-दरविश को गिरफ्तार करने के बाद उसे क्रूरता के साथ टॉर्चर किया गया था लेकिन, बाद में 20 साल की उम्र में उसे सऊदी सरकार ने रिहा कर दिया था। मुस्तफा अल-दरविश को भले ही रिहा कर दिया गया लेकिन, सऊदी प्रशासन ने उसके फोन को जब्त कर लिया था। मुस्तफा अल-दरविश के फोन में पुलिस को विरोध प्रदर्शन के दौरान की एक तस्वीर मिली, जिससे सऊदी सरकार बुरी तरह से नाराज हो गई और फिर से मुस्तफा अल-दरविश को गिरफ्तार कर लिया गया। मुस्तफा अल-दरविश के माता-पिता के मुताबिक सऊदी प्रशासन मुस्तफा अल-दरविश को बुरी तरीके से टॉर्चर करता था, उससे बेरहमी से मार-पीट की जाती थी और उसे अलग अलग जेलों में रखा जाता था।

    मुस्तफा अल-दरविश को फांसी

    मुस्तफा अल-दरविश को फांसी की सजा से बचाने के लिए यूरोपीयन देशों ने सऊदी सरकार से कई बार अपील की। मानवाधिकार संगठनों ने भी सऊदी सरकार से मुस्तफा अल-दरविश को माफ कर देने की अपील की, लेकिन सऊदी सरकार ने किसी की भी बात नहीं मानी। रिपोर्ट के मुताबिक मुस्तफा अल-दरविश ने पुलिस की मारपीट के दौरान अपना गुनाह कबूल किया था और कोर्ट में उसने कहा था कि पुलिसिया टॉर्चर से बचने के लिए उसने अपना गुनाह कबूल किया था। करीब 6 सालों तक मुस्तफा अल-दरविश को सऊदी के अलग अलग जेलों में रखा गया और फिर उसे फांसी पर लटका दिया गया। वहीं, मुस्तफा अल-दरविश को फांसी देने से पहले उसके परिवारवालों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई। परिवारवालों को मुस्तफा अल-दरविश की मौत की खबर एक न्यूज पोर्टल के वेबसाइट से मिली।

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