अमेरिकी धमकियों के बीच भारत आ रहे हैं सऊदी अरब क्राउन प्रिंस सलमान, जानिए एजेंडे में क्या होगा?

भारत भी कोविड लॉकडाउन खत्म होने के बाद सऊदी अरब से तेल प्रोडक्शन बढ़ाने की मनुहार करता रहा है, लेकिन सऊदी ने भारत की बात नहीं मानी, लिहाजा अब दोनों देशों के किसी समझौते पर पहुंचने की उम्मीद है।

Saudi Arab India Tie: सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अगले महीने इंडोनेशिया में जी20 शिखर सम्मेलन में शिरकत करने से पहले भारत के दौरे पर आ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस 14 नवंबर को भारत में कुछ ही घंटे रूकेंगे, लेकिन उनका ये दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मोहम्मद बिन सलमान कुछ घंटे भारत में रूकने के बाद 15-16 नवंबर को जी20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इंडोनेशिया के बाली शहर प्रस्थान कर जाएंगे। इसी महीने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जेद्दा में सऊदी क्राउन प्रिंस से मुलाकाक भी की थी और उन्हें भारत आमंत्रित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का संदेश सौंपा था।

भारत दौरे पर आएंगे सऊदी क्राउन प्रिंस

भारत दौरे पर आएंगे सऊदी क्राउन प्रिंस

'द हिन्दू' की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया है कि, सऊदी क्राउन प्रिंस की भारत यात्रा से पीएम मोदी को 10 सदस्यीय दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) और कंबोडिया में 18 सदस्यीय देशों वाले पूर्वी एशियाई शिखर सम्मेलन (ईएएस) के नेताओं की बैठक में उपस्थिति को लेकर संदेह हो सकता है, क्योंकि ये समय आपस में मिल रहे हैं। लेकिन, माना जा रहा है, कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सऊदी क्राउन प्रिंस के बीच ऊर्जा को लेकर काफी अहम बातचीत हो सकती है। अमेरिका की तरह भारत भी चाहता है, कि सऊदी अरब अपने तेल उत्पादन में वृद्धि करे, लिहाजा दोनों नेताओं की इस बैठक में ऊर्जा समस्या को लेकर अहम फैसले लिए जा सकते हैं। तेल प्रोडक्शन में कटौती करने को लेकर ही अमेरिका सऊदी अरब से नाराज है और बाइडेन ने तो सऊदी अरब के साथ रिश्ते को पुनर्मुल्यांकन तक की बात कह दी है। लिहाजा, यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया में बने नये हालात के बीच सऊदी क्राउन प्रिंस और पीएम मोदी के बीच की ये मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

क्या भारत की मांगों को मानेंगे प्रिंस सलमान?

क्या भारत की मांगों को मानेंगे प्रिंस सलमान?

दरअसल, पहले कोविड और फिर यूक्रेन युद्ध को देखते हुए तेल उत्पादन को लेकर बनी वैश्विक समूह ओपेक प्लस ने इसी महीने खत्म हुई बैठक में तेल कटौती की घोषणा की है, लिहाजा वैश्विक राजनीति में इसका गहरा असर पड़ा है और अमेरिका ने तो सऊदी अरब को 'अंजाम भुगतने' तक की धमकी दे दी है, जिसका अरब देशों में विरोध किया गया है। वहीं, भारत भी कोविड लॉकडाउन खत्म होने के बाद सऊदी अरब से तेल प्रोडक्शन बढ़ाने की मनुहार करता रहा है, लेकिन सऊदी ने भारत की बात नहीं मानी। जिसके बाद भारत ने सऊदी की जगह वेनेजुएला और इराक से ज्यादा मात्रा में तेल खरीदना शुरू कर दिया और भारत ने दो सालों के भीतर सऊदी से तेल खरीदने में काफी कटौती का लक्ष्य भी रखा है। भारत का कहना है, कि सऊदी के तेल उत्पादन में कटौती का भारत पर गंभीर असर पड़ता है और तेल की कीमत बढ़ जाती है। लिहाजा, माना जा रहा है, कि प्रिंस सलमान और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऊर्जा समस्या को लेकर किसी समझौते की तरफ बढ़ सकते हैं।

करीब आए हैं भारत-सऊदी अरब

करीब आए हैं भारत-सऊदी अरब

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने अरब देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने की तरफ काफी ध्यान दिया है और इसका नतीजा ये हुआ है, कि एक तरह जहां संयुक्त अरब अमीरात और भारत, व्यापार क्षेत्र में काफी आगे निकल गये हैं, वहीं सऊदी के साथ भी भारत ने कई अहम समझौते किए हैं। सऊदी क्राउन प्रिंस के नई दिल्ली दौरे के दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय परियोजनों को लेकर समीक्षा बैठक होगी। प्रिंस सलमान ने 2019 में भारत दौरे के दौरान 100 अरब डॉलर की निवेश का वादा किया था, जिसमें तेल भंडार और ग्रीन एनर्जी परियोजनाएं शामिल हैं, उनकी प्रगति को लेकर समीक्षा की जाएगी। वहीं, द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2016 और 2019 में दो बार रियाद का दौरा किया था, और कई समझौता ज्ञापनों और परियोजनाओं की भी घोषणा की थी, उनकी भी समीक्षा की जाएगी। आपको बता दें कि, सऊदी अरब ने साल 2020 में जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी और अगले साल भारत इसकी मेजबानी करेगा, लिहाजा दोनों देशों के बीच होने वाली बैठक में जी-20 के एजेंडे को लेकर भी चर्चा की जाएगी।

आसियान में शामिल नहीं होंगे पीएम मोदी?

आसियान में शामिल नहीं होंगे पीएम मोदी?

वहीं, अब इस बात को लेकर शक है, कि प्रधानमंत्री मोदी 10 नवंबर से 13 नवंबर के बीच हो रहे आसियान- भारत सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगे। हालांकि, आसियान के एक डिप्लोमेट ने कहा है कि, उन्हें उम्मीद है, कि पीएम मोदी अपने व्यस्त कार्यक्रम में से आसियान के लिए भी वक्त निकालेंगे। आसियन-भारत पार्टनरशिप इस साल 30वीं वर्षगांठ भी मना रहा है, लिहाजा कंबोडिया में इस सम्मेलन को लेकर खास तैयारियां की जा रही हैं। इस साल भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आसियान-भारत विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी भी की थी। जबकि ऑस्ट्रेलिया और चीन को 2021 में सीएसपी (कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटजिक पार्टनर्स) नामित किया गया था, इस साल आसियान के साथ अमेरिका और भारत के संबंधों को एडवांस किए जाने की संभावना है। पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में आसियान देशों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, न्यूजीलैंड, कोरिया गणराज्य, रूस और यू.एस के नेता भी शामिल होंगे।

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