सऊदी अरब की बड़ी उड़ान, पहली बार महिला एस्ट्रोनॉट को अंतरिक्ष में भेजेंगे मोहम्मद बिन सलमान
इससे पहले 1985 में, सऊदी शाही राजकुमार सुल्तान बिन सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़, जो एक एयरफोर्स पायलट थे, वो अमेरिका की मदद से अंतरिक्ष की यात्रा कर पहले अरब मुस्लिम बने थे।

Saudi Arab News: सऊदी अरब के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान, जब से देश में केन्द्रीय भूमिका में आए हैं, तब देश वो लगातार कट्टरपंथी विचारधार को किनारे कर रहे हैं। सऊदी अरब, मुस्लिम देशों का केन्द्र रहा है और सऊदी अरब, जो अपनी रूढ़िवादी विचारधारा के लिए कुख्यात था, वो अब आधुनिक विचारधारा की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में सऊदी अरब अपने इतिहास में पहली बार किसी महिला अंतरिक्ष यात्रा को स्पेस की यात्रा पर भेजने जा रहा है, जो सऊदी क्राउन प्रिंस के मिशन-2030 की बड़ी कामयाबी को दर्शाता है।

महिला अंतरिक्ष यात्री रचेगी इतिहास
सऊदी अरब इस साल के अंत में एक अंतरिक्ष मिशन पर अपनी पहली महिला अंतरिक्ष यात्री भेजेगा और सऊदी अरब की सरकारी मीडिया ने इसे सऊदी राज परिवार की तरफ से उठाया गया बड़ा कम बताया है। आधिकारिक सऊदी प्रेस एजेंसी ने कहा है, कि रेयाना बरनावी अपने मेल एस्ट्रोनॉट अली अल-कर्नी के साथ अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के मिशन पर साल 2023 की दूसरी तिमाही में यात्रा करेंगी। सऊदी की समाचार एजेंसी ने कहा है, कि सऊदी अरब के दोनों अंतरिक्ष यात्री "एएक्स -2 अंतरिक्ष मिशन के चालक दल में शामिल होंगे" और ये अंतरिक्ष उड़ान "अमेरिका से लॉन्च होगी"। तेल समृद्ध सऊदी अरब अपने पड़ोसी मुस्लिम देश संयुक्त अरब अमीरात के नक्शेकदम पर चलेगा, जो 2019 में अपने एक नागरिक को अंतरिक्ष में भेजने वाला पहला अरब देश बन गया था। संयुक्त अरब अमीरात के अंतरिक्ष यात्री हज्जा अल-मंसूरी ने आईएसएस पर आठ दिन बिताए थे। वहीं, उनके एक अन्य साथी अमीराती, सुल्तान अल-नेयादी भी इस महीने के अंत में अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की यात्रा करेंगे।

सऊदी की पहली महिला एस्ट्रोनॉट
सऊदी अरब की घोषणा के मुताबिक, इसी साल की दूसरी तिमाही में अंतरिक्ष यात्री रेयना बरनावी को अंतर्राष्ट्रय स्पेस स्टेशन पर 10 दिनों के लिए बेजा जाएगा। वहीं, सुल्तान अल-नेयादी को सऊदी अरब का अंतरिक्ष का सुल्तान भी कहा जाता है, जो अगले 6 महीने तक अंतरिक्ष स्टेशन में ही रहेंगे और उन्हें एलन मस्क की SpaceX Falcon 9 rocket से अंतरिक्ष स्टेशन में भेजा जाएगा। आपको बता दें, कि खाड़ी देशों के शासकों ने अपने देश में विविधता लाने की तरफ तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं, क्योंकि ज्यादातर देशों ने अब तेल से तौबा करने की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं। अमेरिका, भारत, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन समेत ज्यादातर देशों ने 2050 से 2070 के बीच तेल आधारित इंडस्ट्री को खत्म करने का संकल्प लिया है और इसका सबसे बड़ा असर खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, इसीलिए सऊदी अरब देश की अर्थव्यवस्था पर कोई असर ना पड़े, इसलिए कई तरह के कदम उठा रहा है।
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छवी बदलने की सऊदी की कोशिश
सऊदी अरब के वास्तविक नेता क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान भी सुधारों के लिए जोर देकर राज्य की कठोर इस्लामिक छवि को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। साल 2017 में सत्ता में आने के बाद से सऊदी अरब ने महिलाओं को बिना पुरुष अभिभावक के गाड़ी चलाने और विदेश यात्रा करने की अनुमति दे दी। वहीं, सऊदी अरब के लेबर फोर्स में उनका अनुपात 2016 के मुकाबले अब दोगुना हो चुका है। सऊदी अरब में अब महिला कार्यबल 37 प्रतिशत को पार कर गया है और अब सऊदी अरब के गैराजों में भी महिलाओं को काम करते हुए देखा जा सकता है। और अब सऊदी अरब अपने महिला अंतरिक्ष यात्री को स्पेस में भेजने वाला है, हालांकि, सऊदी अरब का अंतरिक्ष में ये पहला प्रवेश नहीं है। इससे पहले 1985 में, सऊदी शाही राजकुमार सुल्तान बिन सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़, जो एक एयरफोर्स पायलट थे, वो अमेरिका की मदद से अंतरिक्ष की यात्रा कर पहले अरब मुस्लिम बने थे। वहीं, आपको बता दें, कि सऊदी अरब ने 2018 में अंतरिक्ष कार्यक्रम स्थापित किया था और पिछले साल अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए एक और कार्यक्रम लॉन्च किया गया, जो आर्थिक विविधीकरण के लिए प्रिंस सलमान के विजन 2030 एजेंडा का हिस्सा था।












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