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इस्लामिक कट्टरपंथी के हमले में जीत गये सलमान रूश्दी, आया होश, हमलावर बोला- मैं हूं बेगुनाह

सलमान रूश्दी किताब "द सैटेनिक वर्सेज" के 1988 में प्रकाशित होने के बाद से ही उन्हें मौत की धमकियां मिलने लगीं थीं और कई मुसलमानों ने किताब को ईशनिंदा बताया।

न्यूयॉर्क, अगस्त 14: "द सैटेनिक वर्सेज" के लेखक सलमान रुश्दी को वेंटिलेटर से हटा दिया गया है और अब वो बातचीत कर रहे हैं। न्यूयॉर्क में एक इस्लामिक कट्टरपंथी के जानलेवा हमले में वो बुरी तरह से घायल हो गये थे, जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। वहीं, उनके एजेंट ने अब बयान जारी करते हुए कहा है, कि लेखक रूश्दी को अब वेटिंलेटर से हटा दिया गया है और वो बातचीत करने में भी सक्षम हैं। वहीं, रूश्दी के करीबी दोस्त आतिश तासीर ने भी एक ट्वीट करते हुए कहा है, कि वो अब वेंटिलेटर से बाहर आ गये हैं और हंसी मजाक कर रहे हैं।

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    हमलावर ने नहीं मानी गलती

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    वहीं, सैकड़ों लोगों की भीड़ के सामने सलमान रूश्दी पर हमला करने वाले हमलावर ने अपनी गलती मानने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया है। चौटाउक्वा इंस्टीट्यूशन में शुक्रवार को लेखक रूश्दी के ऊपर हमला किया गया था और आरोपी ने कहा कि, कि वो इस हमले के लिए दोषी नहीं है, वहीं, प्रॉसीक्यूटर ने कहा है, कि ये हमला पूरी तरह से प्लान करके किया गया है। इस्लामिक कट्टरपंथ का नया चेहरा बन चुके 24 साल के हादी मटर के एक वकील ने पश्चिमी न्यूयॉर्क में पेशी के दौरान उनकी ओर से याचिका दायर की। संदिग्ध शख्स काले और सफेद जंपसूट और सफेद चेहरे का मुखौटा पहने हुए अदालत में पेश हुआ, जिसके सामने से हाथ बंधे हुए थे। जिला अटॉर्नी जेसन श्मिट ने 24 वर्षीय मटर को जमानत देने से इनकार कर दिया और कोर्ट में जांच अधिकारियों ने कहा है, कि आरोपी ने सलमान रूश्दी को नुकसान पहुंचाने के लिए जान-बूझकर ये कदम उठाया था और जिस जगह पर लेखक रूश्दी को बोलना था, उस जगह पर एक दिन पहले ही पहुंच गया था और उसने अपने सीट की एडवांस बुकिंग कर ली थी। वहीं, जज ने माना कि, सलमान रूश्दी पर हमला पूर्व नियोजित, अकारण किया गया था।

    आरोपी के वकील ने क्या कहा?

    आरोपी के वकील ने क्या कहा?

    वहीं, आरोपी के वकील पब्लिक डिफेंडर नथानिएल बैरोन ने आरोप लगाया, कि आरोपी को जज के सामने पेश करने में काफी देर की गई और काफी देर तक उसे बैरक में बांधकर रखा गया, और उसके पास अपनी बेगुनाही साबित करने का संवैधानिक अधिकार है। वहीं, सलमान रूश्दी के एजेंट ने शुक्रवार शाम को कहा था, कि 75 वर्षीय लेखक का लीवर खराब हो गया था और एक हाथ और एक आंख की नसें टूट गई थीं। वहीं, उनकी आंख पर काफी चोट है और वो अपनी आंख खो सकते हैं। कई अवार्ड जीत चुके सलमान रूश्दी को दुनिया के कई हिस्सों में पढ़ा जाता है और उनके प्रशंसक दुनिया के सभी हिस्से में रहते हैं और 30 साल पहले उन्होंने "द सैटेनिक वर्सेज" लिखा था, जिसपर काफी बवाल हुआ था और उन्हें मारने की धमकिया मिली थीं, जिसके बाद से वो कड़ी सुरक्षा में रहते हैं और कांग्रेस की राजीव गांधी की सरकार के दौरान भारत छोड़ना पड़ा था।

    कट्टरपंथ के आगे नहीं झुके रूश्दी

    कट्टरपंथ के आगे नहीं झुके रूश्दी

    हालांकि, सलमान रूश्दी के खिलाफ पूरा मुस्लिम जगत हो गया था और उनकी हत्या करने वाले को करोड़ो इनाम देने की बात कही गई थी, बावजूद उन्होंने अपने किताब के लिए कभी माफी नहीं मांगी और उन्होंने कट्टरपंथियों के आगे झुकने से इनकार कर दिया। सलमान रूश्दी की बेबाक जुबान और फ्री स्पीच के लिए उनकी हमेशा से तारीफ की जाती रही है और लोग उनके साहस के लिए उनकी हमेशा से प्रशंसा करते रहे हैं। वहीं, लेखक और लंबे समय से सलमान रूश्दी के दोस्त रहे इयान मैकवान ने रुश्दी को "दुनिया भर में सताए गए लेखकों और पत्रकारों का एक प्रेरणादायक रक्षक" कहा। वहीं, अभिनेता-लेखक काल पेन ने उन्हें "पूरी पीढ़ी के कलाकारों के लिए, विशेष रूप से दक्षिण एशियाई लेखकों और पत्रकारों के लिए एक आदर्श बताया'।

    राष्ट्रपति बाइडेन ने जताया दुख

    राष्ट्रपति बाइडेन ने जताया दुख

    राष्ट्रपति जो बाइडेन ने शनिवार को एक बयान में कहा कि, वह और अमेरिका की प्रथम महिला जिल बाइडेन सलमान रूश्दी पर किए गये हमले से "स्तब्ध और दुखी" हैं। बयान में कहा गया है, कि मानवता के प्रति उनकी अंतदृष्टि, कहानी कहने की उनकी बेजोड़ क्षमता, खामोश रहने और धमकियों से डरने से उनका इनकार करना और सार्वभौमिक सत्य, साहस और आदर्शों के साथ उनका खड़ा रहना, ये उनकी दृष्टि थी, जो किसी भी स्वतंत्र और खुले समाज के निर्माण खंड हैं।" भारत के मूल निवासी सलमान रुश्दी, जो भारत से निर्वासित होकर ब्रिटेन और अमेरिका में रह रहे हैं, उन्हें उनकी वास्तविक और व्यंग्यात्मक गद्य शैली के लिए जाना जाता है, और साल 1981 में उन्हें उनकी किताब "मिडनाइट्स चिल्ड्रन" के लिए उन्हें बुकर अवार्ड हासिल हुआ था, जिसमें उन्होंने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तीखी आलोचना की थी।

    "द सैटेनिक वर्सेज" पर विवाद

    उनकी किताब "द सैटेनिक वर्सेज" के 1988 में प्रकाशित होने के बाद से ही उन्हें मौत की धमकियां मिलने लगीं थीं और कई मुसलमानों ने किताब को ईशनिंदा बताया। साल 1989 में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने उनकी मौत का फतवा जारी किया था, लेकिन उससे पहले से ही रुश्दी की किताब को भारत, पाकिस्तान और अन्य जगहों पर प्रतिबंधित किया जा चुका था और जला दिया गया था। हालांकि, उसी साल ईरानी नेता खुमैनी की मृत्यु हो गई, लेकिन उनका फतवा प्रभावी रहा। ईरान के वर्तमान सर्वोच्च नेता, खामेनेई ने कभी भी अपने स्वयं के फतवे को वापस लेने का फतवा जारी नहीं किया, हालांकि हाल के वर्षों में ईरान ने सलमान रूश्दी के बारे में बात करनी बंद कर दी थी।

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