S-400 निकला 'बेकार' तो रूस ने उतारा S-500 एयर डिफेंस सिस्टम, जानिए किलर मिसाइल पर क्यों है भारत की नजर?

S-500 India-Russia: पिछले दिनों रिपोर्ट आई थी, कि यूक्रेन ने रूसी कब्जे वाले क्षेत्र क्रीमिया में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया है और ये वो एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे रूस दुनिया का सबसे बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम बताता है और चीन-पाकिस्तान जैसे दुश्मनों को काउंटर करने के लिए भारत ने ये डिफेंस सिस्टम खरीदा हुआ है।

लेकिन, अब रिपोर्ट आई है, कि एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की कुछ हद तक फेल होने के बाद अब रूस ने क्रीमिया में S-500 एयर डिफेंस सिस्टम के कुछ एलिमेंट्स को भेजना शुरू किया है। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या रूस ने यूक्रेन में अपने उन हथियारों को भेजना शुरू कर दिया है, जिनका अभी तक टेस्ट नहीं किया गया है, और क्या यूक्रेन ने रूसी हथियारों की अक्षमता को उजागर कर दिया है।

S-500 India-Russia

रूस के पास फिलहाल सिर्फ एक सक्रिय S-500 रेजिमेंट है, जिसमें सिर्फ दो बटालियन हैं और हर बटालियन में दो एयर डिफेंस बैटरियां हैं। हालांकि, फिलहाल इसका पता नहीं चल पाया है, कि कौन से एलिमेंट्स को ट्रांसफर किया गया है, लेकिन एयर डिफेंस सिस्टम में कई ऑपरेशनल कंपोनेंट्स होते हैं, जिनमें कमांड पोस्ट, रडार और लॉन्चर शामिल हैं।

क्रीमिया को लगातार निशाना बना रहा यूक्रेन

साल 2014 तक क्रीमिया, यूक्रेन का ही हिस्सा हुआ करता था, लेकिन 2014 में रूस ने हमला कर यूक्रेन से क्रीमिया को छीन लिया और उसके बाद से क्रीमिया को रूस ने अपना क्षेत्र बना रखा है और वहां सैन्य क्षेत्र बना लिया है। लिहाजा, पिछले कुछ समय से यूक्रेन ने लगातार क्रीमिया पर हमले करने शुरू कर दिए हैं, ताकि रूस से क्रीमिया को छीना जा सके।

पिछले कुछ दिनों से यूक्रेन ने क्रीमिया में हवाई सुरक्षा, पुलों, रेल संपर्क, और बिजली और पानी की आपूर्ति पर हमले करके रूस के लिए क्रीमिया को कब्जे में रखना काफी मुश्किल बना दिया है।

यूक्रेन ने रूसी तेल भंडारण को निशाना बनाया है। दक्षिणी रूस के क्रास्नोडार क्राय में तुआप्से रिफाइनरी पर हमला किया है। यूक्रेन की नौसेना और सेना के संयुक्त अभियान ने क्रीमिया को रूस से अलग करने वाले केर्च जलडमरूमध्य के रूसी हिस्से में स्थित कावकाज बंदरगाह पर एक नौका क्रॉसिंग और तेल टर्मिनल को निशाना बनाया है।

इससे पहले, उन्होंने केर्च फेरी क्रॉसिंग के क्रीमिया की ओर हमला किया, जिससे दो रेल फेरी क्षतिग्रस्त हो गईं, जो रूस की क्रीमिया को सप्लाई चेन जारी रखने की क्षमता के लिए महत्वपूर्ण हैं। 2022 और 2023 में यूक्रेनी हमलों के बाद केर्च स्ट्रेट ब्रिज को काफी नुकसान पहुंचा है, जिससे सैन्य रसद, भारी बख्तरबंद वाहन आदि जैसे भारी ट्रेन ट्रैफिक को ले जाने की क्षमता प्रभावित हुई है।

S-500 मिसाइल सिस्टम की क्या है खासियतें?

S-500 प्रोमेथियस एक रूसी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल/एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली है, जो एस-400 और ए-235 एबीएम मिसाइल प्रणालियों का नेक्स्ट जेनरेशन है। यह वायु रक्षा प्रणाली, रूसी सैन्य टेक्नोलॉजी में एक अत्याधुनिक उन्नति है, जिसे आधुनिक हवाई युद्ध द्वारा उत्पन्न होने वाले उभरते खतरों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। यह एक थिएटर बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली है।

S-500 एयर डिफेंस सिस्टम एक बार में कई मिसाइलों को लॉन्च कर सकता है और कई हवाई खतरों को ध्वस्त कर सकता है।

S-500 के रडार और टारगेटिंग सिस्टम दुनिया में सबसे एडवांस हैं, जो 600 किलोमीटर तक की रेंज प्रदान करते हैं। इसकी सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में से एक इसकी विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों को अटैच करने की क्षमता है, जिसमें स्टील्थ विमान, हाइपरसोनिक मिसाइल और लोअर-ऑर्बिट सैटेलाइट शामिल हैं, जो रूस को एक अभेद्य सुरक्षा प्रदान करता है।

S-500 स्टील्थ विमानों की पहचान और उनका पता लगा सकता है, जिससे उनकी प्रभावशीलता कम हो जाती है। लिहाजा ये S-500 अमेरिकी F-22 रैप्टर और F-35 स्टील्थ लड़ाकू विमानों के लिए संभावित खतरा बन गया है। यह सिस्टम एक साथ 10 लक्ष्यों पर हमला कर सकता है और इसका रिस्पॉन्स टाइम तीन से चार सेकंड का है, जो S-400 के मुकाबले इसे और भी ज्यादा खतरनाक बनाता है।

एस-500 में कई तरह की मिसाइलें हैं, जो अलग-अलग लक्ष्यों और मारक क्षमता के लिए बनाई गई हैं। ये मिसाइलें 200 किलोमीटर तक की ऊंचाई तक पहुंच सकती हैं, जिससे एस-500 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोक सकता है, इसके अलावा ये निचली कक्षा के उपग्रहों को भी मार सकता है।

एस-500 में चार 40N6M लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें या लॉन्च वाहन पर लगे दो 77N6 इंटरसेप्टर शामिल हैं। 40N6M लंबी दूरी की मिसाइलों की पहुंच 400 किलोमीटर तक है, जबकि 77N6 सीरीज के इंटरसेप्टर लगभग 600 किलोमीटर तक पहुंचने में सक्षम हैं। दावा किया जाता है कि लक्ष्य की ऊंचाई 180-200 किलोमीटर तक होती है।

एस-500 पर क्यों है भारत की नजर

एस-500 की क्षमताओं का श्रेय इसके शक्तिशाली रडार, शक्तिशाली बैलिस्टिक कंप्यूटर और अत्यधिक गतिशील इंटरसेप्टर को जाता है। कथित तौर पर अल्माज़-एंटे द्वारा डिज़ाइन और निर्मित इस प्रणाली की प्रति इकाई लागत लगभग 2.5 अरब डॉलर है।

सितंबर 2021 में रूस के उप प्रधानमंत्री यूरी बोरिसोव ने कहा था, कि भारत संभावित और संभवतः पहला S-500 ग्राहक हो सकता है। यहां तक ​​कि चीन भी इस सिस्टम में दिलचस्पी दिखा सकता है। इससे पहले, चीन S-400 का पहला ग्राहक था और उसने छह बैटरियां हासिल की थीं। भारत को भी तीन बैटरियां मिल चुकी हैं और 2026 तक दो और बैटरियां भारत को मिलेंगी।

ऐसी रिपोर्ट हैं, कि चीन पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर में महत्वपूर्ण बढ़त हासिल करने के लिए रूसी मिसाइल की तरफ जा सकता है और जापान, ताइवान और अमेरिकी विमानवाहक पोतों से उत्पन्न होने वाले खतरों का सामना करेगा। यह भारत के साथ हिमालयी सीमा के लिए और S-400 की तैनाती कर सकता है। इसी तरह, अगर भारत एस-500 हासिल करता है, तो यह पीएलए वायु सेना को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से और दूर रखेगा और एबीएम प्रणाली को कॉम्प्लिमेंट करेगा। लिहाजा, अब नजर इस बात पर है, कि क्रीमिया में एस-500 कैसा प्रदर्शन करता है और फिर ये दोनों देश, इस मिसाइल सिस्टम को लेकर कोई फैसला ले सकते हैं।

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