रूस के विदेश मंत्री बोले- कोई जेलेंस्की से सवाल क्यों नहीं करता? Quad को लेकर भी साधा निशाना
जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत पहुंचे रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि भारत को रूस ने जो दर्जा दिया है, वो किसी भी अन्य देश को नहीं दिया गया है।

Image: PTI
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने रायसीना डायलॉग 2023 के 8वें संस्करण में रूस के पक्ष पर बातचीत की। रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि रूस का संबंध भारत और चीन दोनों से काफी मजबूत है। इस दौरान वे अमेरिका पर हमलावर दिखे। सर्गेन ने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि रूस ने इस देश को जो दर्जा दिया है, वो किसी भी अन्य को नहीं दिया है। इस दौरान उन्होंने क्वाड की भी आलोचना की।
जेलेंस्की से कोई क्यों नहीं पूछता?
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, 'हर कोई पूछ रहा है कि रूस कब बातचीत के लिए तैयार होगा लेकिन जेलेंस्की से कोई नहीं पूछता कि वह कब बातचीत करने जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि पिछले साल जेलेंस्की ने एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं जिसके मुताबिक जब तक पुतिन मौजूद हैं, तब तक रूस के साथ बातचीत करना आपराधिक अपराध है। क्या कोई जेलेंस्की को पूछेगा कि वह क्या कर रहे हैं?
NATO जवाबदेह क्यों नहीं है?
सर्गेई लावरोव ने कहा, 'क्या आपने कभी अमेरिका या NATO से पूछा कि अफगानिस्तान, इराक में उन्होंने क्या किया है? उनको याद नहीं जब 1999 में सर्बिया में बम गिराए गए थे। जो बाइडेन उस समय एक सीनेटर होने के नाते बता रहे थे कि मैंने इसको बढ़ावा दिया। और जब इराक बर्बाद हो गया था, तो टोनी ब्लेयर ने कहा कि यह एक गलती थी।
QUAD का हो रहा सैन्यीकरण
रूस के विदेश मंत्री ने आगे कहा, 'हम कभी भी एक दूसरे देश को किसी अन्य देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं करते। लेकिन यह सब बाहरी ताकतें इंडो-पैसिफिक स्ट्रेटजी, क्वाड के नाम पर कर रही हैं। आज क्वाड का उपयोग आर्थिक उद्देश्य के लिए नहीं किया जा रहा है। बल्कि इसका सैन्यीकरण करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि रूस हमेशा देशों को साथ में लाने की बात करता रहा है।
भारत की तारीफ की
सर्गेई लावरोव ने कहा, हमारे चीन, भारत के साथ अच्छे संबंध हैं। भारत के साथ संबंधों को रूस ने 'विशेष विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदार' का दर्जा दिया है। ये दर्जा आधिकारिक है और दस्तावेजों में है। मुझे नहीं लगता कि हमने किसी अन्य देश को आधिकारिक तौर पर इस तरह का समान दर्जा दिया है।' उन्होंने कहा, 'हम इन दोनों (भारत-चीन) महान राष्ट्रों के मित्र बनने में रुचि रखते हैं। यह रूस, चीन और भारत की तिकड़ी बनाने की पहल मेरे पहले के विदेश मंत्री ने की थी। इसका नतीजा रहा कि ब्रिक्स का गठन हुआ। मेरी भावना यह है कि ये तीनों देश जितना अधिक मिलेंगे, उतना रिश्ते बेहतर होंगे।












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