भारत से मदद मांगने पुतिन ने भेजा अपना स्पेशल दूत, भारत पहुंचे डिप्टी पीएम मंटुरोव, पीएम मोदी करेंगे मदद?

अमेरिका और यूरोपीय देशों के प्रतिबंधों से गुजर रहा रूस, आर्थिक मोर्चे पर परेशानियों का सामना कर रहा है, लिहाजा रूस का फोकस अब मुख्य तौर पर एशियाई देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने पर है।

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Russia's Deputy Prime Minister India Visit: अमेरिका और पश्चिमी देशों से सख्त आर्थिक प्रतिबंध झेल रहा रूस, अब भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए हाथ-पैर मार रहा है और इसी कड़ी में पुतिन ने अपने दूत को भारत दौरे पर भेजा है।

रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव, जो देश के उद्योग और व्यापार मंत्री भी हैं, वो सोमवार को अंतर-सरकारी रूसी-भारतीय आयोग की सह-अध्यक्षता करने के लिए दिल्ली पहुंचे है।

रूसी उप-प्रधानमंत्री के भारत दौरे का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को बढ़ाना है।

भारत दौरे पर रूस के उप-प्रधानमंत्री

भारत में रूसी दूतावास ने ट्विटर पर लिखा है, कि "डेनिस मंटुरोव कामकाजी यात्रा पर 17 अप्रैल को भारत पहुंचे हैं"।

अपनी यात्रा के पहले दिन मंटुरोव व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर 24वें भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी-टीईसी) की सह-अध्यक्षता करेंगे।

दरअसल, अमेरिका और पश्चिमी देशों से लगाए गये सख्त आर्थिक प्रतिबंधों ने रूस के लिए पश्चिमी देशों के व्यापारिक दरवाजे बंद कर दिए हैं। लिहाजा एशिया के दो बड़े देश, चीन और भारत, रूस के लिए संकटमोचक की तरफ खड़ा हुआ है।

रूसी राष्ट्रपति चाहते हैं, कि भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को काफी बढ़ाया जाए, लिहाजा रूसी प्रधानमंत्री अपने इस दौरे के दौरान, भारतीय कंपनियों से रूस में निवेश करने की अपील कर सकते हैं।

पिछले साल यूक्रेन पर आक्रमण के बाद करीब करीब सभी अमेरिका और यूरोपीय कंपनियों ने रूस से अपना व्यापार समेट लिया है, लिहाजा रूस को अब निवेश की जरूरत है, जिसमें भारत काफी अहम भूमिका निभा सकता है। ऐसा करना भारत के पक्ष में भी जाता है, क्योंकि रूस का बाजार भारतीय कंपनियों के लिए खुला हुआ है।

आपको बता दें, कि आईआरआईजीसी-टीईसी आर्थिक सहयोग की निगरानी करने वाला मुख्य संस्थागत तंत्र है। यह आर्थिक और व्यापार सहयोग, आधुनिकीकरण और औद्योगिक सहयोग, ऊर्जा, पर्यटन और संस्कृति, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और आईटी पर छह कार्य समूहों को एक साथ लाता है।

अंतर सरकारी आयोग (आईजीसी) की पूर्ण बैठक मंगलवार को होगी, जिसके बाद सह-अध्यक्ष 24वीं आईजीसी बैठक के अंतिम प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करेंगे।

इस दरान भारत और रूस, दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार, और आर्थिक और मानवीय सहयोग के मुद्दों पर चर्चा करने की योजना बना रहे हैं। भारत दौरे के दौरान, मंटुरोव कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इसकी जानकारी भारत में रूसी दूतावास की तरफ से दी गई है।

आपको बता दें, कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के विकास के लिए कई संस्थागत तंत्र स्थापित किए गए हैं और सरकारी स्तर पर प्राथमिक संस्था IRIGC-TEC है।

पिछले महीने, विदेश मंत्री एस जयशंकर और मंटुरोव ने IRIGC-TEC की आभासी बैठक की सह-अध्यक्षता की थी।

जानकारी के लिए बता दें, कि अंतर-सरकारी आयोग दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग के क्षेत्रों में द्विपक्षीय प्रगति की नियमित निगरानी के लिए एक तंत्र है, जिसे मई 1992 में हस्ताक्षरित व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग पर अंतर-सरकारी आयोग पर एक समझौते द्वारा स्थापित किया गया था।

IRIGC का पहला सत्र 13 और 14 सितंबर 13 और 14 सितंबर, 1994 को आयोजित किया गया था। अब तक, IRIGC की 23 बैठकें हो चुकी हैं।

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भारत-रूस में बढ़ता व्यापारिक रिश्ता

आपको बता दें, कि साल 2020-21 में भारत और रूस के बीच का द्विपक्षीय व्यापार सिर्फ 8.1 अरब डॉलर का था, जो अब 30 अरब डॉलर को पार कर गया है। हालांकि, दोनों देशों ने इस 30 अरब डॉलर के व्यापार सीमा तक पहुंचने का लक्ष्य 2025 तक रखा था, जिसे पहले ही पूरा कर लिया गया है।

इस व्यापार लक्ष्य को पूरा करने के बाद भी भारत की चिंता ये है, कि भारत ने ज्यादा सामान रूस से खरीदा है, लेकिन रूस की खरीददारी काफी कम रही है, लिहाजा भारत अपनी इस चिंता को रूसी मंत्री के सामने उठा सकता है। भारत अपनी चिंता को पहले भी उठा चुका है।

मंटुरोव की भारत यात्रा उस वक्त हो रही है, जब यूक्रेन की उप-विदेश मंत्री एमिन दझापरोवा भी भारत के दौरे पर आईं थीं और उन्होंने यूक्रेन में शांति के लिए भारत से साथ देने की अपील की है।

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    एमिन दझापरोवा ने दिल्ली में कहा था, कि "यूक्रेन भारत को रूस के साथ संबंधों को लेकर किसी तरह का निर्देश देने की स्थिति में नहीं है।" हालांकि, उन्होंने भारत को सलाह देते हुए कहा, कि "भारत को अपनी सैन्य और ऊर्जा निर्भरता के लिए दूसरे विकल्पों की तरफ देखना चाहिए, क्योंकि रूस भारत को ब्लैकमेल कर सकता है।" (तस्वीरें- फाइल)

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