रूस-यूक्रेन जंग से उठा सवाल, स्पेस पर अब किसका होगा राज?
नई दिल्ली, 16 मार्च: रूस और यूक्रेन के बीच बीते 20 दिन से जंग चल रहा है। इस जंग ने ना सिर्फ यूक्रेन और रूस बल्कि दुनियाभर के सामने कई तरह की चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। खास बात ये है कि यह जंग अब सिर्फ जमीन पर कब्जे तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि अंतरिक्ष में प्रभुत्व को लेकर भी इसने सवालों को जन्म दे दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या स्पेस में भी किसी एक देश का प्रभुत्व हो सकता है। ये सवाल रूस-अमेरिका में बढ़े तनाव से पैदा हुआ है।

रूस अमेरिका में बढ़ा है तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों ने रूस के अंतरिक्ष कार्यक्रमों को भी प्रभावित किया है, जिसके जवाब में रूस ने कई अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनियों को रॉकेट इंजन की बिक्री को रोक दी है। रूस ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अपनी तीन दशक लंबी साझेदारी को भी खत्म करने के संकेत दिए हैं। जिसके बाद खासतौर पर ये पूछा जा रहा है कि क्या स्पेस में तो एक-दूसरे के सहयोग के बिना काम करना संभव नहीं, ऐसे में इस सबका क्या नतीजा होगा।

क्या होगा रूस हटा तो?
सवाल उठता है कि वास्तव में अंतरिक्ष को कौन नियंत्रित करता है और क्या होगा अगर रूस वास्तव में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन छोड़ने का फैसला कर लेता है? हालांकि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के प्रवक्ता डैन हुओट ने कहा कि नासा अंतरिक्ष स्टेशन के सुरक्षित संचालन के लिए स्टेट स्पेस कॉरपोरेशन रोस्कोस्मोस (रूस का अंतरिक्ष कार्यक्रम) सहित सभी भागीदारों के साथ काम करना जारी रखे हुए है। हुओट ने कहा कि अंतरिक्ष के कक्षा में चल रहे और ग्राउंड स्टेशन के संचालन के लिए एजेंसी के समर्थन में कोई बदलाव की योजना नहीं है।

आसान नहीं अतंरिक्ष पर रूल
दरअसल जमीन पर प्रभुत्व जमाने का काम अंतरिक्ष में नहीं हो सकता है। अंतरिक्ष तब वक्रबॉल फेंकने के लिए जाना जाता है, जब उसकी उम्मीद ना हो।कोई भी देश अंतरिक्ष में अपने 'कब्जे' का दावा नहीं कर सकता है सिर्फ इसलिए नहीं कि यह बहुत बड़ा है और अज्ञात चीजों से भरा है, बल्कि इसलिए भी कि सभी देशों ने अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग की बात कही है।












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