वैगनर विद्रोह का फायदा उठाने में चूके राष्ट्रपति जेलेंस्की, पूर्वी यूक्रेन में बड़ी जीत के करीब पहुंचा रूस

Russia-Ukraine War: यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने स्वीकार किया है, कि रूसी सेना ने पूर्वी यूक्रेन के स्वातोव शहर के पास बढ़त बना ली है। यूक्रेन के उप-रक्षा मंत्री हन्ना मलियार ने एक बयान में कहा है, कि "वहां भीषण लड़ाई हो रही है। दुश्मन बिलोहोरिव्का और सेरेब्रींका पर हमला कर रहा है।"

हन्ना मलियार ने अपने बयान में कहा है, कि स्वातोव शहर के दक्षिण में रूस ने बढ़त कामय कर लिया है और उस क्षेत्र में भीषण लड़ाई हो रही है। स्वातोव शहर, यूक्रेन के पूर्व में लुहान्स्क क्षेत्र में स्थित है, जो लंबे समय से यूक्रेनी बलों के लिए एक प्रमुख लक्ष्य माना जाता रहा है। इस क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति इसलिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि रूसी सैनिकों तक पहुंचने वाली सहायता के लिए ये मार्ग काफी अहम है और अगर यूक्रेन का यहां कब्जा होता है, तो रूसी सेना के लिए ये एक बड़ी हार होगी, लेकिन वैगनर के विद्रोह के बाद भी यूक्रेन ऐसा करने में नाकाम रहा है।

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क्या फेल हो रहा यूक्रेन का काउंटरऑफेंस

यूक्रेन ने कई महीनों के ना-नाकुर के बाद पिछले महीने पहली बार ये स्वीकार किया, कि उसने रूस के खिलाफ काउंटरऑफेंस यानि जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। हालांकि, रूसी मीडिया बार बार कह रहा था, कि यूक्रेन काउंटरऑफेंस शुरू कर चुका है। लेकिन, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की ने 10 जून को इस बात को स्वीकार किया।

हालांकि, यूक्रेन ने काफी शोर-शराबे और धूम-धाम के साथ रूस के खिलाफ काउंटरऑफेंस शुरू किया था, लेकिन यूक्रेन का ये जवाबी हमला फीका पड़ता जा रहा है। यूक्रेन को शुरूआत में भारी नुकसान हुआ है और उसे लाभ काफी कम मिल पाया है। यूक्रेन की सेना ने रूसी कमजोरियों का फायदा उठाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन वो कामयाब नहीं पाई।

रूसी सूत्रों ने स्वीकार किया है, कि लड़ाई बहुत भारी लड़ी गई है और जवाबी कार्रवाई में अभी भी बहुत दम हो सकता है, लेकिन सवाल ये उठ रहे हैं, कि वैगनर ग्रुप के विद्रोह का फायदा उठाने में यूक्रेन चूक गया है?

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युद्ध में यूक्रेन को भारी नुकसान

यूक्रेन ने जवाबी हमले के लिए पश्चिमी देशों और अमेरिका से भारी मात्रा में हथियार और उपकरण जमा किए, लेकिन यूक्रेन उन हथियारों का इस्तेमाल करने में भी पीछा रह गया। वो हथियारें रूसी सैनिकों पर जो कहर बरपा सकती थीं, उसमें नाकाम रही हैं।

दूसरी तरफ रूसी रक्षा मंत्रालय बार बार कह रहा है, कि पश्चिमी देशों के हथियार यूक्रेन में फेल साबित हो रहे हैं और ज्यादातर यूरोपीय बख्तरबंद लड़ाकू वाहन ध्वस्त हो चुके हैं। हफ्तों की लड़ाई के बाद, यह साफ है, कि इस जवाबी हमले की सफलता के बारे में पहले की आशावादी उम्मीदें पूरी होने की संभावना नहीं है। हालांकि, वैगनर के विद्रोह के बाद यूक्रेन ने काफी उत्सुकता दिखाई, लेकिन वो भी हवा हो चुकी है।

वैगनर विद्रोही प्रमुख येवगेनि प्रिगोजिन के विद्रोह से उत्पन्न परिस्थितियों का फायदा लेने में यूक्रेन चूक कर गया है।

यूक्रेन की कोशिश थी, कि दक्षिण-पूर्वी शहर को जोड़ने वाले अजोव सागर तक पहुंचने वाली रूसी लाइनों को वो काट दे और ऐसा करने के लिए यूक्रेन ने अपनी ताकत का बड़ा हिस्सा इस फ्रंट पर खर्च किया। अगर यूक्रेन अपने मकसद में कामयाब होता, तो वो रूस को 2014 में जीते गये यूक्रेनी शहर क्रीमिया का रूस से जमीनी संपर्क काटने में कामयाब हो जाता, लेकिन यूक्रेन का दुर्भाग्य ये था, कि रूस भी यही अनुमान लगाए हुए बैठा था और उसने यूक्रेन के हर हमले को नाकाम कर दिया।

इसके अलावा, यूक्रेनी फोर्स ने अपनी ताकत का बड़ा हिस्सा रूस से बखमुत शहर वापस छीनने में खर्च की है, लेकिन यहां भी यूक्रेन अभी तक नाकाम रहा है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, बखमुत छीनने के लिए यूक्रेन अभी भी भारी संघर्ष कर रहा है, लेकिन कामयाबी फिलहाल दिख नहीं रही है।

इसके उलट, पिछले साल सितंबर के बाद सैनिकों की संख्या को लेकर संघर्ष करने वाले रूस ने अब भारी संख्या में सैनिकों की सप्लाई यूक्रेन में कर दी है और एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन में फिलहाल कम से कम 3 लाख रूसी सैनिक मौजूद हैं।

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