यूक्रेन के खार्किव में फंसे भारतीयों के लिए Humanitarian Corridor पर विचार कर रहा है रूस
नई दिल्ली, 02 मार्च। यूके्न के पूर्वी शहर खार्किव में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र और लोग फंसे हुए हैं जिनको वापस लाने के लिए भारत सरकार लगातार प्रयास कर रही है। वहीं रूस खार्किव में फंसे भारतीयों को Humanitarian Corridor मुहैय्या करने पर विचार कर रहा है, जिसमें भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल की एक बड़ी संख्या है।

रूस के नए राजदूत के रूप में कार्यभार संभालने के बाद से अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में, डेनिस अलीपोव ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थिति की सराहना की और कहा कि मास्को खार्किव में भारतीय मेडिकल छात्र की मौत की जांच करेगा।
राजदूत अलीपोव ने कहा हम सक्रिय रूप से ये गलियारा प्रदान करने पर विचार कर रहे हैं ताकि उन्हें रूसी क्षेत्र के माध्यम से निकाला जा सके।
रूसी राजदूत ने नवीन एस जी की मौत पर शोक व्यक्त किया, जो मंगलवार को एक सुपरमार्केट के बाहर लाइन में खड़े थे तब रूस सैनिकों की गोली का शिकार हुए। उन्होंने आश्वासन दिया कि छात्र की मौत की सही परिस्थितियों का पता लगाने के लिए जांच की जाएगी।
अलीपोव से विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कर्नाटक के रहने वाले छात्र की मौत के बाद बात की थी। जिसमें उन्होंने बताया कि भारत ने अधिकारियों के एक दल को मास्को से रूसी शहर बेलगोरोड भेजा है जो यूक्रेन की सीमा के पास स्थित है। बेलगोरोड में भारत के अधिकारी तैनात हैं लेकिन वे रूसी बमबारी के कारण खार्किव में अपने नागरिकों तक पहुंचने में असमर्थ हैं।
ह्यूमन कॉरीडोर पर राजदूत का आश्वासन उन रिपोर्टों के बीच आया है, जब खार्किव जो यूक्रेन का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, रूसी सेना के नियंत्रण में आ गया है। समझा जा रहा है कि अगर कुछ देर के लिए जारी लड़ाई को रोक दिया गया तो भारत अपने नागरिकों को वहां से निकाल लेगा।
राजदूत ने सुरक्षा परिषद में भारत की रवैये की भी सराहना की जहां उसने चल रहे संघर्ष पर एक प्रस्ताव में भाग नहीं लिया है। उन्होंने कहा हम भारत की संतुलित स्थिति के लिए उसके आभारी हैं। भारत मौजूदा संकट की गहराई और उसकी जटिलता को समझता है। हमें उम्मीद है कि भारत इस संतुलित दृष्टिकोण के साथ जारी रहेगा












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